राजवाड़ा की शान मां महालक्ष्मी का दरबार: 200 साल से कायम है आस्था का रिश्ता
KHULASA FIRST
संवाददाता

होलकर राजवंश से जुड़ा है मंदिर का इतिहास, दीपावली पर 24 घंटे खुले रहते हैं पट
मां के चरणों के चावल से जुड़ी है अनोखी मान्यता, मंदिर का इतिहास है बेहद खास
माता लक्ष्मी व कुबेर की विशेष पूजा के साथ घरों में जलेंगे दीप, आरोग्य और नि:रोगी जीवन की कामना
सोना-चांदी और बर्तनों की खरीदारी के लिए सजे बाजार
हेमंत उपाध्याय 99930-99008, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राजवाड़ा की चहल-पहल, बाजारों की रौनक और दुकानों के बीच एक ऐसा मंदिर है, जहां आस्था की परंपरा ने करीब दो सदियों से अपना स्थान बनाए रखा है। यह है राजवाड़ा चौराहे पर स्थित मां महालक्ष्मी का प्राचीन मंदिर। यहां कोई धन-समृद्धि की कामना लेकर आता है तो कोई परिवार में खुशहाली की।
किसी की मन्नत नौकरी से जुड़ी होती है तो कोई संतान, विवाह और कारोबार में तरक्की के लिए मां के दरबार में माथा टेकता है, लेकिन इस मंदिर की पहचान सिर्फ इसकी प्राचीनता या भव्य शृंगार तक सीमित नहीं है। यहां चढ़ाए जाने वाले चावल से जुड़ी एक ऐसी परंपरा भी है, जिसे भक्त पीढ़ियों से निभाते आ रहे हैं।
होलकर राजवंश ने बनवाया था मंदिर... मंदिर का इतिहास होलकर राजवंश से जुड़ा है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, महाराजा हरिराव होलकर ने 1832-33 के आसपास इस मंदिर का निर्माण कराया था। होलकर शासक मां लक्ष्मी को अपनी कुलदेवी के रूप में मानते थे।
राजमहल के नजदीक स्थित इस मंदिर को तत्कालीन राजपरिवार की सुख-समृद्धि और वैभव से भी जोड़कर देखा जाता था। कहा जाता है कि शुरुआती दौर में मंदिर की तीन मंजिला लकड़ी की इमारत अपनी खूबसूरत नक्काशी के कारण आकर्षण का केंद्र थी। दूर-दूर से लोग इसे देखने आते थे। समय के साथ मंदिर ने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन यहां विराजित मां की प्रतिमा के प्रति लोगों की श्रद्धा कभी कम नहीं हुई।
आग में जल गई इमारत, सुरक्षित रही मां की प्रतिमा... मंदिर के इतिहास में 1933 का अग्निकांड एक बड़ी घटना माना जाता है। इस हादसे में लकड़ी से बनी पुरानी संरचना बुरी तरह नष्ट हो गई थी। इसके बावजूद मां की प्रतिमा सुरक्षित रही।
इससे पहले भी पुरानी इमारत के क्षतिग्रस्त होने की घटना का उल्लेख मिलता है। मंदिर से जुड़े विवरणों के अनुसार, एक लंबे समय तक मां की प्रतिमा छोटे से गर्भगृह में विराजित रही। बाद में देवी अहिल्या ट्रस्ट के माध्यम से मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया और आज यह श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।
चरणों के चावल घर ले जाते हैं भक्त... इस मंदिर की सबसे अनूठी परंपराओं में से एक है मां के चरणों में पीले चावल अर्पित करना। भक्त इन चावलों को मां के चरणों में रखकर अपनी मनोकामना व्यक्त करते हैं और कुछ दाने प्रसाद स्वरूप घर ले जाते हैं।
मान्यता है कि इन चावलों को तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने से घर में बरकत बनी रहती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। यह परंपरा सिर्फ पूजा का हिस्सा नहीं, बल्कि होलकर काल से चली आ रही धार्मिक मान्यताओं से भी जुड़ी मानी जाती है। दीपावली के अवसर पर कई श्रद्धालु मां को पीले चावल अर्पित कर अपने घर पधारने का निमंत्रण देते हैं।
मन्नत पूरी होने पर 56 भोग का चढ़ावा... मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं भी अलग-अलग होती हैं। कोई नया मकान बनवाने की इच्छा लेकर आता है तो कोई नौकरी, कारोबार, विवाह या संतान प्राप्ति की प्रार्थना करता है।
भक्तों की मान्यता है कि मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु मां को 56 भोग अर्पित कर आभार जताते हैं। मंदिर में सालभर ऐसे कई आयोजन होते हैं, जिनमें भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग और प्रसाद चढ़ाते हैं।
अष्टधातु की प्रतिमा और बेशकीमती आभूषण... मां महालक्ष्मी की अष्टधातु की प्रतिमा मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण है। बड़ी नथ, स्वर्ण मुकुट और पारंपरिक आभूषणों से सुसज्जित मां का स्वरूप भक्तों को बरबस अपनी ओर खींचता है। विशेष अवसरों पर मां का भव्य श्रृंगार किया जाता है। दीपावली पर प्राचीन स्वर्ण आभूषणों के साथ ही हीरे, पन्ने और माणिक से सजे गहनों से उनका श्रृंगार करने की परंपरा है।
पीढ़ियों से जुड़ी है सेवा की परंपरा... मंदिर की एक खास पहचान यहां सेवा और पूजा से जुड़े परिवारों की पीढ़ियों पुरानी परंपरा भी है। पुजारी परिवार के अनुसार, उनका परिवार लंबे समय से मंदिर की सेवा से जुड़ा रहा है।
आज भी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को इस परंपरा की निरंतरता देखने को मिलती है। राजवाड़ा के आसपास कारोबार करने वाले कई व्यापारी भी दिन की शुरुआत मां महालक्ष्मी के दर्शन से करते हैं। उनके लिए यह सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि नए दिन की शुभ शुरुआत का प्रतीक है।
