ऐसे बनेंगे हम इजराइल-जापान: पेट्रोल पंप पर ऐसे टूट पड़े; जैसे अब जिंदगीभर नहीं मिलेगा तेल
KHULASA FIRST
संवाददाता

बातें करवा लो बड़ी-बड़ी, मुसीबत के पहले ही हड़बड़ी
अफवाह मात्र से दिमाग ताक में रख खड़े हो गए पेट्रोल पंप पर, ये पढ़े-लिखों का शहर है!
अगर असल में जंग हो जाए तो क्या होगी स्थिति? संकट की आशंका मात्र पर खो दिया आपा, शर्मनाक
पर्याप्त स्टॉक के बावजूद ‘ज्यादा समझदारों’ ने सरकार से जिला प्रशासन तक के हाथ-पांव फुला दिए
आधी रात के बाद तक लगी रही कतारें, कलेक्टर सख्त- अफवाह फैलाने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
प्रशासन अलर्ट, देर तक खुले रहे पेट्रोल पंप, आज सुबह से फिर शुरू हुई आपूर्ति, नागरिकों से धैर्य की अपील
ऐसे संकट में भी जनप्रतिनिधियों की ‘मूक-बधिरता' रही बरकरार, सिर्फ भाजपा नगर अध्यक्ष ने की शहरवासियों से अपील
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
चार दिन भी नहीं हुए, जब आपके इस पक्के इंदौरी अखबार खुलासा फर्स्ट ने आगाह किया था कि क्या युद्धग्रस्त दुनिया में हम रत्तीभर भी परेशानी लेने को तैयार नहीं? तब मसला गैस सिलेंडर के कृत्रिम संकट से जुड़ा था। अब पेट्रोल-डीजल के कृत्रिम संकट से जुड़ गया। तब गैस एजेंसी के दफ्तरों पर कतारें लग गईं।
अब पेट्रोल पंप पर। जबकि स्टॉक व आपूर्ति में कोई बाधा नहीं। फिर भी लोग महज अफवाह मात्र पर स्टॉक करने दौड़ पड़े? एकाएक सड़कों पर संकट पसर गया। सरकार को दिल्ली-भोपाल से सक्रिय होना पड़ा। जिला प्रशासन भी सड़क पर उतरा। हालात सामान्य बनाने के लिए समझाइश के साथ चेतावनियों ने भी रफ्तार पकड़ी।
लेकिन ऐसे संकट के समय भी शहर के जनप्रतिनिधियों की ‘मूक-बधिरता’ बरकरार रही। एक भी सड़क पर उतरकर इस अफवाह से जूझता नजर नहीं आया, जबकि केंद्र व राज्य में एक ही दल की सरकार है और जनप्रतिनिधि भी उसी दल के। फिर भी संकट के समय अपनी सरकार के बचाव में कोई सामने नहीं आया।
न सड़क पर, न किसी संदेश के जरिये। सिवाय भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के। वीडियो संदेश के जरिये उन्होंने जनता से धैर्य रखने की अपील की। क्या ऐसी अपील शहर के अन्य विधायकों, मंत्रियों, सांसदों व पार्षदों को नहीं करना थी?
बा तें हमसे बड़ी-बड़ी करवा लो- मोदीजी, पाकिस्तान को धूल चटा दो। पाक अधिकृत कश्मीर वापस ले लो। पाकिस्तान में घुसकर दुश्मनों को मार गिराओ। इतनी जल्दी सीज फायर नहीं करना था। इस बार तो काम तमाम ही करना था। हिंदुस्तान का बच्चा-बच्चा सरकार के साथ है...!
ऐसे साथ था? जैसे मंगलवार रात बच्चा-बच्चा सड़क पर आ गया और पेट्रोल-डीजल के लिए पंप पर कतार में जाकर खड़ा हो गया? बातें हम जापान जैसा देशभक्त देश बनने की करते हैं। बात-बात में जांबाज देश इजराइल का उदाहरण देते हैं और संकट आने पर क्या करते हैं?
महज अफवाह मात्र पर ऐसा माहौल बना देते हैं, जैसे बस इसके बाद पलभर में सब कुछ खत्म हो जाएगा। जिस देश के लिए जीने-मरने की कसम खाते हैं, उस पर इतना भरोसा भी नहीं करते कि धैर्य से परिस्थितियों को पहले समझें?
