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कुर्सी न मिलने पर नाराज होकर लौट गए थे ये वरिष्ठ नेता: भाजपा अध्यक्ष मिलने पहुंचे तो लिया आड़े हाथ; बोले- अब मेरी प्रासंगिकता नहीं, कुछ लोग पार्टी में माई-बाप बन गए

KHULASA FIRST

संवाददाता

30 मार्च 2026, 3:12 pm
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कुर्सी न मिलने पर नाराज होकर लौट गए थे ये वरिष्ठ नेता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश के इंदौर में दशहरा मैदान में रविवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंच पर बैठने को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन और आयोजकों के बीच विवाद खड़ा हो गया था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद थे। सत्तन के नाराज होने की खबरों के बाद आज भाजपा के नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा उनके घर पहुंचे तो सत्तन ने उन्हें आड़े हाथों लिया।

बातचीत के दौरान सत्तन की नाराजगी आई सामने
सोमवार को नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा सत्तन से मिलने पहुंचे। मिश्रा ने कहा कि सत्तन संगठन के वरिष्ठ नेता हैं और उनसे मार्गदर्शन लेते हैं। उनका मकसद सत्तन को मनाना और हुई गलतफहमी के लिए माफी मांगना था, लेकिन बातचीत के दौरान सत्तन ने अपनी नाराजगी पूरी तरह जाहिर कर दी।

पार्टी में कुछ लोग माई-बाप बन बैठे
इस दौरान सत्तन ने सीधे शब्दों में कहा कि पार्टी में कुछ लोग माई-बाप बन बैठे हैं और उनके इशारों पर ही नियुक्तियां होती हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग उन्हें अपना बाप मानते हैं, वही लोग पार्टी को अपना मानते हैं।

किससे मदद की उम्मीद करें
उन्होंने सवाल उठाया कि संगठन में अपनी समस्याओं के साथ वे किससे मदद की उम्मीद करें। साथ ही उन्होंने खेमेबाजी या "पट्ठावाद" पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि कोई किसी का पट्ठा है और कोई किसी और का, लेकिन वे स्वयं बीजेपी का सच्चे कार्यकर्ता हैं और इस पट्ठावाद में विश्वास नहीं रखते।

मैं पहले चरण का आदमी हूं
मीडिया से बात करते हुए सत्तन ने कहा कि कार्यक्रम नर्मदा के चौथे चरण का था, जबकि वे पहले चरण के आदमी हैं। उनका यह बयान इस बात का प्रतीक था कि पार्टी में उनकी प्रासंगिकता कम होती जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी अब नई पार्टी है, नए लोग और नए रीति-रिवाज हैं, और पार्टी अब उनकी भूमिका को उतना महत्व नहीं देती। उन्होंने साफ कहा, "मैं आज प्रासंगिक नहीं रहा।"

गलतफहमी में हुई घटना
नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा ने सत्तन से माफी मांगी, उन्हें "राष्ट्रकवि" और पार्टी का वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा कि यह घटना केवल एक गलतफहमी की वजह से हुई। उन्होंने कहा कि मिलकर इस मुद्दे को सुलझा लिया गया है और अगर कहीं गलती हुई हो, तो वे 25 बार भी माफी मांगने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सत्तनजी के आदेश पार्टी के सभी सदस्यों के लिए शिरोधार्य हैं। राजनीतिक घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के नेता भी सत्तन के पास पहुंचे। देवेंद्र यादव, विवेक खंडेलवाल और गिरीश जोशी ने इस मुद्दे पर उनसे चर्चा की।

महापौर की प्रतिक्रिया भी आई
इस पूरे मामले पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता और राष्ट्रीय कवि सत्तन जी को आदरपूर्वक आमंत्रित किया गया था। मंच पर कुर्सी रखी गई थी, लेकिन गलती से उनके नाम की पर्ची उस पर नहीं लग पाई, जिससे असुविधा हुई। महापौर ने इसके लिए खेद व्यक्त करते हुए हृदय से क्षमाप्रार्थी होने की बात कही।

कोई नाराजगी नहीं
नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के अनुसार इस दौरान सत्तन के साथ पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि इस दौरान किसी तरह की व्यक्तिगत नाराजगी नहीं होने की बात सामने आई। दूसरी ओर भाजपा के नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के साथ बातचीत के बाद सत्यनारायण सत्तन ने भी कहा कि पार्टी और संगठन के हित में संवाद होना जरूरी है और यह मामला अब हल हो चुका है।

नाराज होकर कार्यक्रम छोड़ दिया
सत्तन के अनुसार उन्हें मंच पर कुर्सी नहीं दी गई, जिससे नाराज होकर उन्होंने कार्यक्रम छोड़ दिया। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी नाराजगी इसी तरह व्यक्त की, अनुपस्थित रहकर।”

मंच पर कुर्सी विवाद
उल्लेखनीय है कि रविवार को जब सत्यनारायण सत्तन कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो उन्हें मंच पर बैठने के लिए कुर्सी नहीं मिली। इस पर उन्होंने महापौर परिषद सदस्य अभिषेक शर्मा बबलू से बातचीत की। इस दौरान कहासुनी के बाद सत्तन नाराज होकर कार्यक्रम छोड़ गए। वहीं, बबलू शर्मा ने स्पष्ट किया था कि सत्यनारायण सत्तन के लिए कुर्सी आरक्षित थी, लेकिन नाम की पर्ची न लगने के कारण भ्रम की स्थिति बन गई थी।

संवाद और समन्वय की मजबूती जरूरी
रविवार की घटना और आज की बैठक से यह स्पष्ट हुआ कि पार्टी के भीतर संवाद और समन्वय को मजबूत करने की जरूरत है। मंच पर कुर्सी को लेकर हुई असहमति को बैठक के जरिए सुलझा लिया गया, जिससे संगठन में समग्र रूप से शांति और समझौते का संदेश गया।

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