वैश्विक तनाव के बीच उद्योगों पर सख्ती: लीज रेंट से पहले 3 साल का टर्नओवर और रोजगार डेटा अनिवार्य
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच बढ़ते वैश्विक तनाव और उसके आर्थिक असर से जूझ रहे उद्योगों के सामने अब नई प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो गई है। सरकार ने औद्योगिक इकाइयों के लिए लीज रेंट जमा करने से पहले नई शर्त लागू कर दी है, जिसके तहत अब उन्हें पिछले तीन वर्षों का विस्तृत वित्तीय और रोजगार संबंधी डेटा देना अनिवार्य कर दिया गया है।
लीज रेंट जमा करने से पहले देनी होगी पूरी जानकारी
नई व्यवस्था के अनुसार, उद्योगों को अब पोर्टल पर उपलब्ध एक विशेष विंडो में जानकारी भरनी होगी। इसमें तीन प्रमुख बिंदुओं को अनिवार्य किया गया है- पिछले तीन वर्षों (2023-24, 2024-25, 2025-26) का वार्षिक टर्नओवर, कुल निवेश की जानकारी और स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों/मजदूरों की संख्या।
जब तक यह पूरा डेटा पोर्टल पर दर्ज नहीं किया जाएगा, तब तक लीज रेंट जमा करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी।
पहले से दबाव में उद्योग, बढ़ी चिंता
उद्योग संगठनों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते कच्चे माल, लॉजिस्टिक्स और पूंजी की उपलब्धता पहले ही प्रभावित है। ऐसे में नई शर्तों ने उद्योगों की परेशानी और बढ़ा दी है।
भुगतान में देरी की आशंका
उनका तर्क है कि वे समय पर लीज रेंट और अन्य शुल्क जमा करना चाहते हैं, लेकिन अतिरिक्त प्रक्रियाओं के कारण भुगतान में देरी की आशंका बढ़ गई है, जिससे पेनल्टी का जोखिम भी रहेगा।
“ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” के खिलाफ कदम?
उद्योगपतियों ने इस फैसले को “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” की भावना के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि टर्नओवर की जानकारी देना समझ में आता है, लेकिन निवेश और रोजगार के आंकड़े लगातार बदलते रहते हैं। यह सारी जानकारी पहले से ही जीएसटी, आयकर और प्रोविडेंट फंड विभाग को दी जा चुकी होती है। ऐसे में एक ही डेटा को दोबारा अनिवार्य करना अनावश्यक बोझ बढ़ाने जैसा है।
राजस्व पर भी पड़ सकता है असर
उद्योग जगत का मानना है कि इस नई प्रक्रिया के चलते लीज रेंट जमा करने में देरी हो सकती है, जिससे सरकार को समय पर राजस्व प्राप्त नहीं होगा। साथ ही, उद्योगों पर पेनल्टी का अतिरिक्त दबाव भी बनेगा।
राहत की उम्मीद थी, बढ़ा दिया बोझ
पीथमपुर औद्योगिक संगठन के गौतम कोठारी ने कहा कि मौजूदा हालात में उद्योगों को राहत की जरूरत थी, लेकिन इसके उलट अतिरिक्त शर्तें लागू कर दी गई हैं।
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर प्रदेश के अन्य औद्योगिक संगठनों के साथ चर्चा कर सरकार को ज्ञापन भेजने की तैयारी की जा रही है, ताकि इस निर्णय पर पुनर्विचार हो सके।
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