कटघरे में सिस्टम परिजनों के बयान के बाद होगा सच का खुलासा: ब्रजेश्वरी एनेक्स अग्निकांड; 8 जिंदगियां खत्म, 7 दिन बाद मिला मासूम का धड़…
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
ब्रजेश्वरी एनेक्स की अर्हम विला में भीषण अग्निकांड ने सिस्टम की कई परतों को बेनकाब कर दिया है। 7 दिन बाद मलबे से 8 वर्षीय तनय के धड़ का हिस्सा मिलना इस पूरे हादसे को और भयावह बना देता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बिजली विभाग के तकनीकी खुलासों के बाद अब यह मामला एक साधारण दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाहियों की शृंखला बनकर सामने आ रहा है।
हादसे के तुरंत बाद फायर ब्रिगेड, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने सर्च ऑपरेशन चलाया था। इसके बावजूद एक मासूम के शरीर का हिस्सा 7 दिन तक मलबे में दबा रहना रेस्क्यू सिस्टम की विफलता पर इशारा करता है। फोम को शव समझकर ले जाना व असली अवशेष छूट जाना, यह सिर्फ चूक नहीं, बल्कि प्रोटोकॉल और ट्रेनिंग पर बड़ा सवाल है।
तकनीकी जांच में सामने आया कि घर में खड़ी इलेक्ट्रिक कार देर रात तक चार्जिंग पर थी। ऑटो कट-ऑफ सिस्टम के बाद दोबारा बिजली सप्लाई चालू होने से बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ा और आग भड़क गई। यह खुलासा सीधे-सीधे शहरी घरों में बढ़ती ईवी चार्जिंग की अनियंत्रित स्थिति का खुलासा करता है। वहीं सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिना मानकों के घरों में ईवी चार्जिंग की अनुमति देना खतरनाक नहीं? क्या बिजली विभाग और नियामक एजेंसियां सिर्फ हादसे के बाद जागेंगी?
फायर सेफ्टी: कागजों में या जमीन पर?... 8 लोगों की मौत के बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि घर में फायर सेफ्टी सिस्टम कितना प्रभावी था। क्या फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर या एक्सटिंग्विशर मौजूद थे? अगर थे, तो आग को शुरुआती स्तर पर क्यों नहीं रोका जा सका?
यह सवाल सिर्फ एक घर का नहीं, बल्कि पूरे शहर के हजारों मकानों का है। इधर, स्मार्ट मीटर और ट्रांसफार्मर डेटा से यह जरूर साफ हुआ कि घटना के समय लोड ज्यादा था, लेकिन इससे नए सवाल भी खड़े होते हैं कि क्या ओवरलोडिंग की कोई चेतावनी दी गई थी? क्या सप्लाई में तकनीकी गड़बड़ी या फ्लक्चुएशन था?अगर हां, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
परिजनों के बयान अहम
पुलिस ने पड़ोसियों और अन्य लोगों के बयान तो दर्ज कर लिए हैं, लेकिन परिवार के प्रमुख सदस्यों के बयान अभी बाकी हैं। सूत्रों के अनुसार, परिजनों के बयान इस केस का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकते हैं, क्योंकि उसी से यह स्पष्ट होगा कि हादसे से पहले घर के अंदर क्या स्थिति थी, क्या चार्जिंग लगातार जारी थी?क्या किसी तरह की तकनीकी गड़बड़ी महसूस हुई थी?क्या कोई सुरक्षा उपाय अपनाए गए थे? साफ है, परिजनों के बयान के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी।
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