इसमें अखरने वाली दीगर बातें हैं: बात फिल्म ‘धुरंधर 2 की
KHULASA FIRST
संवाददाता

चंद्रशेखर शर्मा 94250-62800 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कुछ समय पहले आई फिल्म ‘धुरंधर’ की तरह आदित्य धर की ताजा फिल्म ‘धुरंधर 2’ ने भी देश में खूब धमाल मचा रखा है। आइए, आज इसी पर बात करते हैं।
जी हां, सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि ये फिल्म ‘धुरंधर 2’ साफ-साफ इसके प्रोपेगंडा फिल्म होने की चुगली करती है। कोई इस बात को न माने तो ये उसकी प्रॉब्लम। यद्यपि तथ्य यही है कि हमारे देश में ऐसी यानी प्रोपेगंडा फिल्में कोई 2014 के बाद ही बनना शुरू नहीं हुई हैं। हकीकतन यह बहुत पहले से चला आ रहा सिलसिला है। ज्यादा पीछे न भी जाएं तो फिल्म ‘पीके’ और ‘मैं हूं ना’ को तो आप खातिर में ला ही सकते हैं! जो हो।
अपन बात करते हैं ‘धुरंधर 2’ की और उस प्रोपेगंडा वाली चुगली की तो इस फिल्म में प्रधानमंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह का दृश्य और उनके दूसरे दृश्यों के अलावा उत्तरप्रदेश का जिक्र व अतीक अहमद का किरदार आदि ऐसी बातें हैं जो इसको प्रोपेगंडा के ठप्पे से नवाजती हैं या नवाज सकती हैं।
खैर। पिछली दफा जब अपन ने इस फिल्म के पहले पार्ट ‘धुरंधर’ की बात की थी तो उसमें एक अखरने वाली बात का जिक्र भी था। जी हां, सो यह कि उसमें आदित्य धर की खूबसूरत अभिनेत्री पत्नी यामी गौतम कहीं दिखाई न दी थी। ‘धुरंधर 2’ में उसकी भरपाई दिखती है और चंद सेकंड्स के लिए ही सही मगर यामी बिजलियां गिराती नजर आती हैं। अलबत्ता इस फिल्म में दीगर अखरने वाली बातें हैं।
उदाहरण के लिए पहले वाली ‘धुरंधर’ में रहमान डकैत बने अक्षय खन्ना ने जो हाहाकार तामीर किया था उससे यह ‘धुरंधर 2’ सिरे से खाली है और यह बात अखरने वाली होने के साथ हैरान करने वाली भी है। सो इसलिए कि जिस किरदार ने उस पूरी फिल्म को अकल्पनीय बुलंदी दी थी, वो या वैसा इस फिल्म में कहीं नहीं। हैरानी इस बात की है कि आदित्य और उनकी टीम इससे कैसे चूक गई? ठीक है कि रहमान डकैत तो उसी फिल्म में टपका दिया गया था तो इस फिल्म में उसका नमूदार होना मुमकिन ही न था, लेकिन उसके बदले किसी और किरदार में वो लपक डालना या किसी दूसरे वैसे किरदार को इस फ़िल्म में खड़ा करने का विचार और जरूरत बिलकुल बनती थी, पर वो सिरे से गायब!
गोया पहली फिल्म में आपने थ्रिल और खौफ का सनसनीखेज झूला दर्शकों को झुलाया था और उनको मेस्मेराइज किया था, वो सम्मोहन इस बार किसी में भी और कहीं नहीं। जाहिर सी बात है वो दर्शकों को बुरी तरह खला। ठीक है कि ‘जसकीरत सिंह रांगी’ की सूरत में वैसा करने की कुछ कोशिश की गई, लेकिन मुहावरे की भाषा में कहें तो वो सोलह सौ के हजार करने जैसा ही मामला रहा। जो हो।
फिल्म निर्माण की तमाम तकनीक, स्टोरी टेलिंग, फिल्मांकन और अन्य कसौटियों पर इस फिल्म को कसें तो जान लीजिए कि रामगोपाल वर्मा से लेकर तमाम दिग्गज फिल्म निर्माता और सुपर सितारे तक इसे ‘अभूतपूर्व’ और बेमिसाल फिल्म करार दे रहे हैं।
दूसरी बात यह देखिए कि हिंदुस्तान के फितरतन खूब बेसब्रे और महा छिद्रान्वेषी दर्शकों के समूह की जेब से करीब चार सौ रुपए निकालकर चार घंटे तक उन्हें चुपचाप सीट से चिपकाए रखना भी किसी हिमालयीन टास्क से कम बात नहीं है।
