30 साल से सरकारी जमीन पर स्कूल: अब बेदखली का नोटिस; डॉ. रमेश बदलानी के नेशनल पब्लिक स्कूल पर प्रशासन की कार्रवाई
KHULASA FIRST
संवाददाता

100 करोड़ से ज्यादा कीमत की जमीन पर कब्जे का मामला
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पूर्व में विवादित मॉडर्न मेडिकल कॉलेज के मालिक रहे डॉ. रमेश बदलानी के परिवार से जुड़े नेशनल पब्लिक स्कूल को लेकर इंदौर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। एयरपोर्ट रोड स्थित यह स्कूल जिस जमीन पर संचालित हो रहा है, उसे प्रशासनिक रिकॉर्ड में सरकारी जमीन बताया गया है। जांच के बाद तहसीलदार मल्हारगंज ने डॉ. बदलानी के बेटे मोहित बदलानी को बेदखली का नोटिस जारी किया है।
मामला सिर्फ सरकारी जमीन पर स्कूल संचालित होने तक सीमित नहीं है। प्रशासन के मुताबिक, जिस जमीन पर स्कूल और उसका खेल मैदान बना हुआ है, उसकी बाजार कीमत 100 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई जा रही है। यानी जिस जमीन को लेकर अब बेदखली की कार्रवाई हो रही है, वह बेहद बड़ी कीमत की सरकारी संपत्ति है।
सर्वे नंबर 107 और 103/1/35 पर बना है स्कूल... जिला प्रशासन की जांच में सामने आया कि नेशनल पब्लिक स्कूल सर्वे नंबर 107 और 103/1/35 की जमीन पर संचालित हो रहा है। रिकॉर्ड में दोनों सर्वे नंबर सरकारी जमीन के रूप में दर्ज बताए गए हैं।
जमीन पर कब्जे की शिकायत के बाद जून 2026 में मामला दर्ज कर नोटिस जारी किए गए थे। प्रशासन ने संबंधित पक्षों से जमीन के संबंध में जवाब और दस्तावेज मांगे थे। लेकिन प्रशासन के मुताबिक, बदलानी पक्ष की ओर से न तो कोई जवाब दिया गया और न ही जमीन पर अधिकार से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। इसके बाद प्रशासन ने जमीन पर स्कूल और खेल मैदान के निर्माण को सरकारी जमीन पर कब्जे के रूप में माना और बेदखली की कार्रवाई के निर्देश दिए।
स्कूल हटाने के आदेश, 95 हजार का जुर्माना... जांच में यह भी सामने आया कि सरकारी जमीन पर स्कूल संचालित होने के साथ वहां खेल मैदान भी बनाया गया है। फिलहाल स्कूल की संचालिका विजयलक्ष्मी खटवानी बताई गई हैं। प्रशासन ने स्कूल परिसर को सरकारी जमीन से तत्काल हटाने के आदेश दिए हैं।
इसके साथ ही सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले में 95 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों की सरकारी जमीन पर इतने लंबे समय से संचालित हो रहे स्कूल के मामले में कार्रवाई इतने वर्षों बाद क्यों हुई?
2012 से 2015 के बीच सत्ता के गलियारों में था प्रभाव... डॉ. रमेश बदलानी का नाम इससे पहले भी विवादों में रहा है। साल 2012 से 2015 के दौरान मेडिकल कॉलेज खोलने को लेकर उनकी तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच की चर्चा रही थी।
मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन से जुड़े मामले में दो जमीनों के बीच नाला आने की समस्या सामने आई थी। बताया जाता है कि तत्कालीन मुख्य सचिव एंटनी डिसा से बातचीत के बाद राजस्व नियमों में बदलाव किया गया था।
इसके बाद दो जमीनों के बीच आने वाले नाले की जमीन को पुलिया निर्माण के लिए लीज पर देने का प्रावधान किया गया। इसी व्यवस्था के आधार पर मेडिकल कॉलेज के लिए मंजूरी मिलने की बात सामने आई थी।
हालांकि, बाद में मॉडर्न मेडिकल कॉलेज से जुड़े विवाद, धोखाधड़ी के आरोप और बैंक लोन घोटाले जैसे मामलों में डॉ. बदलानी का नाम सामने आया और उनके खिलाफ अलग-अलग प्रकरण दर्ज होते गए।
30 साल तक प्रशासन को सरकारी जमीन नजर क्यों नहीं आई?... इस पूरे मामले में कार्रवाई से ज्यादा बड़ा सवाल अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। नेशनल पब्लिक स्कूल की शुरुआत 1994 में हुई थी। यानी करीब तीन दशक से स्कूल इसी परिसर में संचालित हो रहा है। इतने लंबे समय में हजारों छात्र यहां पढ़ चुके हैं और स्कूल प्रबंधन द्वारा करोड़ों रुपए की फीस भी वसूली जा चुकी होगी।
सरकारी जमीन से हुई कमाई का क्या?
यह मामला सरकारी जमीन के इस्तेमाल से होने वाली आय के सवाल को भी सामने लाता है। यदि सरकारी जमीन पर निजी संस्था द्वारा व्यावसायिक गतिविधि संचालित की गई है और उससे वर्षों तक आय अर्जित हुई है, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि उस जमीन से हुई कमाई का क्या हुआ और उसकी जवाबदेही किसकी है।
सरकारी जमीन से जुड़े अन्य मामलों में भी कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ चुके हैं। ऐसे में नेशनल पब्लिक स्कूल का मामला अब सिर्फ एक स्कूल की बेदखली का मामला नहीं रह गया है। यह सवाल सरकारी जमीन की निगरानी, प्रशासन की जवाबदेही और इतने वर्षों तक चली व्यवस्था पर भी खड़ा करता है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन बेदखली के आदेश को किस तरह लागू करता है और क्या सरकारी जमीन पर इतने लंबे समय तक हुए कब्जे से जुड़े आर्थिक पहलुओं की भी जांच की जाती है।
ऐसे में सवाल सीधा है...
अगर जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी, तो 30 साल तक प्रशासनिक अमले को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? सरकारी जमीन पर निर्माण हुआ, स्कूल चलता रहा, छात्र पढ़ते रहे और फीस वसूली जाती रही।
लेकिन कार्रवाई अब जाकर हुई। दूसरा सवाल यह भी है कि 100 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत की जमीन पर कथित कब्जे के मामले में सिर्फ 95 हजार रुपए के अर्थदंड और बेदखली की कार्रवाई ही पर्याप्त है या नहीं?
संबंधित समाचार

