नीट गड़बड़ी के विरोध में प्रदेश का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन इस शहर में चला: प्रतिदिन इतने लोग हुए जमा; इतने छात्रों से हुई थी शुरुआत, बाद में ऐसा अभियान बन गया
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित गड़बड़ियों के विरोध में इंदौर के टंट्या भील चौराहे पर 30 जून से शुरू हुआ छात्र आंदोलन शनिवार को 26 दिनों बाद समाप्त हो गया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि यह मध्य प्रदेश का अब तक का सबसे लंबा छात्र आंदोलन रहा। आंदोलन के समापन के समय धरना स्थल पर एक हजार से अधिक छात्र मौजूद थे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद छात्रों ने जश्न मनाते हुए धरना समाप्त करने की घोषणा की।
पांच छात्रों से शुरू हुआ आंदोलन, हजारों युवाओं का बना अभियान
यह आंदोलन बिना किसी पूर्व योजना के शुरू हुआ था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे NEET विरोधी प्रदर्शन से प्रेरित होकर छात्र अरुण बड़ोले सबसे पहले टंट्या भील चौराहे पहुंचे और धरने पर बैठ गए। कुछ ही देर में चार अन्य छात्र भी उनके साथ जुड़ गए।
बारिश के बीच बिना टेंट के धरने पर बैठे इन पांच छात्रों का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इसके बाद इंदौर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से छात्र और युवा लगातार आंदोलन से जुड़ते गए। देखते ही देखते यह प्रदर्शन बड़े जनआंदोलन का रूप ले बैठा।
बारिश में शुरू हुआ संघर्ष, बाद में मिली टेंट की व्यवस्था
आंदोलन की शुरुआत मानसून के दौरान हुई। शुरुआती दिनों में छात्र खुले आसमान के नीचे बारिश में भीगते हुए धरने पर बैठे रहे। बाद में स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से टेंट और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं, जिससे प्रदर्शन लगातार जारी रह सका।
26 दिन तक कोई छात्र भूखा नहीं सोया
धरने में शामिल छात्रों ने बताया कि पूरे आंदोलन के दौरान इंदौर शहर के लोगों ने अभूतपूर्व सहयोग किया। उनका कहना है कि 26 दिनों में ऐसा एक भी दिन नहीं आया जब किसी प्रदर्शनकारी को भूखा या प्यासा रहना पड़ा।
प्रतिदिन एक हजार से अधिक लोगों के लिए भोजन और पेयजल की व्यवस्था की जाती रही। स्थानीय नागरिक, सामाजिक संगठन और कई स्वयंसेवक नियमित रूप से खाने के पैकेट, पानी की बोतलें और अन्य आवश्यक सामग्री लेकर धरना स्थल पहुंचते रहे।
डिलीवरी बॉय से लेकर आम नागरिक तक बने सहयोगी
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, कई डिलीवरी बॉय अपनी दैनिक कमाई का हिस्सा निकालकर छात्रों के लिए भोजन लेकर आते थे। वहीं अनेक लोग बिना किसी पहचान या प्रचार के भोजन, फल और अन्य जरूरी सामान देकर चुपचाप लौट जाते थे।
सफाई और आर्थिक सहयोग की भी रही व्यवस्था
धरना स्थल की साफ-सफाई की जिम्मेदारी भी स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर संभाली। प्रतिदिन सुबह आसपास के लोग अपने घरों से झाड़ू लाकर स्थल की सफाई करते थे ताकि प्रदर्शनकारियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
आर्थिक सहयोग के लिए धरना स्थल पर एक गुल्लक भी रखी गई थी, जिसमें आम नागरिकों के साथ कुछ जनप्रतिनिधियों ने भी स्वेच्छा से सहयोग राशि जमा कराई। छात्रों का कहना है कि इसी जनसहयोग के कारण आर्थिक परेशानियां आंदोलन में बाधा नहीं बन सकीं।
भावनात्मक समर्थन ने बढ़ाया हौसला
धरना स्थल पर पहुंचने वाले अनेक लोग छात्रों से मिलते, उन्हें गले लगाकर समर्थन जताते और उनके संघर्ष की सराहना करते थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लोगों का यही विश्वास और भावनात्मक सहयोग आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत रहा।
आंदोलन समाप्त होने के बाद छात्रों ने इंदौर के नागरिकों का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए थे, लेकिन शहर के लोगों ने उन्हें अपना परिवार समझकर हर संभव मदद की।
पहले भी हुए आंदोलन, लेकिन अवधि सबसे लंबी
छात्रों का दावा है कि इंदौर में इससे पहले मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) से जुड़े मुद्दों पर भी छात्र आंदोलन हुआ था, लेकिन वह केवल चार दिनों तक ही चला। इसके विपरीत NEET गड़बड़ी के विरोध में चला यह आंदोलन लगातार 26 दिनों तक जारी रहा, जिससे यह प्रदेश का सबसे लंबा छात्र आंदोलन बन गया।
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