युद्ध से 'लिकर इंडस्ट्री' पर बड़ा असर: शराब-बीयर महंगी होने के संकेत; सप्लाई पर बढ़ा दबाव
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, दिल्ली।
पश्चिम एशिया में जारी ईरान से जुड़े संघर्ष का असर अब भारत के शराब बाजार पर भी दिखने लगा है। गैस की कमी और आयात में रुकावट के चलते पैकेजिंग से लेकर उत्पादन तक प्रभावित हो रहा है, जिससे आने वाले समय में शराब और बीयर के दाम बढ़ सकते हैं।
गैस की कमी का सीधा असर कांच उद्योग पर
जानकारी के मुताबिक, कतर से गैस आपूर्ति प्रभावित होने का असर भारत पर पड़ा है। भारत अपनी बड़ी गैस जरूरतों के लिए कतर पर निर्भर है। गैस की कमी का सीधा असर कांच उद्योग पर पड़ा है, क्योंकि कांच की बोतल बनाने में भारी मात्रा में गैस का उपयोग होता है। कई कंपनियों को उत्पादन कम करना पड़ा है, जिससे बोतलों की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
पैकेजिंग से जुड़े अन्य खर्च भी तेजी से बढ़े
सिर्फ बोतल ही नहीं, पैकेजिंग से जुड़े अन्य खर्च भी तेजी से बढ़े हैं। कागज के कार्टन महंगे हो गए हैं, जबकि लेबल और टेप जैसी सामग्री की लागत भी बढ़ी है। इसके साथ ही परिवहन में देरी के कारण एल्युमिनियम की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कैन बनाने वाली इकाइयों पर भी दबाव बढ़ गया है।
बीयर की मांग बढ़ जाती है
यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब देश में गर्मी का मौसम शुरू हो रहा है और आमतौर पर इस दौरान बीयर की मांग बढ़ जाती है। हालांकि इस बार कंपनियों के सामने मांग के अनुरूप सप्लाई बनाए रखना चुनौती बन सकता है।
12 से 15 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ाने की मांग
ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने बढ़ती लागत को देखते हुए 12 से 15 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ाने की मांग की है। संगठन के अनुसार कच्चे माल और संचालन लागत में लगातार वृद्धि से उत्पादन बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है।
भारत का शराब बाजार तेजी से बढ़ रहा
भारत का शराब बाजार तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में इसके और विस्तार की संभावना है, लेकिन मौजूदा हालात ने इस बढ़ते बाजार के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
राज्यों से कीमतों में संशोधन की मांग
उधर, कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज ने भी राज्यों से कीमतों में संशोधन की मांग की है। भारत में शराब की कीमतें राज्य सरकारों द्वारा नियंत्रित होती हैं, इसलिए बिना मंजूरी कंपनियां दाम नहीं बढ़ा सकतीं।
सप्लाई प्रभावित हो सकती है
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि कीमतों में बढ़ोतरी की अनुमति नहीं मिली, तो सप्लाई प्रभावित हो सकती है। कांच उद्योग पर भी इसका बड़ा असर पड़ा है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जैसे प्रमुख उत्पादन केंद्रों में गैस की कमी के चलते उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है
कुल मिलाकर, बढ़ती लागत और आपूर्ति संकट के कारण आने वाले समय में उपभोक्ताओं को शराब और बीयर के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।
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