विभीषण कौन टाइमिंग और सोर्स रहस्यमय: खबर कैसे आई; कौन है पर्दे के पीछे
KHULASA FIRST
संवाददाता

डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
रामराज्य और सांस्कृतिक पुनर्जागरण लाने में लगी भाजपा के अभियान में बार-बार बाधा खड़ी हो जाती है। अयोध्या से लेकर भोपाल तक कुछ इसी तरह के नजारे हैं। रामराज्य की राह में अपने ही भांडा फोड़ रहे हैं।
यानी घर का भेदी लंका ढाए। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ कुछ इसी तरह का मामला चर्चा में आ रहा है कि घर का भेदी कौन या विभीषण कौन है, जो सरकार को कमजोर करने के प्रयास कर रहा है?
मध्य प्रदेश भाजपा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व को लेकर एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं का दौर कुछ समय के लिए चलाया या चल पड़ा। शेर का शिकार करने के लिए क्या योजनाबद्ध तरीके से मचान बांधा गया और फिर हांका लगा या लगवाया गया?
इतना सब होने के बाद भी शेर का शिकार नहीं हो सका। उज्जैन में भूमि खरीदी को घोटाला बताते हुए जिस तरह से मीडिया में एक खबर आई, उसके बाद मुख्यमंत्री को घेरने की हरसंभव कोशिश हुई।
खबर आई, खबर चली और खूब चली। राजनीति और मीडिया को समझने वाले घोटाले जैसा कुछ खुलासा होने को महत्वपूर्ण नहीं मानते। जैसा लेखक, विचारक और राजनीति के जानकार योगेंद्र यादव कहते हैं। खबर यह है कि खबर कैसे आई? यह खोज का विषय है।
इस तरह समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी कह चुके हैं कि भारतीय जनता पार्टी की अपनी अंदरुनी लड़ाई के कारण मुख्यमंत्री से नाराज नेता इस सब के पीछे हैं। कांग्रेस भी यही कह रही है, क्योंकि भाजपा ने भी राज्यसभा की कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर इसे कांग्रेस के अंदरूनी घमासान का परिणाम बताया था।
हो सकता है इसीलिए कांग्रेस भी ऐसा कह रही है। साथ में भाजपा के अंदर भूचाल पैदा करने की कोशिश भी हो।
बीते चार दिन से राजनीतिक ठियों पर एक ही चर्चा है, मोहन यादव की उलटी गिनती शुरू हो गई। गपबाजी वालों के अपने-अपने तर्क हैं। यही कहा जाता रहा है कि खेल दिल्ली से चला है। बिना मोटा भाई के इशारे के ऐसा नहीं हो सकता, जैसा हुआ।
कुछ का यह भी कहना रहा कि संघ नाराज है। यह गॉसिप भी लगाया गया कि संघ की बात मोटा भाई गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यह भी कहा गया कि दिल्ली में बैठे मध्य प्रदेश के बड़े नेता और उनके समर्थकों ने यह लीला रची। यहां तक कयास लगाए गए कि इंदौर के नेताओं ने यह कमाल दिखाया है।
इन अटकलों का कोई आधार नहीं है, फिर भी जवाब ढूंढ़े जाएं तो स्पष्ट होता है कि हाईकमान की नाराजगी यदि हो तो उसे इतना सब कुछ करने की जरूरत नहीं। उसके लिए तो भृकुटी तनाना ही बहुत है। और क्या हाईकमान अपने मुख्यमंत्री को सार्वजनिक रूप से कमजोर करके अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारेगा?
क्या विपक्ष के सुनियोजित विरोध को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री को हटा देगा? स्पष्ट है, यह संभव नहीं। यह तो कांग्रेस को मजबूत करने वाली बात होगी यदि हाईकमान कांग्रेस के आरोप पर फैसला करने लगे।
यह भी कहा गया कि हाईकमान ने मुख्यमंत्री को मिलने का समय नहीं दिया। ऐसा इसलिए सही प्रतीत नहीं होता, क्योंकि मोहन सरकार पूरी तरह हाईकमान के नियंत्रण में रहती है।
हाईकमान के पास राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कई सारे विषयों के साथ में देशभर की सभी राज्य सरकार और राजनीतिक उठापटक के विषय लगातार बने हुए रहते हैं।
ऐसे में मध्य प्रदेश जैसे इस छोटे-से मामले को लेकर हाईकमान अपना पूरा फोकस इस विषय पर लगा दे, यह संभव नहीं है। दिल्ली में पल-पल पर राजनीतिक एजेंडा बदलते रहते हैं।
इस मामले में ज्यादा कुछ गंभीरता नहीं है, इसीलिए लगता है मुख्यमंत्री आज बैतूल जा रहे हैं और वहां रात्रि विश्राम करेंगे। हो सकता है बैतूल निवासी प्रदेश संगठन अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ इस मामले का पोस्टमॉर्टम हो और आगे की योजना पर बात हो।
