गहरा रहा है जल संकट: जानिये कैसे हो गए हैं हालात; इतने हिस्सों में नियमित आपूर्ति नहीं, टैंकरों पर निर्भरता बढ़ी, रोज इतनी शिकायतें
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में गर्मी बढ़ने के साथ ही जल संकट गहराता जा रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अप्रैल महीने में ही टैंकरों पर निर्भरता तेजी से बढ़ गई है। शहर के करीब 20% हिस्सों में नियमित पानी सप्लाई नहीं हो पा रही है। नगर निगम के कंट्रोल रूम और 311 ऐप पर रोजाना औसतन 250 शिकायतें दर्ज हो रही हैं, जो समस्या की गंभीरता को दर्शाती हैं।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा संकट
मायाखेड़ी, शक्करखेड़ी, कुमेड़ी और बड़ा-छोटा बांगड़दा जैसे क्षेत्रों में हर सुबह पानी के लिए जद्दोजहद शुरू हो जाती है। इन इलाकों में पहले बोरिंग ही पानी का मुख्य स्रोत था, लेकिन गिरते भूजल स्तर ने अब बोरिंग को भी लगभग बेकार कर दिया है। सामान्य दिनों में जहां करीब 200 टैंकर पानी सप्लाई करते थे, वहीं अब 80 नए टैंकर जोड़े गए हैं। इसके बावजूद मांग इतनी ज्यादा है कि जल्द ही यह संख्या 500 के पार पहुंचने की आशंका है।
शहर के अन्य हिस्से भी प्रभावित
सुदामा नगर, द्वारकापुरी, हवा बंगला, साईं बाबा कॉलोनी, आकाश नगर और प्रजापत नगर जैसे इलाकों में भी पानी की किल्लत के साथ गंदे पानी और सीवरेज की समस्या सामने आ रही है। कई जगह समय पर वॉल्व नहीं खुलने और टैंकर सप्लाई नहीं मिलने से लोग परेशान हैं।
विधायक ने ली बैठक, दिए निर्देश
शनिवार को विधायक मालिनी गौड़ ने निगम अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की। उन्होंने हर वार्ड में पर्याप्त टैंकर व्यवस्था सुनिश्चित करने, तंग गलियों में ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए पानी पहुंचाने और अधूरे काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
ड्रेनेज और पानी की लाइन जुड़ने से बढ़ी परेशानी
तुलसी नगर एवेन्यू में पिछले डेढ़ महीने से लोग गंभीर समस्या झेल रहे हैं। यहां ड्रेनेज लाइन को पेयजल लाइन से जोड़ दिए जाने के कारण एक हफ्ते से कई घरों में बदबूदार काला पानी आ रहा है। रहवासियों ने कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ।
समस्या की जड़ क्या है?
कांक्रीटीकरण का असर: शहर में बढ़ते कंक्रीट के कारण बारिश का पानी जमीन में नहीं समा रहा, जिससे भूजल रिचार्ज नहीं हो पा रहा।
पुराना ड्रेनेज सिस्टम: 30-40 साल पुरानी ड्रेनेज लाइनों के क्षतिग्रस्त होने से गंदा पानी सप्लाई में मिल रहा है।
यशवंत सागर पर दबाव: नर्मदा और यशवंत सागर से करीब 450 MLD पानी सप्लाई होता है, लेकिन लीकेज और अवैध पंपिंग के कारण अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाता।
नलों में गंदा पानी आए तो क्या करें?
तुरंत 311 ऐप पर फोटो के साथ शिकायत दर्ज करें और शिकायत नंबर सुरक्षित रखें।
यदि पानी पीला या काला दिखे, तो यह सीवरेज मिलावट का संकेत है इसे उबालकर भी इस्तेमाल न करें।
त्वचा और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों से बचने के लिए वैकल्पिक पानी का उपयोग करें।
तंग गलियों में छोटे टैंकर (ट्रैक्टर-ट्रॉली) की सुविधा के लिए अपने वार्ड पार्षद से संपर्क करें।
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