65 लाख पहले ही जमा किए इतना टैक्स बनता ही नहीं है: दिलजीत के कॉन्सर्ट पर 2 करोड़ के टैक्स का विवाद; आयोजक बोले
KHULASA FIRST
संवाददाता

निगम और आयोजक आमने-सामने 10 जुलाई के भुगतान का भी दिया हवाला
इंदौर में कॉन्सर्ट पर टैक्स की खींचतान, आयोजकों ने पूछा- 10% कर के बदले मिलती हैं क्या सुविधाएं?
15 नवंबर के काॅन्सर्ट को टैक्स मुक्त करने के लिए पर्यटन विभाग के एमडी और पूर्व कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी ने लिखा नगर निगम आयुक्त को पत्र
10 प्रतिशत टैक्स के बदले सुविधाएं और मुफ्त टिकटों के दबाव पर आयोजकों ने उठाए सवाल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के आगामी 15 नवंबर को इंदौर में होने वाले कॉन्सर्ट से पहले पुराने कार्यक्रम के मनोरंजन कर को लेकर विवाद गहरा गया है। नगर निगम ने 8 दिसंबर, 2024 को हुए दिलजीत के पिछले कॉन्सर्ट का करीब 2 करोड़ रुपए मनोरंजन कर बकाया बताते हुए आयोजकों और आगामी कार्यक्रम स्थल के मालिक को नोटिस जारी किए हैं। निगम का कहना है कि पुराना बकाया जमा होने के बाद ही नए कार्यक्रम की अनुमति पर विचार किया जाएगा।
आपको बता दें... मनोरंजन कर आयोजक को जमा करना रहता है, उससे आर्टिस्ट का कोई लेना नहीं होता है। 2024 के दिलजीत दोसांझ के आयोजक SAREGAMA रहे हैं और इस साल यह आयोजन BOOKMYSHOW LIVE द्वारा किया जा रहा है।
दूसरी ओर पुराने आयोजक पक्ष ने निगम के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पुराने शो के संबंध में 65 लाख रुपए का मनोरंजन कर 10 जुलाई, 2026 को ही जमा कराया जा चुका है। पुराने आयोजकों के इस दावे के बाद अब विवाद का केंद्र यह बन गया है कि वास्तव में कितनी राशि जमा हुई, निगम के रिकॉर्ड में उसका समायोजन क्यों नहीं हुआ?
2024 के शो से शुरू हुआ मनोरंजन कर का विवाद... दरअसल 8 दिसंबर, 2024 को सी-21 एस्टेट ग्राउंड में दिलजीत दोसांझ का लाइव कॉन्सर्ट आयोजित हुआ था। इस कार्यक्रम में करीब 25 हजार दर्शक पहुंचे थे। मध्यप्रदेश नगर पालिका कर नियम 2018 के प्रावधानों के तहत नगर निगम इस प्रकार के आयोजनों पर कर वसूलता है।
कॉन्सर्ट के बाद नगर निगम ने टिकट बिक्री का हिसाब और मनोरंजन कर जमा कराने को लेकर आयोजकों से जानकारी मांगी थी। दिसंबर-2024 में सामने आई रिपोर्टों में निगम ने टिकट बिक्री और दर्शकों की संख्या के आधार पर दो करोड़ रुपए से अधिक कर मिलने का अनुमान जताया था। उस समय टिकट बिक्री का पूरा हिसाब निगम को उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आई थी।
पुराने आयोजक पक्ष का दावा- 65 लाख रुपए जमा कराए, फिर बकाया कैसे? ताजा विवाद के बीच SAREGAMA ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि 2024 के कॉन्सर्ट का 65 लाख रुपए मनोरंजन कर 10 जुलाई, 2026 को जमा कराया जा चुका है।
आयोजक पक्ष का कहना है कि यदि भुगतान किया जा चुका है तो निगम को अपने रिकॉर्ड का मिलान करना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि जमा की गई राशि किस मद में दर्ज की गई है, साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि निगम द्वारा बताई जा रही कुल देनदारी और आयोजकों की ओर से किए गए भुगतान के बीच अंतर किस आधार पर है?
हालांकि 65 लाख रुपए के भुगतान की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित रसीद, निगम के खाते में जमा राशि और अधिकारिक लेखा विवरण का मिलान जरूरी है। फिलहाल निगम के ताजा दावे और आयोजक पक्ष के भुगतान संबंधी दावे में अंतर बना हुआ है।
2024 और 2026 के कार्यक्रमों के आयोजक अलग-अलग... आयोजक पक्ष ने एक महत्वपूर्ण तथ्य की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा है कि दोनों कॉन्सर्ट के आयोजक अलग-अलग हैं।
8 दिसंबर, 2024 को हुआ दिलजीत दोसांझ का कार्यक्रम सारेगामा ने आयोजित किया था, जबकि आगामी 15 नवंबर, 2026 का कॉन्सर्ट बुकमायशो लाइव आयोजित कर रहा है। आयोजकों का कहना है कि पुराने कार्यक्रम की कर संबंधी जिम्मेदारी और नए कार्यक्रम की जिम्मेदारी को अलग-अलग समझना जरूरी है।
पुराने आयोजन के कर विवाद को सीधे कलाकार दिलजीत दोसांझ से जोड़ना उचित नहीं है। कर जमा करने और आयोजन संबंधी वैधानिक जिम्मेदारियां संबंधित आयोजक पक्ष की होती हैं।
10 प्रतिशत मनोरंजन कर के बदले आयोजकों को क्या मिलता है?... आयोजक पक्ष ने नगर निगम की ओर से लिए जाने वाले 10 प्रतिशत मनोरंजन कर के बदले मिलने वाली सुविधाओं पर भी सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि बड़े संगीत कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कंपनियों को कलाकारों की फीस, मंच निर्माण, साउंड सिस्टम, लाइटिंग, सुरक्षा, कर्मचारियों, परिवहन और अन्य व्यवस्थाओं पर भारी खर्च करना पड़ता है।
इसके अलावा स्थानीय स्तर पर आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं और खर्चों का बोझ भी आयोजकों को ही उठाना पड़ता है। ऐसे में जब टिकट बिक्री पर 10 प्रतिशत मनोरंजन कर लिया जाता है तो आयोजकों को उसके अनुपात में स्थानीय निकाय की ओर से क्या सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराया जाता है, यह स्पष्ट होना चाहिए।
उनका सवाल है कि नगर निगम को मिलने वाले इस राजस्व के बदले आयोजनों के लिए बुनियादी सुविधाएं, प्रशासनिक समन्वय और अन्य जरूरी सहयोग किस तरह सुनिश्चित किया जाता है?
