मोबाइल से हो रहा सनपाल के सट्टा साम्राज्य का खुलासा: जांच में आईडी से सट्टा खिलाने का दावा भी सामने आया; पुराने केस में 23.02 लाख नकद मिलने के बाद डिजिटल सबूतों पर फोकस
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सट्टे के खेल में अब पुलिस की नजर सिर्फ मैदान के बाहर खड़े बुकी और हाथ में घूमती नकदी पर नहीं, मोबाइल में छिपे डिजिटल सुरागों पर भी है।
भगोड़े सतीश सनपाल से जुड़े जबलपुर के सट्टा नेटवर्क की जांच में सामने आए अलग-अलग दस्तावेज ऐसी तस्वीर जोड़ रहे हैं, जिसमें लाखों की नकदी के साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, मोबाइल आईडी, सिम, आईएमईआई और फॉरेंसिक डेटा अहम कड़ी बन गए हैं।
नए प्रकरण में पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की हैऔर सेट स्पोर्ट तथा स्काई एक्सचेंज से जुड़ी गतिविधियों को मोबाइल से निकले डिजिटल डेटा के आधार पर जांच का हिस्सा बनाया है।यही इस मामले का नया मोड़ है। सट्टे का हिसाब अब कागज की पर्चियों या नकदी तक सीमित नहीं रहा। पुलिस ने मोबाइल को ही सुराग की डायरी बना दिया।
प्रकरण क्रमांक 53/2024 की जांच में पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त किए। इनके आईएमईआई नंबर, सिम संबंधी जानकारी और मोबाइल में मौजूद डिजिटल सामग्री की पड़ताल की। डिजिटल सामग्री निकालने के लिए फॉरेंसिक प्रक्रिया अपनाई गई और रिपोर्ट को चालान का हिस्सा बनाया गया।
दस्तावेजों में SAT SPORT.COM और SKY EXCHANGE से जुड़ी गतिविधियों का उल्लेख है। यानी पुलिस की जांच में ऑनलाइन सट्टे के लिए इस्तेमाल होने वाले डिजिटल माध्यमों तक पहुंचने का प्रयास साफ दिखाई देता है। मोबाइल की जांच के लिए सेलीब्राइट यूएफईडी और फिजीकल एनलाइजर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किए जाने का भी रि उल्लेख है। इससे समझ आता है पुलिस ने सिर्फ यह नहीं देखा कि आरोपी के पास मोबाइल था, बल्कि खंगालने की कोशिश की मोबाइल में सट्टे से जुड़ा क्या-क्या डेटा मौजूद था।
सात नाम, एक डिजिटल कड़ी
इस मामले में पुलिस ने सात को आरोपित कर चालान पेश किया। एफआईआर में रोहित शिवहरे, सतीश सांपल, आजम खान और सोनू शिवहरे के नाम हैं। बाकी को भी प्रकरण में शामिल किया गया है। मामला 13 फरवरी 2024 की रात का है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक रात करीब 8.30 से 9.30 बजे के बीच की घटना के बाद रात 11.17 बजे एफआईआर दर्ज की गई। जुआ अधिनियम की धारा 4(ए) और आईपीसी की धारा 109 के तहत कार्रवाई की गई। 31 दिसंबर 2024 को चार्जशीट क्रमांक-1 के रूप में अंतिम प्रतिवेदन पेश किया गया।
नई चार्जशीट से सामने आए साक्ष्यों को उस पुराने प्रकरण से अलग करके नहीं देखा जा सकता, जिसमें 23 मई 2022 को ओमती पुलिस ने 23 लाख 2 हजार 990 रुपए बरामद किए थे। संजय खत्री की स्कूटी की डिक्की से 13 लाख 2 हजार 990 और उसके पिता मुरलीधर खत्री के थैले से 10 लाख रुपए मिले थे।