समुद्र मंथन से निकला अमृत कलश
आज से जगमगाएगा छह दिवसीय दीपोत्सव
साथ आईं मां लक्ष्मी...
धन्वंतरि के पूजन से होगी शुरुआत, घर-आंगन में गूंजेगी सुख-समृद्धि की कामना
पौराणिक कथाओं में वर्णित समुद्र मंथन का वह दिव्य दृश्य... क्षीरसागर में उठती लहरें, देवताओं और असुरों के बीच अमृत की चाह और फिर हाथों में अमृत कलश लिए भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य। मान्यता है कि इसी शुभ घड़ी के साथ आरोग्य, आयु और समृद्धि का संदेश संसार तक पहुंचा।
अब इसी पौराणिक परंपरा और आस्था के साथ आज यानी 6 नवंबर, शुक्रवार को धनतेरस से छह दिवसीय दीपोत्सव का शुभारंभ होगा। घरों में पूजा की तैयारियां होंगी तो बाजार सोने-चांदी की चमक, नए बर्तनों और खरीदारी की रौनक से जगमगाने लगेंगे।
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला धनतेरस केवल खरीदारी का त्योहार नहीं, बल्कि धन, आरोग्य और खुशहाली को आमंत्रित करने का पर्व है। इसे धनत्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है। घर-परिवार में सुख-शांति, व्यापार में उन्नति और जीवन में निरोगी काया की कामना के साथ श्रद्धालु भगवान के दरबार में दीप जलाते हैं।
अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे धन्वंतरि... पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया, तब अनेक दिव्य रत्नों के साथ भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे।
उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का प्रवर्तक और देवताओं का वैद्य माना जाता है। उनके प्राकट्य का संदेश ही मानव जीवन में स्वास्थ्य और दीर्घायु के महत्व को दर्शाता है।
इसीलिए धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की विशेष आराधना की जाती है। लोग पूजा के दौरान परिवार के हर सदस्य के अच्छे स्वास्थ्य, रोगों से मुक्ति और लंबी उम्र की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि धन-दौलत से बढ़कर स्वस्थ शरीर सबसे बड़ा धन है और इसी भाव के साथ धनतेरस का पर्व आरोग्य की कामना का प्रतीक बन जाता है।
मां लक्ष्मी के स्वागत में सजेगा घर-आंगन... धनतेरस की पौराणिक महत्ता माता लक्ष्मी के प्राकट्य से भी जुड़ी हुई है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान ही मां लक्ष्मी भी प्रकट हुई थीं। यही वजह है कि इस दिन धन और वैभव की देवी माता लक्ष्मी तथा धन के अधिपति कुबेर की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
शाम होते ही घरों और प्रतिष्ठानों में दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। पूजा के लिए चौकी सजाई जाएगी, फूलों से घर-आंगन महकेंगे और मां लक्ष्मी के स्वागत में दीपों की कतारें रोशन होंगी। श्रद्धालु मां लक्ष्मी से घर में स्थायी सुख-समृद्धि, धन-धान्य और व्यापार में बरकत की कामना करेंगे।
सोने-चांदी की चमक से जगमगाएंगे बाजार... धनतेरस आते ही खरीदारी का उत्साह भी अपने चरम पर पहुंच जाता है। बाजारों में सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, पीतल, तांबे और स्टील के बर्तनों की खरीदारी की परंपरा है।
मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई नई वस्तुएं घर में शुभता और समृद्धि लेकर आती हैं। कई परिवार अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोने या चांदी के सिक्के खरीदकर उनका पूजन करते हैं।
इस दिन झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है। इसे घर की स्वच्छता और दरिद्रता दूर करने का प्रतीक माना जाता है। वहीं धनिया के बीज खरीदना भी शुभ माना जाता है। लोग इन्हें समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ घर लाते हैं। इस तरह धनतेरस पर खरीदारी महज परंपरा नहीं, बल्कि नए आरंभ और शुभता के स्वागत का प्रतीक बन जाती है।
यम दीपदान से होगी अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना... धनतेरस की शाम एक और विशेष परंपरा निभाई जाती है, जिसे यम दीपदान कहा जाता है। मान्यता के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर यमराज से परिवार के सदस्यों की लंबी आयु और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। कई परिवारों में चौमुखा दीपक जलाने की परंपरा भी है।
इस तरह धनतेरस का हर रंग अपने भीतर एक अलग संदेश समेटे है। कहीं भगवान धन्वंतरि से निरोगी जीवन की प्रार्थना है, कहीं मां लक्ष्मी से सुख-समृद्धि की आस, तो कहीं यम दीपदान के जरिए अपनों की लंबी उम्र की कामना।
घरों की साफ-सफाई और सजावट के बीच बाजारों की रौनक भी बढ़ने लगेगी। धनतेरस के साथ दीपों का यह महापर्व शुरू होगा, जो अगले छह दिनों तक आस्था, परंपरा, उल्लास और खुशियों के रंग बिखेरेगा।
संबंधित समाचार

