उस दिन चूहा नीचे होता है और गणेशजी ऊपर
KHULASA FIRST
संवाददाता

चंद्रशेखर शर्मा 94250-62800 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
गणेश का अर्थ केवल विघ्नहर्ता नहीं है। गणेश उस चेतना का प्रतीक है, जो विघ्नों को देखकर उनसे लड़ती नहीं, उनको समझती है। तुम्हारा मन हर समस्या से लड़ना चाहता है। कोई कुछ कह दे तो तुम लड़ने लगते हो, कोई तुम्हें अपमानित कर दे, तो तुम भीतर ही भीतर जलने लगते हो।
क्या तुमने कभी सोचा भी है कि गणेश चतुर्थी के दिन हम गणेश की मूर्ति घर में क्यों लाते हैं? आखिर उस हाथी के सिर वाले रूप के पीछे ऐसा कौन सा रहस्य छिपा है जिसे सदियों से मनुष्य केवल पूजा समझता रहा? क्या गणेश केवल किसी मंदिर में बैठी हुई एक मूर्ति है? या फिर गणेश तुम्हारे भीतर छिपी हुई उस चेतना का नाम है जिसे तुमने अभी तक पहचाना ही नहीं?
और एक बात पर ध्यान देना अगर गणेश केवल धन देने वाले देवता होते या अगर केवल विघ्न हटाने वाले देवता होते तो फिर उन्हें हाथी का सिर ही क्यों दिया गया है? चूहे को उनका वाहन क्यों बनाया गया? उनके एक दांत को क्यों रखा गया और दूसरा क्यों टूट गया? इतना विचित्र रूप क्यों बनाया गया?
क्योंकि धर्म हमेशा संकेतों में बोलता है और मनुष्य संकेत को छोड़कर कहानी पकड़ लेता है! वो मूर्ति को देखता है। फूल चढ़ाता है, मिठाई चढ़ाता है, घण्टी बजाता है, लेकिन उस मूर्ति के भीतर छुपे संदेश को नहीं देखता! गणेश चतुर्थी इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि एक दिन भगवान घर में आते हैं। गणेश चतुर्थी इसलिए महत्वपूर्ण है कि एक दिन तुम्हें अपने भीतर उतरने का अवसर मिलता है! आंखें बंद करो और एक क्षण के लिए अपने भीतर देखो। तुम्हारे भीतर कितने विघ्न हैं?
कोई बाहर का विघ्न नहीं, तुम्हारे अपने मन के विघ्न। डर, क्रोध, अहंकार, चिंता, तुलना, ईर्षा, भविष्य की बेचैनी, अतीत का बोझ। लोगों की राय का डर, हार जाने का भय और सबसे बड़ा विघ्न स्वयं को न पहचान पाना!
गणेश का अर्थ केवल विघ्नहर्ता नहीं है। गणेश उस चेतना का प्रतीक है, जो विघ्नों को देख कर उनसे लड़ती नहीं, उनको समझती है। तुम्हारा मन हर समस्या से लड़ना चाहता है। कोई कुछ कह दे तो तुम लड़ने लगते हो, कोई तुम्हें अपमानित कर दे, तुम भीतर ही भीतर जलने लगते हो।
कोई तुमसे आगे निकल जाए, तो तुम्हारे भीतर बेचैनी पैदा होती है, किसी ने तुम्हें छोड़ दिया तो तुम अपने ही भीतर एक कहानी बनाकर बैठ जाते हो, यही तो विघ्न है। और मजा ये है कि मनुष्य जीवनभर बाहर के विघ्न हटाने में लगा रहता है।
घर में पूजा करेगा कि काम बन जाए, मंदिर जाएगा कि रास्ता खुल जाए, प्रार्थना करेगा कि समस्या खत्म हो जाए। लेकिन असली प्रश्न ये नहीं है कि रास्ते में पत्थर क्यों है? असली प्रश्न ये है कि तुम्हारे भीतर वो कौन है जो हर पत्थर को दीवार बना देता है?
गणेश का हाथी जैसा मस्तक इसी ओर संकेत करता है। हाथी चलता धीरे है, लेकिन उसकी चाल में जल्दबाजी नहीं होती, उसकी शक्ति शोर नहीं करती। उसे अपनी ताकत सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं होती। मनुष्य कमजोर होता है तो शोर करता है, जिसे अपने भीतर शक्ति का अनुभव नहीं होता, वो दूसरों पर प्रभाव डालना चाहता है।
जो भीतर से खाली होता है वो बाहर बड़ा दिखना चाहता है, जो स्वयं को नहीं जानता! वो चाहता है कि पूरी दुनिया उसे जाने, लेकिन हाथी को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं! यही गणेश का रहस्य है कि बड़े बनो, लेकिन दिखने में नहीं अपितु समझ में बड़े बनो। तुम्हारा सिर बड़ा हो, इसका अर्थ ये नहीं कि तुम्हारे विचार अधिक हों।
इसका अर्थ है तुम्हारी दृष्टि बड़ी हो, तुम्हारे जीवन में कोई तुम्हें अपमानित करे और तुम तुरंत प्रतिक्रिया न दो ये बड़ी बुद्धि है। कोई तुम्हारी प्रशंसा करे और तुम हवा में ना उड़ो ये बड़ी बुद्धि है। तुम्हें सफलता मिले और तुम्हारा अहंकार ना बढ़े ये बड़ी बुद्धि है। तुम्हें असफलता मिले और तुम्हारा अस्तित्व ना टूटे।