पुलिस ने रकम को आईपीएल सट्टे से जुड़ा बताया था। पूछताछ के हवाले से पुलिस के दस्तावेजों में सतीश सनपाल की आईडी से सट्टा खिलाने का उल्लेख है। इसी आधार पर दिलीप खत्री समेत तीन आरोपियों के खिलाफ सट्टा और आपराधिक साजिश की धाराओं में चालान पेश किया गया। सनपाल को आरोप-पत्र में आरोपी नहीं बनाया गया। पुलिस दस्तावेज में इसके पीछे उसके घटना के बाद से देश से बाहर होने और उसकी तलाश के प्रयासों का उल्लेख है।
23 लाख की रकम से आयकर विभाग तक पहुंचा मामला
पुराने मामले की 23 लाख की बरामदगी पर आयकर विभाग की भी नजर गई थी। 31 अगस्त 2022 को आयकर विभाग के उप निदेशक (जांच), कटनी ने ओमती थाना प्रभारी को पत्र लिखकर रकम का हवाला दिया था। विभाग ने जांच और स्थिति रिपोर्ट मांगी तथा आगे के निर्देश तक रकम रिलीज नहीं करने का अनुरोध किया था। यानी पुलिस के पास नकदी थी, दूसरी तरफ आयकर विभाग उसके स्रोत और जांच को लेकर सक्रिय था।
अब नकदी नहीं, वित्तीय लेन-देन पर बड़ा सवाल
यही वह बिंदु है जहां नई चार्जशीट पुराने मामले को नया अर्थ देती है। पहले पुलिस के सामने नकदी थी, अब डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल डेटा की कड़ी भी। दोनों मामलों की कड़ियां जुड़ती हैं तो जांच का अगला सवाल सिर्फ यह नहीं होगा सट्टा कौन खिला रहा था बल्कि होगा आईडी किसके नियंत्रण में थी?
सट्टे की रकम कौन जमा करता था? किस खाते में जाती थी? मोबाइल से मिले डिजिटल संपर्क किन लोगों तक पहुंचते हैं? सट्टे से कमाई गई रकम का आगे क्या हुआ? और सबसे अहम क्या डिजिटल नेटवर्क और पुरानी नकदी के बीच कोई कड़ी है?
सनपाल की कहानी में जमीन वाला अध्याय भी बाकी... सनपाल के खिलाफ अगस्त 2022 में एलओसी जारी होने की जानकारी सामने आई थी। 4 नवंबर 2025 को शहपुरा की जमीन का नामांतरण आवेदन और बाद में राजस्व रिकॉर्ड में उसका नाम दर्ज होने की बात सामने आई।
यह प्रक्रिया अपने आप में अवैध होने का निष्कर्ष नहीं देती, लेकिन विदेश में मौजूद व्यक्ति की संपत्ति संबंधी प्रक्रिया किसने संभाली, यह सवाल जरूर खड़ा करती है। यहीं सट्टे की आईडी से संपत्ति तक जांच की दिशा बदल सकती है।
मोबाइल से शुरू होकर बात जमीन तक क्यों?
नई चार्जशीट ने जांच को नया औजार दिया है तकनीकी साक्ष्य पुराने मामले ने नकदी दिखाई थी। अब मोबाइलों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की कड़ियां सामने रखी हैं। सनपाल की कथित आईडी का उल्लेख पहले ही पुलिस दस्तावेज में आ चुका है और उसकी विदेश में मौजूदगी के कारण कार्रवाई अधूरी रही। इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल है सट्टा कौन चला रहा था, पैसा कौन संभाल रहा था और उस पैसे का आखिरी ठिकाना कहां था?
पुलिस की चार्जशीट में डिजिटल साक्ष्य दर्ज हैं। आयकर विभाग 23 लाख की बरामद रकम को लेकर जांच कर चुका है। सनपाल से जुड़ी संपत्ति का सवाल अलग खड़ा है। अब जरूरत आरोपियों की संख्या गिनने से ज्यादा उस डिजिटल और आर्थिक कड़ी को जोड़ने की है, जो मोबाइल से शुरू होकर बैंक खातों, संपत्तियों और विदेश तक पहुंच सकती है।
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