मुफ्त टिकटों की मांग और आर्थिक दबाव का भी मुद्दा... आयोजक पक्ष ने शहर में बड़े आयोजनों के दौरान मुफ्त टिकटों की मांग और विभिन्न स्तरों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को भी चिंता का विषय बताया है।
उनका कहना है कि बड़े कलाकारों को इंदौर लाने के लिए कंपनियां पहले ही करोड़ों रुपए का निवेश करती हैं। टिकट बिक्री के आधार पर ही आयोजन की आर्थिक गणना और जोखिम तय होता है।
ऐसे में मुफ्त टिकटों की मांग और अन्य अतिरिक्त दबाव आयोजकों के लिए मुश्किलें बढ़ाते हैं। आयोजकों का मानना है कि यदि बड़े कार्यक्रमों के लिए पारदर्शी और सहयोगात्मक व्यवस्था नहीं बनाई गई तो भविष्य में इवेंट कंपनियां इंदौर में बड़े कॉन्सर्ट आयोजित करने से पीछे हट सकती हैं।
निगम ने आयोजकों और ग्राउंड मालिक को जारी किए नोटिस.... इस बीच नगर निगम ने बकाया कर की वसूली के लिए कार्रवाई तेज कर दी है। ताजा मीडिया रिपोर्टों के अनुसार... निगम ने आयोजकों के साथ-साथ एमआर-10 रोड स्थित आगामी आयोजन स्थल के मालिक को भी नोटिस जारी किया है।
अपर आयुक्त आकाश सिंह के हवाले से बताया गया है कि 10 प्रतिशत मनोरंजन कर जमा कराने के लिए दोनों पक्षों को संयुक्त रूप से नोटिस दिए गए हैं। निगम आयोजन स्थल के मालिक से संपत्ति संबंधी दस्तावेज भी मांग रहा है।
निगम का रुख है कि पुराने कार्यक्रम की देनदारी का निराकरण किए बिना नए कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही 15 नवंबर के प्रस्तावित कार्यक्रम के मनोरंजन कर की वसूली को लेकर भी निगम पहले से तैयारी कर रहा है।
दिलजीत दोसांझ का नया कॉन्सर्ट 15 नवंबर, 2026 को एमआर-10 रोड स्थित सी-21 एस्टेट में प्रस्तावित है। बुक माय शो की इवेंट लिस्टिंग के अनुसार कार्यक्रम शाम 4 बजे से शुरू होगा और इसकी अवधि छह घंटे निर्धारित है।
टिकट की शुरुआती कीमत 3,499 रुपये बताई गई है। आयोजकों के अनुमान के मुताबिक इस कार्यक्रम में करीब 30 हजार दर्शक पहुंच सकते हैं। वहीं, पिछले कॉन्सर्ट में लगभग 25 हजार दर्शक शामिल हुए थे। ऐसे में यह आयोजन शहर के बड़े संगीत कार्यक्रमों में शामिल होने जा रहा है।
अब भुगतान के रिकॉर्ड और निगम के जवाब पर टिकी नजर
पूरे मामले में अब तीन महत्वपूर्ण सवाल सामने हैं। पहला, आयोजक पक्ष द्वारा बताए गए 65 लाख रुपये के भुगतान का निगम के रिकॉर्ड में क्या विवरण है? दूसरा, निगम द्वारा करीब दो करोड़ रुपये की देनदारी किस गणना के आधार पर बताई जा रही है? तीसरा, पुराने आयोजन के कर विवाद का निराकरण किस समय तक होगा, ताकि नए कॉन्सर्ट की अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके?
फिलहाल आयोजक पक्ष ने भुगतान का दावा करते हुए निगम से रिकॉर्ड का मिलान करने और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की मांग की है। वहीं निगम की ओर से बकाया राशि जमा कराने के लिए नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
निगम का आधिकारिक विस्तृत जवाब और भुगतान की रसीद सामने आने के बाद ही वास्तविक बकाया राशि की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इंदौर में बड़े कॉन्सर्ट आयोजित करने को लेकर यह विवाद अब केवल एक कार्यक्रम की अनुमति तक सीमित नहीं रह गया है।
यह शहर में बड़े आयोजनों के लिए कर व्यवस्था, प्रशासनिक सहयोग, आयोजकों की जिम्मेदारी और स्थानीय निकाय की सुविधाओं से जुड़े व्यापक सवाल भी खड़े कर रहा है।
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