ये बड़ी बुद्धि है। गणेश का विशाल मस्तक कहता है छोटी घटनाओं में मत उलझो। जीवन को बड़ा करके देखो। जिस आदमी के भीतर दृष्टि छोटी है, उसकी छोटी-सी समस्या भी पहाड़ बन जाती है और जिसकी दृष्टि बड़ी है उसके सामने पहाड़ भी एक दृश्य बन जाता है! सोचो, एक ही परिस्थिति दो मनुष्यों के सामने आती है, एक टूट जाता है, दूसरा उससे सीख लेता है। परिस्थिति एक थी, लेकिन परिणाम अलग कैसे हो गया? क्योंकि देखने वाला बदल गया। यही आध्यात्मिकता है।
गणेश चतुर्थी तुम्हें बाहर किसी चमत्कार की प्रतीक्षा करना नहीं सिखाती, वो तुम्हें अपने देखने के ढंग को बदलना सिखाती है। और अब उस छोटे से चूहे को देखो, जो गणेश का वाहन है। ये बात बड़ी मजेदार है। इतने विशाल शरीर वाले गणेश और उनका वाहन एक छोटा सा चूहा। क्यों? क्योंकि धर्म यहां तुम्हारे मन की एक गहरी चाल पकड़ता है! चूहा छोटा है, लेकिन उसकी गति बहुत तेज है! वो एक जगह टिकता नहीं। कभी उधर, कभी इधर।
कभी ये काटा, कभी वो सूंघा, कभी भागा, कभी छिपा। तुम्हारा मन भी ऐसा ही है। तुम अभी यहां हो और मन कहीं और। तुम खाना खा रहे हो और मन कल की चिंता कर रहा है। तुम परिवार के साथ बैठे हो और मन किसी पुराने अपमान को दोहरा रहा है।
तुम रात को बिस्तर पर हो और मन भविष्य में दौड़ रहा है। मन कभी वर्तमान में नहीं रहता। ये चूहा तुम्हारे चंचल मन का संकेत है, लेकिन ध्यान देना गणेश चूहे पर बैठे हैं। चूहा गणेश को नहीं चला रहा, गणेश चूहे को चला रहे हैं, यही पूरा रहस्य है।
तुम्हारे भीतर मन होना समस्या नहीं है, मन का मालिक ना होना समस्या है। मन तुम्हारा सेवक होना चाहिए, लेकिन आज मन मालिक बना बैठा है। वो कहता है आज दुःखी हो जाओ। तुम दुःखी हो जाते हो। वो कहता है आज डर जाओ। तुम डर जाते हो, वो कहता है इस आदमी से नफरत करो, तुम नफरत करने लगते हो। वो कहता है, उस आदमी से अपनी तुलना करो, तुम तुलना करने लगते हो।
फिर तुम कहते हो मेरा जीवन मेरे हाथ में नहीं! तो तुम्हारा जीवन तुम्हारे हाथ में क्यों नहीं है? क्योंकि चूहे ने लगाम पकड़ ली है। सो जिस दिन जागरूकता आती है उसी दिन चूहा नीचे हो जाता है और गणेश ऊपर! गणेश चतुर्थी का एक रहस्य यह है कि मन को मारना नहीं है, बल्कि उसका मालिक बनना है।
अब गणेश के उन विशाल कानों को देखो। इतने बड़े कान क्यों? क्योंकि जीवन में सबसे आवश्यक कला बोलना नहीं है अपितु सुनना है। लेकिन सुनना केवल शब्दों को सुनना नहीं है। सुनना मतलब सामने वाले की बात के पीछे छुपे हुए मन को सुनना।
कोई तुम्हारे ऊपर क्रोध कर रहा है। तुम उसके शब्द सुनते हो, लेकिन उसके भीतर छिपे डर को नहीं सुनते। कोई तुम्हें अपमानित कर रहा है, तुम उसके शब्द सुनते हो लेकिन उसके भीतर की असुरक्षा को नहीं सुनते।
कोई तुम्हें बार-बार रोकता है। तुम उसका विरोध देखते हो। लेकिन शायद उसके भीतर तुम्हें खो देने का भय छिपा हो। जिस दिन तुम केवल शब्दों के पार सुनना सीख जाओगे, उसी दिन बहुत से झगड़े समाप्त हो जाएंगे। मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या यही है कि वो सुनता कम है और उत्तर पहले से तैयार रखता है।
दूसरा बोल रहा है। तुम उत्तर सोच रहे हो। वो अभी अपनी बात पूरी भी नहीं करता और तुम्हारे भीतर प्रतिक्रिया तैयार हो जाती है। यही बेहोशी है। गणेश के बड़े कान कहते हैं, पहले सुनो। जब सुनने की कला आती है तब ज्ञान पैदा होता है, क्योंकि ज्ञान पुस्तकों से कम और जीवन को सुनने से अधिक आता है!
जमा गणेश चतुर्थी में सबसे बड़ा विसर्जन मूर्ति का नहीं है। सबसे बड़ा विसर्जन अहंकार का है! मूर्ति पानी में चली जाती है, लेकिन अगर अहंकार भीतर वैसे ही बैठा रह गया तो विसर्जन पूरा नहीं हुआ। तुम फूल चढ़ाकर लौट आये, लेकिन तुम्हारा क्रोध वही है। तुम आरती करके लौट आये, लेकिन तुम्हारी ईर्षा वही है।
तुम प्रसाद लेकर लौट आये, लेकिन तुम्हारा अहंकार वही है। तो पूजा किसकी हुई? मूर्ति की! जीवन की नहीं! गणेश तुम्हें बाहर से भीतर लाने आते हैं। यही कारण है कि गणेश चतुर्थी का
उत्सव आरंभ में मूर्ति की स्थापना है और अंत में विसर्जन!
(जैसा ओशो के नाम से विख्यात आचार्य रजनीश फरमा गए हैं।)
संबंधित समाचार

