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तीर्थनगरी अब बनेगी वैज्ञानिक और बौद्धिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र: केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने किया साइंस सेंटर का लोकार्पण; बायपास का भूमिपूजन

KHULASA FIRST

संवाददाता

03 अप्रैल 2026, 1:23 pm
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तीर्थनगरी अब बनेगी वैज्ञानिक और बौद्धिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र

खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए प्रसिद्ध उज्जैन अब वैज्ञानिक और बौद्धिक गतिविधियों का भी बड़ा केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बाबा महाकाल की नगरी में “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” थीम पर आधारित प्रदर्शनी और तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई, जिसने शहर को एक नई पहचान देने की पहल की है।

कार्यक्रम का शुभारंभ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक, शिक्षाविद और नीति-निर्माता भी मौजूद रहे।

इस आयोजन के साथ ही शहर में विकास कार्यों को भी गति दी गई। सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए 19 किलोमीटर लंबे फोरलेन बायपास का भूमिपूजन किया गया, जिसकी अनुमानित लागत 701 करोड़ रुपए है। वहीं, विक्रमादित्य हेरिटेज होटल के विस्तार पर भी करीब 22 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

कार्यक्रम वसंत विहार स्थित तारामंडल परिसर में आयोजित किया जा रहा है, जहां 15.20 करोड़ रुपए की लागत से बने अत्याधुनिक साइंस सेंटर का भी लोकार्पण किया गया। इस परियोजना में केंद्र सरकार ने 6.50 करोड़ और राज्य सरकार ने 8.56 करोड़ रुपए का योगदान दिया है। यह साइंस सेंटर विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस है।

“महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” थीम पर आधारित यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच सेतु बनाने का प्रयास है। इसमें खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष तकनीक और भारतीय काल गणना जैसे विषयों को एक साथ जोड़ा गया है।

तीन दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, खगोलविद, शिक्षाविद और अंतरिक्ष विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। विशेष रूप से नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत सहित कई विशेषज्ञ अपने विचार साझा कर रहे हैं। कार्यक्रम में जापान समेत अन्य देशों के वैज्ञानिकों की भागीदारी भी इसे वैश्विक स्वरूप दे रही है।

सम्मेलन में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हो रही है, उनमें उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन के रूप में स्थापित करने की अवधारणा, स्पेस इकोनॉमी, विकसित भारत का विजन, खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स और कॉस्मोलॉजी, भारतीय काल गणना का वैज्ञानिक आधार तथा अंतरिक्ष तकनीक और रक्षा रणनीति जैसे मुद्दे शामिल हैं।

कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी आम लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां भारतीय समय गणना, खगोल विज्ञान और आधुनिक अंतरिक्ष तकनीक से जुड़ी जानकारी सरल और रोचक तरीके से प्रस्तुत की जा रही है। इसके साथ ही पुस्तक विमोचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

छात्रों और युवाओं के लिए यह आयोजन विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रहा है। सम्मेलन के दौरान सैटेलाइट मेकिंग वर्कशॉप, UAV और RC प्लेन ट्रेनिंग, टेलीस्कोप से रात्रि आकाश अवलोकन और सनस्पॉट स्टडी जैसी गतिविधियां कराई जा रही हैं। इसके अलावा डोंगला क्षेत्र में डीप स्काई ऑब्जर्वेशन की भी व्यवस्था की गई है, जिससे छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान का व्यावहारिक अनुभव मिल सके।


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