खबर
Top News

काशी के कपाल पर महाकाल के हस्ताक्षर: सीएम यादव ने योगी आदित्यनाथ को सौंपी वैदिक घड़ी

KHULASA FIRST

संवाददाता

04 अप्रैल 2026, 12:59 pm
86 views
शेयर करें:
काशी के कपाल पर महाकाल के हस्ताक्षर

अब काशी में भी होगी काल की अचूक गणना

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
धर्म नगरी काशी में अब समय की गणना भारतीय पंचांग और प्राचीन पद्धतियों के अनुसार होगी। प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव ने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को विशेष ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ भेंट की है।

सम्राट विक्रमादित्य के महानाट्य के शुभारंभ अवसर पर दी गई यह घड़ी बाबा विश्वनाथ की नगरी और महाकाल की नगरी उज्जैन के सांस्कृतिक जुड़ाव को और मजबूत करेगी। साथ ही ये अलौकिक पल प्राचीन नगरी काशी के कपाल पर एक तरह से राजा महाकाल के हस्ताक्षर के रूप में दर्ज भी हुआ।

धर्म नगरी काशी और महाकाल की नगरी उज्जैन का सांस्कृतिक संगम शुक्रवार को वाराणसी के में देखने को मिला। अवसर था तीन दिवसीय महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के शुभारंभ का, जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को विश्व प्रसिद्ध ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ भेंट की। यह घड़ी अब बाबा विश्वनाथ की नगरी में भारतीय पंचांग के अनुसार सटीक कालगणना, मुहूर्त और ग्रहों की स्थिति बताएगी।

मुख्यमंत्री ने बताया देश में कौन-से तीन भाइयों की जोड़ी प्रसिद्ध... मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा सम्राट वीर विक्रमादित्य की मंच पर प्रस्तुति हो रही है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति से आनंद कई गुना बढ़ गया है।

महावीर सम्राट विक्रमादित्य का गौरवशाली अतीत 2000 साल पुराना है। इस देश में तीन भाइयों की जोड़ियां प्रसिद्ध हुई हैं। एक भगवान श्रीराम और लक्ष्मण, दूसरी भगवान कृष्ण और बलराम तथा तीसरी जोड़ी भर्तृहरि महाराज और सम्राट वीर विक्रमादित्य की।

योगी बोले- मैं भाग्यशाली, मैं उज्जैन के राजा भर्तृहरि के संप्रदाय का...इस अवसर पर योगी ने उज्जैन से अपना गहरा नाता जोड़ा और कहा कि काशी बाबा विश्वनाथ की पावन धरा है, जो विश्व के नाथ हैं और उज्जैन महाकाल की पावन धरा है।

याद रखिए, काल की जो अवमानना करता है, उसे महाकाल अपने आप ही शिकार बना लेता है। महाकाल का उसे साथ मिलता है, जो काल की गति को पहचानकर उसके अनुरूप अपने आप को तैयार करता है।

यह मेरा सौभाग्य है कि महाराज भर्तृहरि नाथ संप्रदाय में ही दीक्षित हुए थे। मैं भी इसी संप्रदाय से हूं। उन्होंने कहा कालगणना की धरती उज्जैन है और पंचांग की धरती बनारस।

इन दोनों का समावेश भारतीय कालगणना को वैश्विक मंच पर पहुंचाने में अपना योगदान देगा।

मशहूर कचोरी और पूड़ी-रामभाजी का सीएम ने लिया स्वाद...मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने वाराणसी दौरे के दौरान स्थानीय खान-पान का आनंद लिया। उनकी सादगी ने लोगों का दिल जीत लिया। उन्हें अपने बीच पाकर लोगों को यकीन ही नहीं हुआ।

लोग उनसे मिलकर उत्साहित हुए। इस वाकये की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। आमजन इन तस्वीरों को देख सीएम डॉ. यादव की तारीफ कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का काफिला जब एयरपोर्ट की ओर जा रहा था, तभी वे मिंट हाउस स्थित श्रीराम भंडार पर अचानक रुक गए।

यहां उन्होंने बनारस की मशहूर कचोरी, पूड़ी-रामभाजी और जलेबी का स्वाद लिया। मुख्यमंत्री के इस सहज और सरल व्यवहार ने आम लोगों का दिल जीत लिया। स्थानीय लोगों ने भी उनसे मुलाकात कर खुशी जाहिर की और उनके इस अंदाज की सराहना की।

ब्रह्मांड की सबसे पुरानी नगरी काशी साक्षी बनी राजा महाकाल व काशी विश्वनाथ के प्रगाढ़ प्रेम की। सेतु बना सूर्य सम्राट विक्रमादित्य की जीवनगाथा पर आधारित महानाट्य। इस अद्‌भुत व अलौकिक पल के निमित्त बने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव।

अवसर था एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन-2026 का। डॉ. यादव की इस पहल पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गद्‌गद् हुए। उन्होंने कहा यह केवल एक महानाट्‌य का रूपांतरण मात्र नहीं है, यह नई पीढ़ी को अपने मूल्यों और आदर्शों से जोड़ने का एक वृहद अभियान है।

मैं इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हृदय से अभिनंदन करता हूं, धन्यवाद देता हूं। मैं धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के एक भारत श्रेष्ठ भारत के अभियान को आगे बढ़ाते हुए बाबा विश्वनाथ की पावन धरा को, महाकाल की धरा को सांस्कृतिक एकता के बंधन से जोड़ने का काम किया है।

1. यूपी के मुख्यमंत्री योगी ने एमपी के सीएम यादव को दिया धन्यवाद, सांस्कृतिक बंधन हुए प्रगाढ़

2. योगी बोले- डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के एक भारत श्रेष्ठ भारत के स्वप्न को किया साकार

3. एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन-2026 में डॉ. यादव ने काशी में लिखा नया इतिहास

4. महानाट्य के जरिये वाराणसी ने देखा सम्राट विक्रमादित्य का पराक्रम-शासन, वीरता-साहस

संबंधित समाचार

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!