घर में छिपा है बंटी नागर की आत्महत्या का राज: दो दिन पहले तक सब ठीक था; आखिर एकदम ऐसा क्या हुआ कि देना पड़ी जान
KHULASA FIRST
संवाददाता

घटना दिनांक को तीन बार ऑफिस के बाहर दिखा संदिग्ध युवक आखिर कौन?
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पुलिस शहर के बड़े रियल एस्टेट कारोबारी बंटी उर्फ संदीप नागर की खुदकुशी की वजह नहीं तलाश पाई है। हाईप्रोफाइल इस मामले में कोई कुछ भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि खुलासा फर्स्ट अपने स्तर पर मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार करीब 650 करोड़ का व्यापार करने वाला बंटी आर्थिक परेशानी के चलते जान नहीं दे सकता। दो दिन पहले तक वह सामान्य दिनचर्या वाला जीवन जी रहा था।
अचानक दो दिन के भीतर उसके परिवार के अंदर ही कोई ऐसी बात का खुलासा हुआ जिसके चलते वह अंदर ही अंदर टूट गया और आत्मग्लानि में आकर उसने रविवार को आत्महत्या जैसा कदम उठाया।
वहीं, खुलासा फर्स्ट ने कल के अंक में जिस बात को प्रमुखता से उठाया था वह तो स्पष्ट हो गई है कि बंटी नागर घटना दिनांक को सेमसंग का फोल्ड वाला मोबाइल देखते हुए दोपहर करीब 1.11 बजे ऑफिस में जाते दिखाई दे रहे हैं और उनके पास वह साड़ी कहीं नहीं दिखाई दे रही है, जिससे उन्होंने फंदा लगाकर जान दी।
चूंकि पत्नी ने उक्त साड़ी को अपनी बताया है,जिससे स्पष्ट होता है कि बंटी ने जान देना तय कर लिया था और साड़ी उन्होंने पहले ही ऑफिस में ले जाकर रख दी थी।
एसीपी संयोगितागंज नीति दंडोतिया के मुताबिक पुलिस ने अब तक कई तकनीकी साक्ष्य जुटाए हैं। घटना वाले दिन बंटी के बेटे के बुलाने पर गेट खोलने वाले प्यून गोपाल से भी कई घंटे पूछताछ की गई।
गोपाल करीब पांच साल से बंटी के ऑफिस में काम कर रहा है। आज पुलिस बंटी के बेटे ऋषित, पत्नी अर्पणा, रिश्तेदारों और दोस्तों से पूछताछ करेगी। सूत्रों के मुताबिक घटना के दिन बंटी का बेटा ऋषित सबसे पहले पहुंचा था।
पुलिस ने जब उससे सीसीटीवी कैमरों के एक्सेस के बारे पूछताछ की थी तो उसने पुलिस को बताया था कि इनका एक्सेस उसके पास है, लेकिन वह उसका पासवर्ड भूल गया है।
पिता के मोबाइल का लॉक पैटर्न खोलने का बोला तो उसने पता नहीं होने का कहकर किनारा कर लिया था। हालांकि, पुलिस आज उससे घंटों बारीकी से पूछताछ कर सकती है।
अब अधूरे प्रोजेक्ट अपनाने की जुगत
बंटी नागर से जुड़े शहर के कई नामी बिल्डरों और काॅलोनाइजरों से भी पुलिस पूछताछ करेगी। पुलिस उनकी बंटी के साथ कारोबारी साझेदारी और लेन-देन से जुड़ी जानकारी जुटा रही है।
उधर, खुलासा फर्स्ट की पड़ताल में खुलासा हुआ कि बंटी नागर की मौत के बाद भाजपा के दिग्गज नेता से जुड़े हुए महेश के साथ ही कुख्यात भू-माफिया चंपू अजमेरा, साड़ी व्यापार की आड़ में फाइनेंस का काम करने वाला अशोक भाटिया और कुछ अन्य लोग बंटी नागर के अधूरे प्रोजेक्टों को हथियाने और इसकी गद्दी संभालने में जुट गए हैं।
दो बार आते हुए कैमरे में कैद युवक
वहीं, ये भी पता चला है कि रविवार दोपहर द मार्क बिल्डिंग में चौथे माले पर स्थित बंटी नागर के ऑफिस के बाहर गलियारे में एक अज्ञात युवक सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ है, जो कि 1.37 पर आया और 1.38 पर चला गया।
उसके बाद वह शाम 5 बजे करीब दो बार आते कैमरे में कैद हुआ। ऐसे में बड़ा सवाल है कि आखिर वह युवक कौन था? चूंकि बंटी ने 404 नंबर के ऑफिस में फांसी लगाई थी, जिसमें कैमरे तो लगे थे, लेकिन डीवीआर नहीं थी।
पुलिस 407 नंबर की डीवीआर ही जब्त कर पाई। ऐसे में पुलिस अब तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से अन्य फुटेज हासिल करने की कोशिश कर रही है। घटना के वक्त ऑफिस का दरवाजा अटका हुआ मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस दरवाजे और आसपास के फिंगरप्रिंट की जांच कर रही है।
पैसों के कारण नहीं मर सकता बंटी
कल शाम बंटी नागर का उठावना साकेत कम्युनिटी हॉल, साकेत नगर में था। इसमें पहुंचने दोस्तों व बिल्डरों का कहना था कि बंटी नागर व्यावसायिक लेनदेन के कारण खुदकुशी नहीं कर सकता है।
उसे किसी ने मारकर टांगा है। उधर, पुलिस बंटी नागर के मोबाइल की करीब एक महीने की सीडीआर का विश्लेषण कर रही है। बंटी की कुछ कॉलोनियों में इन लोगों से पार्टनरशिप थी, जबकि कई प्लॉट रजिस्ट्री के बजाय डायरी पर दिए जाने का भी खुलासा हुआ है।
पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि शहर के एक गैंगस्टर से जुड़े कुछ हिस्ट्रीशीटर और बदमाशों ने भी बंटी नागर से डायरी पर प्लॉट लिए थे।
पुलिस अब ऐसे लोगों की पहचान कर रही है। बंटी के कारोबार, प्लॉट के सौदों और संबंधित लोगों के साथ उसके संपर्कों की जानकारी जुटाकर पुलिस जांच को आगे बढ़ा रही है।
पुलिस आर्थिक विवाद, प्रॉपर्टी संबंधी विवाद और संभावित ब्लैकमेलिंग के एंगल पर भी पड़ताल कर रही है। दुबई से कथित तौर पर बड़ी रकम आने की चर्चा भी जांच में शामिल है।
सूत्रों ने रकम करीब 500 करोड़ रुपए बताई है, लेकिन पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है। बैंकिंग रिकॉर्ड से ही इसकी वास्तविकता सामने आएगी।
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