दीपावली पर शहर में सुरक्षा का सख्त पहरा:पुलिस कमिश्नर ने ली अधिकारियों की बैठक; पटाखा बाजारों से संवेदनशील इलाकों तक रहेगी निगरानी, ड्रोन से भी होगी गश्त

सड़क पर मौत का जिम्मेदार कौन:व्यवस्था की खामी या हमारी मनमानी

युवक-युवती की कार से कुचलकर हत्या:मौसेरे भाई पर आरोप; पुलिस ने गाड़ी की बरामद

खातेगांव थाना प्रभारी की शहादत के बाद भी अवैध शराब का परिवहन जारी:बायपास पर बिना नंबर प्लेट की बाइक से शराब जब्त; ग्रामीणों ने पुलिस को दी सूचना, आबकारी विभाग की निगरानी और अवैध शराब के नेटवर्क पर उठे सवाल

कुलपति राकेश सिंघई कांग्रेस के सवालों से बचकर निकले:आरएसएस-भाजपा नेताओं की मेहमाननवाजी पर घिरे

बिना रजिस्ट्रेशन समिति का कॉलोनी में वसूली राज:मेंटेनेंस के नाम पर हर घर से 1 हजार रुपए; निजी बोरिंग के लिए मांगे 11 हजार, विरोध पर बंदूक दिखाकर धमकाने का आरोप

डेली कॉलेज के कामकाज पर उठे सवाल:बोर्ड मेंबर ने बोर्ड को भेजा ईमेल

बालाघाट को 9 दिन बाद मिला नया एसपी:मलय जैन की हुई पदस्थापना; PHQ भोपाल से भेजे गए, हॉक फोर्स की कमान भी संभालेंगे

बच्ची के ब्रेन डैमेज मामले में एनसीपीसीआर ने कलेक्टर को दिया था सात दिन का अल्टीमेटम:एमटीएच अस्पताल में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही की जांच रिपोर्ट आयोग को नहीं मिली

जमीन के सौदे में 3 लोगों पर धोखाधड़ी की FIR:कारोबारी को संस्था की अधिग्रहित जमीन अपनी बताकर थमाई; क्राइम ब्रांच ने जांच के बाद दर्ज किया केस

65 लाख पहले ही जमा किए इतना टैक्स बनता ही नहीं है:दिलजीत के कॉन्सर्ट पर 2 करोड़ के टैक्स का विवाद; आयोजक बोले

बुजुर्ग महिला की घर में हत्या:गहने और सोने का दांत गायब; लूट के बाद वारदात की आशंका

धर्मनगरी में आधी रात को घर पर हमला:पुरानी रंजिश को लेकर बढ़ा विवाद; चेहरे पर कपड़ा बांधकर पहुंचे थे हमलावर, घर में घुसकर मचाया उत्पात

बस से बाइक सवारों तक पर कार्रवाई:सड़क पर मनमानी करने वालों पर ट्रैफिक पुलिस का एक्शन

घर को बना रखा था बारूद का गोदाम:मोहल्ले के लोगों की जिंदगी से खिलवाड़

मोटर खरीदी में बड़ा घोटाला:नगर निगम ने 20 हजार की मोटर 45 हजार में खरीदी; लोकायुक्त की आपत्ति के बाद भी जांच रिपोर्ट लंबित

वीडियो देखिये, विश्व प्रसिद्ध मंदिर से हुआ दीपोत्सव का आगाज:नंदी हॉल में एक घंटे तक चला पूजन; कलेक्टर-एसपी सहित प्रशासनिक अधिकारी हुए शामिल

हिस्ट्रीशीटर फिर एमडी ड्रग्स के साथ पकड़ाया:साथी भी धराया

नसीहतें हुई बेअसर गुंडों ने चलाए चाकू:थाने में दी गई ज्ञान की घुट्टी के बाद भी नहीं माने

कहीं फाइलें ऑनलाइन दौड़ रहीं कहीं टेबलों पर अटकीं:एक ही नगर निगम; कामकाज के दो सिस्टम
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!