महाकाल के दरबार में पहुंचे इंद्रेश महाराज:बोले- बाबा के चरणों में साक्षात प्रणाम किया; मंदिर समिति ने किया स्वागत

30 नवंबर को रिटायर होंगे DGP कैलाश मकवाणा:प्रदेश के नए पुलिस प्रमुख 1 दिसंबर को संभालेंगे कमान; गृह विभाग ने जारी किया सेवानिवृत्ति का आदेश, दो साल के कार्यकाल को लेकर चल रहा था तारीख का विवाद

निरस्त धाराओं पर आदेश देना पड़ा भारी:नगर निगम के अधिकारी पर 1 लाख की कॉस्ट; हाईकोर्ट ने कहा-गलत आदेश से न्यायालय का समय बर्बाद हुआ

लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई:दो कर्मचारी रिश्वत लेते गिरफ्तार; इस एवज में मांगी थी घूस

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की विवादित टिप्पणी:मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर साधा निशाना; भ्रष्टाचार और नेताओं के बीच खींचतान को लेकर उठाए सवाल

थानों में सुनवाई नहीं:इसलिए हर मंगलवार जनसुनवाई में उमड़ रहे पीड़ित

वीडियो देखिये, इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शक्ति प्रदर्शन:चरैवेति-एकत्रीकरण में जुटेंगे एक लाख स्वयंसेवक; ताब्दी वर्ष के समापन पर बड़ा आयोजन

रोक के बावजूद गृह निर्माण मंडल को जमीन का अंतरण किस आधार पर:हुकुमचंद मिल जमीन की रजिस्ट्री पर 19 करोड़ से अधिक की स्टांप ड्यूटी बकाया होने का आरोप

दीपावली से पहले खाद्य विभाग की सख्ती:मावा फैक्ट्रियों पर की कार्रवाई; सैंपल लेकर लैब भेजे

हार्ट अटैक के बढ़ते खतरे पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता:हर 5 में से एक मरीज 20–40 साल का; खराब जीवनशैली, मोटापा, प्रदूषण और शारीरिक गतिविधियों की कमी बढ़ा सकती है जोखिम

जहरीले जलकांड के बाद हटाया:अब सागर कलेक्टर बने यादव

नल कनेक्शन लगे फिर भी नहीं आया पानी:ग्रामीण हो रहे परेशान

वीडियो देखिये, आबकारी विभाग और DGGI की बड़ी कार्रवाई:लावारिस हालत में मिले शराब से भरे दो कंटेनर; इतने करोड़ की शराब जब्त

चुनाव आयोग और भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस का सत्याग्रह:महंगाई, बेरोजगारी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर कलेक्टोरेट पर प्रदर्शन; राष्ट्रपति-राज्यपाल के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

एमपी सरकार का बड़ा फैसला:इन्हें बनाया राज्य आनंद संस्थान का CEO; राजेश हिंगणकर को फिर मिली सीएम ऑफिस में जिम्मेदारी, कैबिनेट ने दी मंजूरी

ऑरिका ग्रीन्स की बाउंड्रीवॉल और निर्माण रोकने की मांग:ग्राम कवटी के खसरा 111-112 को लेकर एसडीएम-तहसीलदार से शिकायत

यातायात व्यवस्था को अधिक सुचारू, सुरक्षित बनाने की कवायद:जागरूकता के साथ-साथ नियम उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई

डेली कॉलेज तक गाड़ियां प्रतिबंधित:पार्किंग के बाद कार्यक्रम स्थल तक पैदल जाना होगा

दो हाई-स्पीड ट्रेनों के बीच भीषण टक्कर:40 से ज्यादा लोगों की मौत; सैकड़ों घायल

राजकुमार ब्रिज के नीचे 60 वर्षीय वृद्ध ब्राउन शुगर तस्कर गिरफ्तार
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!