तीन महिला अधिकारी लिख रहीं विकास की नई कहानी: कृषि भूमि अधिग्रहण के वैकल्पिक मुआवजा मॉडल पर किया जा रहा काम
KHULASA FIRST
संवाददाता

बड़वाह-धामनोद स्टेट हाई-वे विरोधी आंदोलन को लिया चुनौती के रूप में
डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
यह खबर प्रशासन और किसानों के बीच समाधान खोजने की एक सकारात्मक पहल की कहानी भी बन सकती है। मुख्य किरदार तीन महिला अधिकारी है। बड़वाह–धामनोद स्टेट हाईवे का निर्माण और भूमि अधिग्रहण खरगोन जिला प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने बड़ा आंदोलन छेड़ रखा है। अधिकारियों को खेतों में घुसने नहीं दिया जा रहा है। आंदोलन का नेतृत्व भारतीय किसान संघ कर रहा है। इस विषय की गंभीरता को प्रशासन में समझा और तीन महिला अधिकारियों को वैकल्पिक समाधान की जिम्मेदारी सौंपी है।
किसानों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए तीन महिला अफसरों की अनोखी पहल क्या रंग लाएगी यह तो समय बताएगा। किसान बड़वाह–धामनोद स्टेट हाई-वे परियोजना में कम मुआवजे से नाराज हैं दूसरी ओर जिला प्रशासन इस चुनौती को अवसर में बदलने की कोशिश में जुटा है।
कलेक्टर भव्या मित्तल के नेतृत्व में तीन महिला अधिकारी अधिकतम और न्यायसंगत मुआवजा दिलाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। प्रशासन की यह पहल जिले में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में उभर रही है।
किसानों की आवाज विरोध नहीं, न्याय की मांग है। इस मुद्दे के साथ पिछले दिनों आंदोलनरत किसान संघ और और बड़ी संख्या में किसान मंडलेश्वर एसडीएम कार्यालय पहुंचे और अपनी आपत्ति दर्ज कराईं।
बैठक में भारतीय किसान संघ के संभागीय अध्यक्ष कृष्णपाल सिंह राठौर ने स्पष्ट किया- किसान विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन उन्हें जमीन का उचित मूल्य मिलना जरूरी है।
किसानों ने चार गुना मुआवजा, सड़क के जमीनी स्तर, अधिसूचना के पहले दर्ज डायवर्सन के आवेदनों को मान्य करने और पहुंच मार्ग (सर्विस रोड) की मांग प्रमुख रूप से उठाई। इनको कलेक्टर ने गंभीरता से लिया है ऐसा अभी तक के घटनाक्रम से स्पष्ट होता है।
कलेक्टर भव्या मित्तल का नवाचार
भव्या मित्तल की कार्यशैली को जिले में परिणाम आधारित प्रशासन के रूप में जाना जाता है। समाधान केंद्रित दृष्टिकोण: विवादों को टकराव नहीं, संवाद से सुलझाने पर जोर। डेटा आधारित निर्णय : वेस्टर्न रिंग रोड व ग्रीनफील्ड के मुआवजा मॉडल का अध्ययन।
महिला नेतृत्व को बढ़ावा: संवेदनशील मामलों में जिम्मेदारी देना। उन्होंने इस परियोजना को चुनौती के रूप में स्वीकार कर स्पष्ट किया है किसानों को बाजार मूल्य के करीब या अधिकतम संभव मुआवजा दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।
डिप्टी कलेक्टर पूर्वा मंडलोई : संवाद की मजबूत कड़ी। खरगोन में काम कर चुकी हैं। मंडलेश्वर में किसानों के साथ बैठक कर रहीं पूर्वा मंडलोई प्रशासन और किसानों के बीच भरोसे की कड़ी हैं। उनकी कार्यशैली जमीनी है।
सीधे किसानों से बातचीत करती है पहले वह कार्यालय के बाबू राज पर निर्भर रही अब शायद भ्रष्ट बाबू तंत्र पर निर्भर नहीं है। किसानों की बैठक में उन्होंने कहा तीन दिन में जानकारी दी जाएगी। उनकी बैठकों से किसानों में यह विश्वास बना है कि उनकी बात सुनी जा रही है।
