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महिला की मौत तो इतने माह पहले हो गई: फिर भी भेज दिया उसके नाम से नोटिस; अब परिवार सदमे में

KHULASA FIRST

संवाददाता

31 मार्च 2026, 2:26 pm
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महिला की मौत तो इतने माह पहले हो गई

खुलासा फर्स्ट, महोबा।
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से प्रशासनिक लापरवाही का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां बाल विकास विभाग ने एक ऐसी महिला को नोटिस जारी कर दिया, जिसकी करीब 18 महीने पहले ही मौत हो चुकी है। नोटिस में महिला से अनुपस्थित रहने का कारण पूछा गया है और जवाब न देने पर सेवा समाप्त करने की चेतावनी भी दी गई है।

आंगनबाड़ी सहायिका थी मृत महिला
मामला पनवाड़ी विकासखंड के रैपुरा गांव का है। यहां रहने वाले किसान किशुनलाल की पत्नी पार्वती आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका के पद पर कार्यरत थीं। करीब डेढ़ साल पहले पेट में गांठ की बीमारी के चलते उनका निधन हो गया था। परिजनों के अनुसार, मौत के महज 8 दिन के भीतर ही विभाग को सूचना दे दी गई थी और मृत्यु प्रमाण पत्र भी जमा करा दिया गया था।

18 महीने बाद पहुंचा नोटिस
27 मार्च की शाम परिवार के पास बाल विकास विभाग की ओर से एक नोटिस पहुंचा। इसमें लिखा था कि सहायिका पार्वती पिछले 18 महीनों से बिना सूचना अनुपस्थित हैं। नोटिस में दो दिन के भीतर कार्यालय में उपस्थित होकर हॉट-कुक्ड योजना से जुड़े बिल-वाउचर और रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि जवाब न देने पर मानदेय रोकने और सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जाएगी।

बेटे का तंज: “स्वर्ग जाकर पूछूं क्या?”
इस नोटिस ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। मृतका के बेटे महेश ने सिस्टम पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अब इस नोटिस का जवाब देने का एक ही तरीका बचा है—वह खुद जान देकर अपनी मां के पास जाए और उनसे पूछे कि वे ड्यूटी पर क्यों नहीं आ रहीं। हालांकि यह बयान परिवार की पीड़ा और व्यवस्था के प्रति आक्रोश को दर्शाता है।

पति बोले-मौत का मजाक बना रहा विभाग
पति किशुनलाल का कहना है कि उन्होंने समय पर सभी दस्तावेज विभाग को सौंप दिए थे, इसके बावजूद इस तरह का नोटिस आना बेहद दुखद और शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग उनकी पत्नी की मौत का मजाक बना रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत जिला प्रशासन से करने की बात कही है।

ग्रामीणों ने उठाए सवाल
घटना सामने आने के बाद गांव में भी नाराजगी है। ग्रामीणों और परिजनों ने सवाल उठाया है कि क्या विभाग को अपनी कर्मचारी की मौत की जानकारी नहीं थी? क्या पिछले 18 महीनों से मृत महिला के नाम पर कोई मानदेय निकाल रहा था? इन सवालों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

अधिकारी का बयान
इस मामले में बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) यासमीन जहां का कहना है कि निरीक्षण के दौरान केंद्र बंद और सहायिका अनुपस्थित मिली, इसलिए नोटिस जारी किया गया। उनके अनुसार, अगर संबंधित महिला का निधन हो चुका है तो इसकी जानकारी संबंधित कार्यकर्ता द्वारा लिखित में दी जानी चाहिए।

प्रशासनिक सिस्टम पर सवाल
यह घटना सरकारी रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था की बड़ी खामी को उजागर करती है। एक मृत कर्मचारी को 18 महीने बाद नोटिस भेजा जाना न केवल लापरवाही दर्शाता है, बल्कि यह भी सवाल खड़े करता है कि विभागीय स्तर पर सूचनाओं का सत्यापन किस तरह किया जाता है। फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और जांच की मांग तेज हो गई है।

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