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मशाल यात्रा में दिखी शहीदों की कुर्बानी: यात्रा में उमड़ा जनसैलाब; देशभक्ति के नारों से गूंजा समूचा यात्रा मार्ग

KHULASA FIRST

संवाददाता

24 मार्च 2026, 1:17 pm
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मशाल यात्रा में दिखी शहीदों की कुर्बानी

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
23 मार्च शहीद दिवस के अवसर पर इंदौर का पश्चिम क्षेत्र देशभक्ति के जज्बे से सराबोर नजर आया। अमर क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की स्मृति में निकली मशाल यात्रा इस वर्ष भी भव्यता और उत्साह के साथ निकली।

फूटी कोठी (संत सेवालाल ब्रिज) से प्रारंभ हुई यह मशाल यात्रा हजारों लोगों की सहभागिता के साथ महाराणा प्रताप चौक तक पहुंची। हाथों में जलती मशालें, भगवा ध्वज और ‘भारत माता की जय’ के गगनभेदी नारों के बीच शहर की सड़कों पर देशभक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

महिला, पुरुष, बच्चे, युवा और बुजुर्ग हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को जनआंदोलन का स्वरूप दे दिया। यात्रा का नेतृत्व महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा किया गया, जबकि कई जनप्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए। इस दौरान वरिष्ठ कृष्ण मुरारी मोघे, नेता कैलाश शर्मा, जीतू जिराती, विधायक गोलू शुक्ला, महेंद्र हार्डिया, सुदर्शन गुप्ता, गोपाल गोयल, एमआईसी सदस्य राजेश उदावत, मनीष शर्मा, अभिषेक शर्मा बबलू और नंदकिशोर पहाड़िया, कमल वाघेला समेत कंचन गिदवानी, शानू शर्मा, सुनीता हार्डिया, प्रियंका चौहान, योगेश गेंदर, सौगात मिश्रा समेत अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

खास बात यह रही कि यात्रा में किन्नर समाज ने भी अपनी भागीदारी की। वहीं एनसीसी कैडेट्स हाथों में तिरंगा लेकर यात्रा का नेतृत्व कर रहे थे। घोड़े पर सवार रानी लक्ष्मी बाई स्वरूप धारण किए हुए बालिकाएं भी यात्रा का आकर्षण रहीं।

नई पीढ़ी को शहीदों के त्याग और बलिदान से जोड़ने का सशक्त माध्यम
यात्रा की विशेष आकर्षण रही भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत को समर्पित झांकियां, जिन्होंने युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाई। इससे पूर्व सुबह शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दुग्धाभिषेक कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिसमें जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

महाराणा प्रताप चौक पर पहुंचकर यात्रा का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि यह आयोजन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को शहीदों के त्याग और बलिदान से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।

इंदौर ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि शहीदों की कुर्बानी केवल इतिहास नहीं, बल्कि हमारी पहचान और प्रेरणा है। यात्रा का समन्वय प्रबल भार्गव, मुकेश शर्मा, नितिन पांडे, संस्था संघमित्र और जाग्रत युवा संगठन की टीम ने किया।

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