उप पंजीयन अधिकारी गरिमा चौहान: मुआवजा गणना की विशेषज्ञ। भूमि मूल्यांकन और गाइडलाइन तय करने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने रजिस्ट्री और गाइडलाइन डेटा का विश्लेषण किया।
इंदौर मॉडल का अध्ययन कर रही हैं, जहां 200% से 300% तक गाइडलाइन बढ़ाई गई है। न्यायसंगत मूल्य निर्धारण के लिए तकनीकी सहयोग से सुनिश्चित कर रही हैं मुआवजा औपचारिक न हो, बल्कि वास्तविक बाजार मूल्य के करीब पहुंचे।
किसानों का शांतिपूर्ण आंदोलन
वैसे बैठक मप्र सड़क विकास निगम एमपीआरडीसी के दबाव में नियम कायदों के विपरीत भूमि अधिग्रहण कर सड़क निर्माण शुरू करने के लिए बुलाई गई थी। इस प्रोजेक्ट में एमपीआरडीसी कि अभी तक की गई सारी कार्रवाई कानून के विपरीत नजर आ रही है इसलिए किसानों ने एकजुट होकर सड़क निर्माण के लिए किए जा रहे सर्वे कार्य का विरोध अनूठे और शांतिपूर्ण तरीके से करना शुरू किया है।
प्रशासन को ताकत के साथ बता दिया गया है जब तक चार गुना मुआवजा निर्धारण नहीं होता तब तक उनके खेतों में कोई भी प्रशासनिक और एमपी आरडीसी का अधिकारी घुस नहीं सकता। कलेक्टर ने विषय की गंभीरता को समझते हुए इस बैठक को समाधान की दिशा में ले जाने के लिए पंजीयक विभाग की सुश्री शुक्ला को भी होमवर्क के साथ शामिल किया।
क्योंकि किसानों के इस आंदोलन का नेतृत्व भारतीय किसान संघ कर रहा है और यह संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रमुख अंग है। यह संगठन कृषि भूमि को संरक्षित करने के साथ में केंद्रीय भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के अंतर्गत चार गुना मुआवजा और विस्थापन पुनर्वास सामाजिक और पर्यावरण प्रभाव को लेकर देश भर में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ नीतिगत और समाधान कारक आंदोलन कर रहा है।
उपरोक्त प्रोजेक्ट के के आंदोलन का नेतृत्व किसान संघ के संभागीय अध्यक्ष कृष्णपालसिंह राठौड़, जिलाध्यक्ष सदाशिव पाटीदार, श्यामसिंह पवार जगदीश पाटीदार आदि कर रहे हैं। इसलिए भी प्रशासन टकराव की स्थिति से बचना चाहता है और किसानौ की मांगों को गंभीरता के साथ ले रहा है। खरगोन प्रशासन मुआवजा बढ़ाने के अंतरिम फॉर्मूले से तीन दिन में किसानों को अवगत कराया जाएगा। वर्तमान खरगोन जिला प्रशासन के लिए भूमि अधिग्रहण का यह पहला अनुभव है।
खुलासा फर्स्ट की पहल
इस महत्वपूर्ण गंभीर और संवेदनशील विषय को खुलासा फर्स्ट समाचार पत्र और खुलासा फर्स्ट डिजिटल न्यूज़ लगातार उठा रहा है ताकि शासन-प्रशासन भू-अधिग्रहण जैसे संवेदनशील विषय पर अपनी नीतियों और क्रियान्वयन पर स्थानीय क्षेत्रीय, प्रादेशिक, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर सोचे-विचारे ताकि सनातन संस्कृति जो वैश्विक समस्याओं का समाधान है, सुरक्षित रहे।
इंदौर में अपर कलेक्टर, नगर निगम में अपर उपायुक्त, बुरहानपुर के बाद खरगोन कलेक्टर युवा, विचारवान, अध्ययनशील टेक्नो फ्रेंडली नवाचार के लिए पहचाने जाने वाली भव्या मित्तल की दूरदर्शिता और उनकी डिप्टी कलेक्टर पूर्वा मंडलोई की जमीनी सक्रियता ने मिलकर संदेश दिया है महिला नेतृत्व में कहीं अधिक संवेदनशीलता होती है।
