टॉपर्स ध्यान दें!: ई-स्कूटी की राशि का नहीं किया सही इस्तेमाल तो होगी वसूली; FIR की भी तैयारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के 12वीं कक्षा के टॉपर्स के लिए चल रही मुख्यमंत्री ई-स्कूटी, मोटराइज्ड वाहन योजना को लेकर सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
योजना के तहत विद्यार्थी या उसके माता-पिता/अभिभावक के बैंक खाते में भेजी गई राशि का इस्तेमाल निर्धारित वाहन खरीदने के लिए ही करना होगा।
यदि राशि मिलने के बाद पात्र विद्यार्थी वाहन नहीं खरीदता या योजना की राशि का अन्य तरीके से इस्तेमाल किया जाता है तो राशि की वसूली की जा सकती है। संबंधित मामले में विद्यार्थी के पालक के खिलाफ पुलिस में FIR भी दर्ज कराई जा सकती है।
यह योजना शैक्षणिक सत्र 2025-26 में सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों से कक्षा 12वीं की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए लागू की गई है।
ई-स्कूटी के लिए 1.20 लाख तक, मोटराइज्ड वाहन के लिए 90 हजार
सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र विद्यार्थी अपनी पसंद का इलेक्ट्रिक वाहन चुन सकता है। योजना में ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपए और मोटराइज्ड वाहन के लिए अधिकतम 90 हजार रुपए की राशि निर्धारित की गई है।
इस राशि से केवल निर्धारित श्रेणी का वाहन ही खरीदा जा सकेगा। योजना की राशि का उपयोग किसी दूसरे वाहन को खरीदने के लिए नहीं किया जा सकता।
विद्यार्थी का खाता नहीं तो माता-पिता को मिलेगी राशि
वाहन की निर्धारित राशि विद्यार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। यदि विद्यार्थी का बैंक खाता उपलब्ध नहीं है तो राशि उसके माता-पिता या अभिभावक के खाते में भेजी जा सकती है। वाहन के रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और एसेसरीज से संबंधित राशि संबंधित वाहन विक्रेता को दिए जाने का प्रावधान है।
पैसा मिलने के बाद वाहन नहीं खरीदा तो क्या होगा?
सरकार ने योजना की राशि मिलने के बाद वाहन की खरीदी नहीं करने को गंभीरता से लिया है। वाहन खरीदना सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी की होगी।
यदि विद्यार्थी राशि मिलने के बाद वाहन नहीं खरीदता है तो उससे और उसके पालक से राशि की वसूली की कार्रवाई की जा सकती है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित पालक के खिलाफ पुलिस में FIR दर्ज कराने की कार्रवाई भी हो सकती है।
जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार के अनुसार, योजना की राशि का निर्धारित उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं होने पर विद्यार्थी के साथ पालक से भी राशि वसूली जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस कार्रवाई की जा सकती है।
जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में होगी निगरानी
योजना के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए जिला स्तर पर समिति गठित की जाएगी। इसकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर करेंगे।
समिति में जिला परिवहन अधिकारी, जिला कोषालय अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी सदस्य होंगे। समिति योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को वाहन मिलने और योजना की राशि के सही इस्तेमाल की निगरानी करेगी।
तीन साल तक न बेच सकेंगे, न किसी को दे सकेंगे
मुख्यमंत्री ई-स्कूटी योजना के तहत खरीदे गए वाहन को लेकर भी सरकार ने महत्वपूर्ण शर्त रखी है। विद्यार्थी वाहन खरीदने के बाद उसे तीन साल तक बेच नहीं सकेगा और न ही किसी दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित कर सकेगा।
इसके लिए वाहन के रजिस्ट्रेशन के समय तीन साल की हाइपोथिकेशन दर्ज की जाएगी। यानी तय अवधि तक वाहन के हस्तांतरण पर प्रतिबंध रहेगा।
टॉपर्स के लिए योजना, लेकिन नियमों का पालन जरूरी
मुख्यमंत्री ई-स्कूटी योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में 12वीं कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना है।
सरकार की ओर से वाहन खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है, लेकिन इसके साथ राशि के इस्तेमाल और वाहन के हस्तांतरण को लेकर स्पष्ट शर्तें भी लागू की गई हैं।
ऐसे में योजना के पात्र विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को राशि प्राप्त होने के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार ही वाहन खरीदना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर वसूली से लेकर कानूनी कार्रवाई तक की जा सकती है।
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