इंडिया-वेस्टइंडीज T20 मुकाबला:स्टेडियम में तैयारियां तेज; पिच से सुरक्षा तक इंतजाम शुरू, फैंस में भारी उत्साह

MP के युवाओं के लिए सुनहरा मौका:कांस्टेबल ड्राइवर के पदों पर निकली भर्ती; जानिए आवेदन की पूरी प्रोसेस

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे पर अड़े राहुल गांधी:जंतर-मंतर जाने को लेकर पुलिस से बहस; प्रियंका का सड़क पर लेटकर धरना

रिकॉर्ड में एक दुकान, मौके पर अवैध मल्टी खड़ी कर डकार गए एमओएस:जोन-13 में बिल्डर की धांधली- नक्शा बदलकर लाखों का राजस्व डुबाया

बाउंड ओवर नोटिस से नाराज 28 पार्षदों का सामूहिक इस्तीफा:आधी रात थाने पर धरना; इनके पहुंचने पर माने

MP में बढ़ा हुआ बस किराया कम करने की तैयारी:मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए ये निर्देश

मंदिर से चोरी अष्टधातु प्रतिमाएं बरामद:पुलिस ने आरोपी को पकड़ा; चार साथियों के नाम का खुलासा

बैंक अधिकारी बनकर नगर निगम ठेकेदार से ठगी:खाते से उड़ाए हजारों रुपए; शिकायत के बाद केस दर्ज

परिवार ने कलेक्टर से लगाई गुहार:धमकी और मानसिक प्रताड़ना की शिकायत; सरकारी के बाद अब निजी जमीन पर कब्जे का आरोप

MP में पटवारियों पर कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद:4 सस्पेंड; 52 को सेवा समाप्ति का नोटिस, काम बंद करने की दी चेतावनी

3 साल से स्पीड ब्रेकर की मांग अधूरी, लोग नाराज:स्कूटी से गिरकर महिला हो चुकी है घायल

जनसुनवाई में अधिकारियों को सौंपा दूषित पानी का गिफ्ट:नगर निगम की नाकामी; 6 महीने से गंदा पानी पीने को मजबूर है जनता

देखिए वीडियो, पांच मंजिला इमारत ढही:इतने लोगों के दबे होने की आशंका; दो बच्चे सुरक्षित निकाले गए, रेस्क्यू जारी

सड़कों पर पसरी गंदगी, गलियों में न झाड़ू लगी, न पहुंची कचरा गाड़ियां:नंबर वन शहर की सफाई व्यवस्था बेपटरी

कांग्रेस पार्षद का निधन:अस्पताल में तोड़ा दम; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि

आटा चक्की चलाते-चलाते प्रॉपर्टी लाइन का बड़ा ब्रोकर बन गया गुड्डा:बंटी नागर ने भी निभाया याराना; दोनों ने जमकर कूटा माल

फर्नीचर गोदाम में लगी भीषण आग:करोड़ों रुपए का सामान जलकर हुआ राख; 7 फायर ब्रिगेड मौके पर

तू गलत कर रहा है हमें तो प्लॉट लग रहा है:विकास जरिया को धमकाने की रिकॉर्डिंग आई सामने

रावण दहन के विरोध में समाज:इतने आयोजकों को कानूनी नोटिस; कहा-‘प्रथा बंद करें, नहीं तो आंदोलन करेंगे’

40 साल से बसे 400 परिवार सरकारी रिकॉर्ड और मूलभूत सुविधाओं से बाहर:स्वामित्व योजना में राऊ की एक भी रजिस्ट्री नहीं
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!