अभी तो संकट है भी नहीं। सिर्फ संकट की आशंका मात्र है। महज आशंका के चलते ही ऐसी हड़बड़ी? तो फिर बातें क्यों करते हो बड़ी-बड़ी? ऐसा कितना पेट्रोल भरवा लोगे? महीनेभर चल जाएगा कि 10-15 दिन? उसके बाद क्या? फिर पेट्रोल नहीं लगेगा? फुल टंकी कितने दिन दम भरेगी?
अमेरिका-ईरान के विराम तक आपकी लबरेज टंकी साथ दे देगी? कुछ तो अक्ल का इस्तेमाल करें? चंद दिन पहले ऐसे ही गैस सिलेंडर लेकर सड़कों पर आ गए थे। जबरन ही सिलेंडर भरवाकर रखने के लिए कतार में लग गए। स्टॉक करना शुरू कर दिया। महज इस आशंका में कि न जाने आगे क्या हो? फिर क्या हुआ? सब सामान्य निकला। अब वही हरकत पेट्रोल पंप पर उमड़कर कर दी। बिना जाने-समझे टूट पड़े, ऐसे कि अभी नहीं तो कभी नहीं?
क्या ऐसे नागरिकों के साथ कोई देश बड़ा होता है? दुनिया के दीगर मुल्कों के समक्ष डटकर खड़ा होता है? दुश्मन मुल्क के सामने ऐसे नागरिकों को साथ लेकर सीना ताने खड़ा हुआ जाता है, जो बिना किसी युद्ध के, अपने-अपने शहर-अंचल-प्रदेश में युद्ध जैसे हालात जबरिया ही पैदा कर दें।
इंदौर जैसे पढ़े-लिखों के शहर में मंगलवार शाम से आधी रात के बाद तक जो हुआ, वह शर्मनाक ही नहीं, धिक्कारने योग्य कृत्य है। महानगर होता शहर क्या इतना बेसब्रा होता है कि सरकार से लेकर जिला प्रशासन के हाथ-पांव फुला दे? ट्रैफिक पुलिस को अनाउंस करना पड़े कि सब ठीक है।
कलेक्टर को वीडियो संदेश जारी कर कहना पड़े कि अफवाह से सावधान रहें, सब सामान्य है। पेट्रोलियम कंपनी व मंत्रालय तक को विज्ञप्ति जारी करना पड़े कि पर्याप्त भंडार है। आखिर हम संकट के समय ऐसे कैसे इतने अशिक्षित हो जाते हैं कि तमाम डिग्रियों को घर में रख सड़क पर कतार लगा देते हैं?
अफवाह मात्र से दिमाग ताक में रख खड़े हो गए पेट्रोल पंप पर जाकर। अगर असल जंग हो जाए तो क्या करेंगे आप? संकट मात्र की आशंका पर आपा खो दिया। शर्मनाक है। प्रधानमंत्री ने देश पर भरोसा कर दो-टूक असल स्थिति से रूबरू करवाया और देशवासियों ने क्या किया?
चंद घंटों में ही देश के मुखिया का भरोसा तोड़ दिया! ये लक्षण हैं ‘नए दौर के नए भारत’ के? क्या हमारा भारत ऐसे बेसब्रों के दम पर ‘विश्वगुरु’ बनेगा, जिन्हें अपने मुल्क के रहनुमाओं पर ही भरोसा नहीं?
हजारों किलोमीटर दूर चल रही जंग के कारण ये हाल हैं मुल्क के बाशिंदों के, तो तब क्या करेंगे यहां के लोग, जब हमें असल जंग में पाकिस्तान, चीन, अमेरिका से एक साथ भिड़ना पड़े?
चार-आठ दिन या महीने-पंद्रह दिन पेट्रोल-डीजल-गैस संकट झेल लेने से कोई भी मुल्क मरता नहीं। फिर क्यों हम दो-पांच-दस लीटर पेट्रोल-डीजल व 14 किलो की गैस के सिलेंडर के लिए मरे जा रहे हैं?
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