टीसीएस का रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला
KHULASA FIRST
संवाददाता

चंद्रशेखर शर्मा 94250-62800 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
महाराष्ट्र के एक टीसीएस कैंपस से सनसनीखेज मामला सामने आया है। ये मामला आंखें खोलने वाला है और डराने वाला भी ! असल में इस मामले का हर किसी को संज्ञान लेना बिलकुल बनता है।
जी हां, सबसे पहले तो जान लीजिए कि टीसीएस यानी क्या ? टीसीएस बोले तो टाटा कंसल्टेंसी सर्विस। विदित हो कि ये टाटा समूह के स्वामित्व वाली देश और दुनिया की अत्यंत प्रतिष्ठित और अग्रणी आईटी कंपनी है।
समें इंदौर सहित देशभर के अनगिनत युवा कार्यरत हैं। महाराष्ट्र के नासिक स्थित इसी कंपनी के कैंपस से जो मामला सामने आया है उसे बहुत से लोग ‘जिहाद’ करार दे रहे हैं और इसे कॉर्पोरेट जिहाद बता रहे हैं!
जी हां, आइए, इस मामले को सिलसिलेवार देखते-समझते हैं।
इसकी शुरुआत ऐसे हुई कि कुछ समय पहले नासिक के एक स्थानीय नेता का वहां की पुलिस के पास फोन आता है। नेता पुलिस को बताते हैं कि टीसीएस नासिक की एक महिला कर्मचारी ने अचानक इस्लामिक रीति-रिवाज अपनाना शुरू कर दिया है और वो रमजान में रोजे रखना व नमाज पढ़ना आदि करने लगी है!
इस पर पुलिस ने उस महिला (युवती) के घर वालों से संपर्क किया तो घर वालों ने पुलिस को बताया कि जब से उनकी लड़की ने रोजे रखना और इस्लामिक तौर-तरीके से जीना शुरू किया है तो उसके बाद उन्होंने उसका काम पर जाना बंद कर दिया है। तब नासिक पुलिस के कान खड़े हुए।
उसने मामले की सच्चाई जानने के लिए एक योजना तैयार की। इसके तहत पुलिस ने अपनी कुछ महिला कॉन्स्टेबल्स को बाकायदा हाउस कीपिंग की नौकरी दिलवाकर व अंडरकवर एजेंट्स बनाकर उन्हें टीसीएस में दाखिल करवाया।
इन महिला एजेंट्स ने वहां अंदर रहकर तमाम मालूमात जुटाई तो सामने आया वहां की युवतियों के साथ यौन उत्पीड़न, धार्मिक भावनाएं भड़काने और उनके धर्मांतरण का सनसनीखेज घिनौना खेल खेला जा रहा है।
आप देखिए कि बाकायदा सुनियोजित तरीके से खेले जा रहे इस घिनौने खेल की शिकार हुईं करीब एक दर्जन युवतियों के नाम अब तक सामने आ चुके हैं। पहले 8 पीड़ित युवतियों और एक शख्स ने कंपनी के 6 टीम लीडर्स और एक एचआर मैनेजर के खिलाफ शिकायत की।
इसमें रेप, शादी का झांसा देकर यौन उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के गंभीर आरोप हैं। बाद में तीन और पीड़ित सामने आए। मामले की जांच कर रही एसआईटी का मानना है कि पीड़ितों की संख्या आगे और बढ़ सकती है।
पीड़ितों ने बताया कि आरोपी टीम लीडर्स उन्हें गालियां देते थे, उनकी धार्मिक मान्यता और भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली बातें करते थे, साथ में इस्लाम की तारीफ करते थे और उसका बढ़ा-चढ़ाकर प्रसार करते थे। यहीं नहीं, बल्कि इस्लामिक रीति-रिवाज अपनाने पर वेतन वृद्धि और प्रमोशन तक का लालच देते थे।
इसके अलावा तरह-तरह से दबाव भी बनाते थे। एक पल रुककर सोचिए तो कि देश की, पूरी दुनिया में फैली एक अत्यंत प्रतिष्ठित और अग्रणी आईटी कंपनी में, यह सब साजिशन और किसी योजना के तहत किया जा रहा है ! वो भी आपके-हमारे जैसे घरों की पढ़ी-लिखी बच्चियों के साथ !
