प्रदेश को मिलेगी पहली महिला डीजीपी: प्रज्ञाऋचा श्रीवास्तव प्रबल दावेदार
KHULASA FIRST
संवाददाता

आदेश प्रतापसिंह भदौरिया खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मप्र पुलिस के मुखिया कैलाश मकवाना नवंबर अंत में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं इसलिए नए डीजीपी की तलाश तेज हो गई है। इस बार चयन केवल सीनियरिटी तक सीमित नहीं है, बल्कि संतुलन, प्रशासनिक प्राथमिकता और दिल्ली–भोपाल के बीच समन्वय अहम भूमिका निभाएंगे।
दावेदारी से बाहर हुए ये प्रमुख नाम
शुरुआत में 1989 बैच के अजयकुमार शर्मा का नाम था, लेकिन दिसंबर 2026 में रिटायरमेंट के कारण उनकी दावेदारी लगभग खत्म हो गई है। इसी तरह 1991 बैच के वरुण कपूर (अप्रैल 2027 रिटायर) और आलोक रंजन (जुलाई 2026 रिटायर) भी न्यूनतम आवश्यक कार्यकाल की शर्त पूरी नहीं कर पा रहे, इससे रेस से बाहर हो चुके हैं।
2026 में रिटायर होने वाले प्रमुख अधिकारी... संजीव शमी– 24 जून 2026, आलोक रंजन – 1 जुलाई 2026, ए. साई मनोहर– 15 अगस्त 2026, आशुतोष राय– 30 अगस्त 2026, कैलाश मकवाना – 1 दिसंबर 2026, अजयकुमार शर्मा–15 दिसंबर 2026।
तीन मजबूत दावेदार... डीजपी पद की दौड़ अब तीन वरिष्ठ अधिकारियों के बीच सिमट गई है। उपेंद्र जैन: प्रशासनिक व फील्ड अनुभव, लेकिन सीमित कार्यकाल (करीब 10 माह), प्रज्ञाऋचा श्रीवास्तव: सबसे लंबा संभावित कार्यकाल (करीब 16 माह), साफ छवि, पंकज श्रीवास्तव: लगभग 1 वर्ष का कार्यकाल, संतुलित विकल्प।
2030 तक का नेतृत्व समीकरण
नए डीजीपी का कार्यकाल संभावित रूप से दिसंबर 2028 तक रहेगा। इस आधार पर 1993 बैच के अनिल कुमार का नाम वरीयता में सबसे आगे है, जिनका कार्यकाल दिसंबर 2030 तक हो सकता है। अनिल कुमार डीजपी बनते हैं, तो उनके कार्यकाल के दौरान 1993 बैच के तीन, 1994 बैच के पांच और 1995 बैच के सात अधिकारी सेवानिवृत्त हो जाएंगे। यानी आने वाले वर्षों में पुलिस नेतृत्व में व्यापक संरचनात्मक बदलाव तय है। अंतिम मुहर उसी नाम पर लगेगी जो सिस्टम को स्थिर रख सरकार की प्राथमिकताओं पर खरा उतर सके।
चयन का नया फॉर्मूला... सूत्रों के मुताबिक इस बार दो स्तर पर विचार हो रहा है।
भोपाल का फोकस: स्थिर कार्यकाल और प्रशासनिक तालमेल।
दिल्ली की प्राथमिकता: प्रोफेशनल ट्रैक रिकॉर्ड, साफ छवि और पॉलिसी अलाइनमेंट यही वजह है चयन में देखा जा रहा है कौन अधिकारी सिस्टम को अधिक समय तक स्थिर और प्रभावी ढंग से चला सकता है।
यूपीएससी पैनल का रहेगा अहम रोल... चयन प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार तीन वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल संघ लोकसेवा आयोग को भेजती है। आयोग द्वारा अनुमोदित पैनल में से ही राज्य सरकार अंतिम नाम तय करती है। इस बार संकेत है। बहुत कम कार्यकाल वाले नामों पर विचार नहीं होगा। कम से कम 1–1.5 वर्ष का प्रभावी कार्यकाल रखने वाले अधिकारी को प्राथमिकता मिलेगी।
पहली महिला डीजीपी की संभावना... महिला नेतृत्व को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चर्चा के बीच कयास हैं सरकार एक सशक्त संदेश देने के लिए महिला अधिकारी को मौका दे सकती है। इस स्थिति में प्रज्ञाऋचा श्रीवास्तव सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभर रही हैं। ऐसा होता है तो मप्र को पहली महिला डीजीपी मिलने का इतिहास बन सकता है।
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