अलबत्ता इस फिल्म में जो दूसरी बात निजी रूप से खटकी वो यह है कि जसकीरत सिंह रांगी की जो फौजी या आर्मी ट्रेनिंग फिल्म के आखिरी में फिलर की तरह घुसेड़ी गई है उस प्लॉट का बेहतर इस्तेमाल बिल्कुल हो सकता था। इस सिलसिले में अपन को याद आई नाना पाटेकर की फिल्म ‘प्रहार!’ जी हां, आप उस फिल्म में नाना पाटेकर द्वारा दी गई फौजी ट्रेनिंग के सीन्स को एक बार फिर निगाह में लाइए।
गोया उन दृश्यों और उनके प्रभाव को आप चाहकर भी नहीं भूल सकते। सो यस, आदित्य धर उस ‘आइडिये’ का लाभ लेने से भी चूक गए हैं या कहें तो उस आइडिये का बुरी तरह सत्यानाश मारा है।
बहरहाल शाश्वत सचदेव का संगीत पहली धुरंधर की तरह इस धुरंधर में भी हर सूरत धुरंधर ही है। उधर, सान्याल या अजित डोभाल बने आर माधवन इस फिल्म में जब भी परदे पर आए हैं तो पूरी तरह छाए हुए मिले हैं। पुरानी धुरंधर फिल्म की तो शुरुआत ही लाजवाब थी और उसमें कंधार विमान अपहरण कांड के अपहर्ताओं से बात करने सान्याल जाते हैं तथा खास यह कि वो शुरुआत वाकई उम्दा व जबरदस्त थी।
खास यह कि उसमें एक अपहरणकर्ता जहूर इब्राहिम मिस्त्री दो संवाद बोलता है। एक यह कि ‘हिंदू बहुत डरपोक कौम है!’ दूसरा संवाद यह कि ‘हम पड़ोस में ही रहते हैं, लगा लेना गूदे भर का जोर और जो बने सो कर लेना !’ यह संवाद इस फिल्म में कई बार दोहराए गए हैं। जमा इसके ‘अननोन मैन’ वाले चेप्टर में इस मिस्री को गूदे का जोर दिखाते भी बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है।
सो संदेश यही देने की कोशिश है कि हमारे गूदे और और उसके जोर को कोई भी हलकट हलके में लेने का ख्याल तक भी न लाए। इस फिल्म से जुड़ी, लेकिन फिल्म से नदारद एक छोटी सी सच्ची कहानी पर आने से पहले अर्ज है कि यह फिल्म भी पहली ‘धुरंधर’ की तरह हर सूरत देखने लायक है और देखना बनती है।
अंत में वो छोटी और सच्ची कहानी।
सो यह कि पाकिस्तान में रह रहे मोस्ट वांटेड आतंकी और मुंबई के अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का एक भाई होता है नूरा। ये नूरा, शायद कराची में, एक बंदे की जमीन पर जबरन कब्जा कर लेता है। उस जमीन की बाजार कीमत होती है चार सौ करोड़ रुपये। अलबत्ता नूरा जमीन मालिक को धमकाता है कि 12 करोड़ रुपए ले और जमीन को भूलजा या फिर तेरे से जो बने सो कर ले! रोचक बात यह कि जमीन मालिक दोस्त था रहमान डकैत का।
वो यह मामला अपने दोस्त डकैत के हवाले करता है और मदद मांगता है। नतीजे में डकैत दाऊद से मिलने जाता है और उससे बात करता है तो दाऊद का डकैत को जवाब होता है कि ‘तू इतना बड़ा हो गया है कि सीधे मुझसे बात करने चला आया। बेहतर होगा कि तू इस फटे से अपनी टांग दूर रख!
इस पर डकैत वहां से चला तो आता है, लेकिन खुद को बुरी तरह अपमानित पाता है। सो बदले में कुछ दिनों बाद वो दाऊद के भाई नूरा को ही उठवा लेता है! दाऊद को जब इस बात की खबर लगती है तो वो उसी डकैत को फोन लगाता है और उससे अपने भाई नूरा को छोड़ने को कहता है। इस पर डकैत जवाब देता है कि ‘साहब, अब तो बहुत देर कर दी आपने और फोन काट देता है।
ये कहानी इस मोड़ पर खत्म होती है कि इस फोन कॉल के कुछ ही दिनों बाद गोलियों से बुरी तरह बिंधी नूरा की लाश पाकिस्तान में दाऊद के आलीशान ठिकाने ‘व्हाइट हाउस’ के बाहर लावारिस पड़ी मिलती है! जो हो।
इस फिल्म में रणवीर सिंह एकदम टॉप क्लास हैं। हां, ख्याल ये आया कि लंबा वक्त हुआ और एक दीगर रणवीर यानी रणवीर हुड्डा परदे पर नजर नहीं आए हैं। एक्शन फिल्मों में ये रणवीर भी दिल लूट ले जाता है।
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