इंदौर-उज्जैन रोड के मुआवजा मॉडल का अध्ययन शुरू
प्रशासन ने इंदौर के वेस्टर्न रिंग रोड, ग्रीनफील्ड इंदौर-उज्जैन रोड के मुआवजा मॉडल का अध्ययन शुरू किया है, जहां किसानों को बेहतर दरें दी गई थीं। इसी फॉर्मूले को खरगोन में लागू करने पर विचार हो रहा है।
आंदोलन और समाधान
किसानों ने साफ किया है उचित मुआवजा मिलता है तो परियोजना का समर्थन अन्यथा आंदोलन और न्यायालय का रास्ता खुला है। फिलहाल प्रशासन संवाद के जरिए समाधान निकालने की दिशा में काम कर रहा है।
परियोजना, एक नई मिसाल
बड़वाह–धामनोद फोरलेन अब सिर्फ अंग्रेजों के कानून की तर्ज पर कुड़ियों के दम पर भूमि अधिग्रहण भर नहीं बल्कि कृषि की बहुमूल्य आर्थिक, सामाजिक, पास्थितिक, सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड क्लाइमेट चेंज जैसी दूर दृष्टि की कहानी बन गई है। यह उस प्रशासनिक सोच की कहानी भी है, जो मानता है विकास तभी टिकाऊ होता है जब उसमें आम आदमी और खासकर यहाँ किसान की भागीदारी और सहमति हो।
भाकिसं की टीम लगी है किसानों के लिए
भारतीय किसान संघ धामनोद बड़वाह स्टेट हाई-वे के लिए किया जा रहे भूमि अधिग्रहण की एक गुणांक की नीति के खिलाफ आंदोलन कर रहा है। आंदोलन की बागडोर प्रांत स्तर पर संगठन मंत्री अतुल महेश्वरी सह संगठन मंत्री दिनेश शर्मा (आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक) और कुशल नेतृत्वकर्ता महेश चौधरी के साथ किसानों के अधिकारों के लिए ताकत से लड़ाई लड़ने वाले कुशल रणनीतिकार के रूप में पहचाने जाने वाले कमलसिंह अंजना संभाले हुए हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर संघ के पूर्णकालिक प्रचारक संघ के राष्ट्रीय महामंत्री दिनेश कुलकर्णी नजर रखे हुए हैं। किसान संघ के राष्ट्रीय एग्रो इकोनॉमिस्ट विंग के प्रमुख हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रमोद चौधरी प्रोजेक्ट के कानूनी पहलुओं पर मार्गदर्शन दे रहे हैं।
संभागायुक्त आशीष सिंह कर चुके हैं प्रयोग
भूमि अधिकरण में किसानों के साथ न्याय के लिए भारतीय किसान संघ ने सबसे पहले पश्चिमी रिंग रोड के खिलाफ दो गुना मुआवजा की अन्याय पूर्ण नीति का विरोध किया था तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने किसान संघ के सुझाए गए फार्मूले पर काम कर लगभग 200 से 300% तक गाइड लाइन बढ़ाकर मुआवजा निर्धारण किया था। प्रदेश में यह फार्मूला पहली बार अपनाया गया नतीजे में आंदोलन खत्म हुआ और सड़क निर्माण शुरू हो सका।
कलेक्टर शिवम वर्मा भी निकाल चुके हैं समाधान
कलेक्टर शिवम वर्मा इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड हाईवे के लिए भी दो गुना मुआवजा की नीति एमपी आरडीसी में अंग्रेजों की तर्ज पर प्रभावित किसानों पर थोप दी थी। दो वर्ष आंदोलन चला और प्रोजेक्ट का काम ठप हो गया।
कलेक्टर ने इसे गंभीरता से लेते हुए एमपीआरडीसी को कहा मुआवजा कम है इसके बाद एसडीएम घनश्याम धनगर को जिम्मेदारी दी गई और उन्होंने भूमि के क्रय विक्रय की बिक्री छांट पद्धति से किसानों को बाजार मूल्य के बराबर मुआवजा दिलाने का फार्मूला निकाला।
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