इस साजिश और योजना पर आने से पहले जान लीजिए कि आरोपियों में एक युवती निदा खान के अलावा, दानिश शेख, मोहम्मद अत्तार, इमरान और अन्य नाम सामने आ चुके हैं। कई आरोपी गिरफ्तार भी किए गए हैं, जबकि निदा फुर्र हो गयी है।
साजिश और योजना इससे समझिए कि आरोपियों ने अपना एक व्हाट्सएप्प ग्रुप भी बना रखा था। इसमें सब बात होती थी कि कौन अपने ‘टारगेट’ को क्या बता रहा है, उसे कैसे फंसा रहा है और इस सबके लिए उसे क्या-क्या करना है आदि। इस ग्रुप से कई चैट्स डिलीट की हुई भी मिली है।
पुलिस फोरेंसिक विभाग की मदद से इन चैट्स का पता लगाने में जुटी है। बताते हैं कि फरार निदा खान वहां एचआर मैनेजर थी और कुछेक पीड़िताओं ने उससे मामले की शिकायत भी की थी और उसके बॉस के साथ उस बॉस के बॉस से भी, लेकिन निदा ने सब शिकायतों को दबा दिया।
खास बात यह कि वहां यह सब वर्ष 2022 से चल रहा था ! यानी पिछले चार बरसों से ! यानी कम्पनी में कट्टरता बढ़ाने और एक खास धर्म के प्रचार-प्रसार को फैलाने का काम। इसके बावजूद कम्पनी के कर्ता-धर्ता अंधे-बहरे बने रहे। पुलिस ने इस मामले में अब तक 9 केस दर्ज किए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तार और दानिश शेख बताए गए हैं। पुलिस जांच अभी जारी है। गौरतलब बात यह कि आरोपियों में एक हिन्दू अश्विनी चेनानी का नाम भी शामिल है। खैर।
हकीकतन इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में जानकार दो अहम बातों का खुलासा करते हैं। पहली बात वो यह कहते हैं कि बात-बात पर शोर उठाने वाले देश के विपक्षी दलों ने इस मामले पर मुंह में गोया दही जमा रखा है ! इसके बजाय यदि इस केस में कोई मुस्लिम युवती प्रताड़ित होती तो यही विपक्ष आसमान सिर पर उठा लेता।
दूसरी अहम बात जानकार यह कहते हैं कि इस केस से साफ है कि मासूम बच्चियों और युवतियों को इस तरह शिकार बनाकर उनका धर्मांतरण करने का घिनौना खेल अब केवल तंग बस्तियों और निर्धन परिवारों तक ही सीमित न रहा। जाहिर है अब खासी पढ़ी-लिखी युवतियों को भी निशाना बनाया जा रहा है।
सो जानकार कहते हैं कि देश में लव जिहाद के बेशुमार मामले सामने आ रहे हैं और उसमें पीड़िताओं की नृशंस हत्या से लेकर उसके तमाम गंभीर नतीजे भी सबको पता। इसके बावजूद पढ़ी-लिखी युवतियों को इतनी समझ, तमीज और अक्ल नहीं होना कि किन लोगों से दोस्ती रखना है और किन लोगों से सौ हाथ की दूरी, यह हैरान करने वाला है।
बहरहाल वो अभिभावकों से यह अपील भी करते हैं कि आपकी बेटी कॉलेज और कार्यस्थल पर कितनी सुरक्षित है और उसका चाल चलन कैसा है, इसकी नियमित निगरानी अवश्य रखिए। उम्मीद है यह बात हर ठिकाने तक पहुंचेगी। गोया ये कथित कारपोरेट जिहाद अभी सिर्फ एक कैंपस से सामने आया है और पता नहीं ये कहां-कहां जारी हो।
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