जहां तक संघ की नाराजगी की बात है, तो मध्य प्रदेश में साफ-साफ दिखाई देता है कि मोहन सरकार पूरी तरह से संघ के शक्ति केंद्रों के नियंत्रण में है। शामगढ़ के अखिल भारतीय स्तर के वरिष्ठ नेता भोपाल में सरकार की चौकीदारी करते बताए जाते हैं। ऐसे में संघ जो चाहता है वह नहीं हो रहा होगा ऐसा मानना ठीक नहीं।
यह भी कहा गया कि हाल में उज्जैन की भूमि खरीद से जुड़े विवाद के बाद विपक्ष ने आरोप लगाया है कि यह मामला भाजपा के अंदरूनी घमासान का नतीजा है। हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया और मुख्यमंत्री के पक्ष में सफाई दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2023 में मुख्यमंत्री हेतू कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में थे। इनमें शिवराजसिंह चौहान, कैलाश विजयवर्गीय, नरेंद्रसिंह तोमर, प्रह्लाद पटेल और वीडी शर्मा जैसे नेताओं को संभावित दावेदार माना जा रहा था।
पार्टी नेतृत्व ने मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर सभी को ठेंगा दिखा दिया। दावेदार नेता सदमे में चले गए। मोहन यादव से वरिष्ठ दावेदार सभी नेता अभी तक सदमे में ही जी रहे हैं।
जितना उभरने की कोशिश करते हैं, उतना गहरे में चले जाते हैं। उज्जैन का भूमि घोटाला जिस तरह से उठा और शांत होता नजर आ रहा है।
इसी बीच कांग्रेस का दावा है कि भूमि विवाद से जुड़े दस्तावेज भाजपा के अंदरूनी लोगों ने ही सार्वजनिक किए हैं। हालांकि कांग्रेस ने इस दावे के समर्थन में किसी नाम का खुलासा नहीं किया है, जबकि भाजपा ने इसे विपक्ष की राजनीतिक बयानबाजी बताया।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि भाजपा के भीतर विभिन्न नेताओं के अपने-अपने समर्थक समूह हैं और इनमें भविष्य के नेतृत्व को लेकर स्वाभाविक प्रतिस्पर्धा का खेल खेला जाता है, जो मुख्यमंत्री को अस्थिर और विचलित करने के लिए होता है। इसमें कितनी सच्चाई है, यह नहीं कहा जा सकता, लेकिन जब-जब मुख्यमंत्री को घेरा गया, तब-तब वह उतनी ही ताकत से मजबूत होते चले गए।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि किसी भी बड़े दल में गुटीय राजनीति और नेतृत्व की प्रतिस्पर्धा सामान्य है, लेकिन वर्तमान विवाद को किसी विशेष नेता, भाजपा हाईकमान या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़ना सिर्फ अटकल है, क्योंकि इस बारे मंर कोई भी सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। न ही अंदरूनी सूत्रों से इस तरह की कोई बात बाहर आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों ने माना कि कई वरिष्ठ नेता भी इस पद के दावेदार माने जा रहे थे। इनमें प्रमुख रूप से कैलाश विजयवर्गीय, नरेंद्रसिंह तोमर, शिवराजसिंह चौहान, प्रह्लाद पटेल, वीडी शर्मा जैसे मोहन यादव से वरिष्ठ और ज्यादा अनुभवी नेताओं के नाम सामने आते हैं।
इन नेताओं के बारे में समय-समय पर यह राजनीतिक चर्चा होती रही कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभाव रखते हैं। हालांकि ऐसा खुलकर प्रतिरोध सामने नहीं आया। न ही इन नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को कमजोर करने के लिए संगठित अभियान चला।
जहां तक अखबार की खबर का सवाल है, इस मामले में यह अखबार और उसके पत्रकार निष्पक्ष व खोजी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं, इसलिए खबर पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। ऐसी खबरों को सरकार के खिलाफ विरोधी दल हमेशा इस्तेमाल करते हैं।
इस बार यह सब कुछ सुनियोजित प्रतीत हो रहा है, इसलिए कहा जा रहा है कि सोर्स और टाइमिंग का रहस्य पता करना खबर है। यानी निशाने पर भाजपा के असंतुष्ट नेताओं को लिया जा रहा है, जो हो सकता है इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
कांग्रेस ने खबर को आधार बनाकर हल्ला मचाया, यानी शिकार कांग्रेस ने नहीं किया, किए हुए शिकार को हथियाने की कोशिश की। कांग्रेस के लिए इस तरह के विषय सार्वजनिक करने के लिए बहुत सारे अवसर हैं और हैं भी, लेकिन वह ऐसा कुछ भी नहीं कर पाई।
पत्रकारिता में कोई ना कोई सोर्स होता है, वह कौन है, इसी को लेकर रहस्य बना हुआ है, लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री के संज्ञान में काफी कुछ है और समय आने पर हिसाब चुकता कर सकते हैं।
संबंधित समाचार

भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा की नई टीम घोषित:शहर में 50 पदाधिकारियों को मिली जिम्मेदारी; संगठन ने जारी की सूची

तलाक की सुनवाई के अगले दिन खूनी खेल:दो दिन रैकी; खरीदीं तीन पिस्तौल और फिर तीन मौतें

स्कूल निरीक्षण पर बवाल:सीजेपी प्रवक्ता से मारपीट; अभिजीत दीपके का 48 घंटे का अल्टीमेटम

पिस्टल लेकर स्कूल पहुंचा छात्र:चेकिंग में हथियार मिला; युवक गिरफ्तार, पुलिस जांच में जुटी

पीएम के फ्लैट बने दुकान और तबेला:15 आवास सीलकर नगर निगम ने जब्त किया सामान

साधना का सफर थमा, स्मृतियां रह गईं:साध्वी निर्मलाजी को नम आंखों से दी अंतिम विदाई, 1994 में ली थी जैन भगवती दीक्षा

फैक्ट्री के लिए आर-पार की लड़ाई:पटवारी बोले- एक लाख किसान करेंगे आंदोलन; राहुल गांधी ने कहा- मैं भी आऊंगा

रील के चक्कर में ट्रैफिक से खिलवाड़:वाहनों के आगे जेब्रा क्रॉसिंग पर लेटी इंफ्लुएंसर; पुलिस करेगी कार्रवाई

मोड़ पर अनियंत्रित होकर खाई में लटकी बस:बड़ा हादसा टला; सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाला

पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल:82 निरीक्षकों के तबादले, तीन की नई पदस्थापना शहर में

छात्र संघ चुनाव को लेकर कांग्रेस की तैयारी तेज:भोपाल और इंदौर समेत अलग-अलग जिलों के लिए जिम्मेदारियां तय; प्रदेश कांग्रेस ने जारी किया आदेश

वीडियो देखिये, फर्श पर सिसक रही थीं दृष्टिहीन वृद्धा:जीआरपी ने थामा हाथ; आश्रम में मिला नया घर

जमीन दिखाई कुछ, निकली कुछ और:कोर्ट ने 31 लाख लौटाने का दिया आदेश; ब्याज भी लगेगा

फर्जी ट्रांजिट पास से लकड़ी का खेल:टिम्बर मार्केट में राज्य स्तरीय उड़न दस्ते की दबिश; दो वाहन जब्त

‘मुख्यमंत्री से ले लेना…’:ऑडियो वायरल; छात्र से विवाद के बाद प्राचार्य का तबादला

साफ पानी की शिकायत दबाना पड़ा भारी:सब इंजीनियर सस्पेंड, इंजीनियर बर्खास्त, विभागीय जांच शुरू

नाना पटवारी के मोबाइल से मिली सट्टेबाजों की आईडी:ऑनलाइन सट्टा केस में तीन गिरफ्तार; आरोपी दो दिन की पुलिस रिमांड पर

पटवारी के बयान से गरमाई सियासत:सिंधिया पर इशारों में निशाना; सरकार को भी घेरा

स्कूलों में बिजली-पानी तक नहीं:हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब; चार सप्ताह की दी मोहलत

आयशर ने बाइक सवार को रौंदा:पीछे से मारी टक्कर; पहिया ऊपर से गुजरने से मौत
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!