अपनों की बेरुखी से छलका जनसंघी योद्धा का दर्द: नगर अध्यक्ष की मौजूदगी में वरिष्ठ नेता सत्तन बोले- पार्टी में पट्ठावाद और चाटुकारिता हावी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट में समाचार प्रकाशित होने के बाद भाजपा में मचा हड़कंप
अपनों ने दी उपेक्षा, विरोधियों ने दिया मान
सत्तन के द्वार पहुंची कांग्रेस, ‘पैराशूट’ नेताओं के खिलाफ भाजपा के दिग्गज के बगावती सुर
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन की अनदेखी ने अब एक वैचारिक विद्रोह का रूप ले लिया है। खुलासा फर्स्ट में इस अपमानजनक घटनाक्रम का समाचार प्रकाशित होने के बाद सोमवार को भाजपा संगठन में हड़कंप मच गया। डेमेज कंट्रोल के लिए नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा जब सत्तन के निवास पर पहुंचे तो उनकी मौजूदगी में सत्तन ने अपनी ही पार्टी के नेतृत्व को आड़े हाथों लिया।
सत्तन ने कहा कि वर्तमान भाजपा सिद्धांतों और कार्यकर्ताओं को भूलकर केवल चुनाव जीतने वाली मशीन बनकर रह गई है। 1980 में इंदौर से भाजपा के पहले विधायक रहे सत्तन ने सत्ता के अहंकार को संगठन की जड़ों के लिए घातक बताया।
उन्होंने कहा कि पार्टी में पट्ठावाद और चाटुकारिता इस कदर हावी है कि 1952 के जनसंघ के दौर से खून-पसीना बहाने वाले पुराने योद्धा आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। निष्ठा की जगह अब केवल जी-हुजूरी योग्यता का पैमाना बन गई है।
आजादी की लड़ाई में भाजपा, जनसंघ का योगदान नहीं
रविवार को आयोजित कार्यक्रम में आमंत्रण के बाद मंच पर स्थान न मिलने से नाराज सत्तन ने यहां तक कहा कि आजादी की लड़ाई में भाजपा या जनसंघ का कोई योगदान नहीं है, क्योंकि इनकी स्थापना आजादी के बाद हुई है। उन्होंने तंज कसा कि इंदौर में नर्मदा का चौथा चरण आ रहा है, जबकि वह स्वयं प्रथम चरण के व्यक्ति हैं।
यद्यपि महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इसे संवादहीनता और मानवीय त्रुटि बताकर क्षमायाचना की है, लेकिन सत्तन के तेवरों ने स्पष्ट कर दिया है कि स्वाभिमान से समझौता संभव नहीं होगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उनकी बेटी कनुप्रिया के कांग्रेस में जाने के कारण उन्हें जानबूझकर दरकिनार किया गया। इंदौर की राजनीति के इस पुरोधा ने साफ कर दिया है कि यदि संगठन ने समय रहते सुधार नहीं किया और पुराने कार्यकर्ताओं का सम्मान बहाल नहीं हुआ तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
हम 25 बार माफी मांगने को तैयार: भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने वरिष्ठ भाजपा नेता और राष्ट्रकवि सत्यनारायण सत्तन की नाराजगी पर अपना पक्ष रखा कि सत्तनजी हम सभी के मार्गदर्शक और सम्मानीय वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि रविवार को हुई घटना महज एक मानवीय त्रुटि और गलतफहमी का परिणाम थी, जिसे अब चर्चा के माध्यम से दूर कर लिया गया है।
मिश्रा ने जोर देकर कहा कि संगठन में वरिष्ठों का स्थान सर्वोपरि है और यदि अनजाने में कहीं कोई चूक हुई है तो वे अपने वरिष्ठ नेता से 25 बार माफी मांगने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि आगामी कार्यक्रमों की रणनीति और मार्गदर्शन के लिए वे स्वयं सत्तनजी के निवास पर पहुंचे थे और पार्टी स्तर पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उनके अनुसार सत्तनजी का आदेश पूरी पार्टी के लिए शिरोधार्य है और संगठन उनकी गरिमा के प्रति पूरी तरह सजग है।
सियासत में सम्मान की लड़ाई अब अपनों की दहलीज पार कर विरोधियों के आंगन तक जा पहुंची है। नर्मदा परियोजना के चौथे चरण के लोकार्पण समारोह में भाजपा के कद्दावर स्तंभ, राष्ट्रीय कवि एवं पूर्व विधायक सत्यनारायण सतन के साथ हुए बर्ताव ने शहर की राजनीति में नया उबाल ला दिया है।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में वरिष्ठता को दरकिनार किए जाने से आहत सतन का बीच में ही आकर चले जाना केवल एक नेता की नाराजगी नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर पनप रहे नए और पुराने के संघर्ष का खुला ऐलान बन गया है। अनुशासन का दम भरने वाली पार्टी के लिए यह स्थिति तब और असहज हो गई, जब उनके जख्मों पर मरहम लगाने के लिए धुर विरोधी कांग्रेस मैदान में उतर आई।
जिला कांग्रेस सेवादल के कार्यकारी अध्यक्ष विवेक खंडेलवाल, शहर कांग्रेस कार्यवाहक अध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश जोशी सहित मधुसूदन भालिका एवं यशपाल गहलोत का प्रतिनिधिमंडल न केवल सत्तन के निवास पर पहुंचा, बल्कि उन्हें तुलसी का पौधा भेंट कर यह संदेश देने की कोशिश की कि जहां अपनों ने नजरें फेरीं, वहां विपक्षी सम्मान देने को खड़े हैं। सत्तन ने भी बिना किसी लाग-लपेट के अपनी पीड़ा को शब्द देते हुए ‘पैराशूट’ नेताओं पर सीधा हमला बोला।
उन्होंने साफ कर दिया कि पार्टी में बाहर से आए ‘भैया-दादा’ संस्कृति के लोग संगठन की मूल विचारधारा और अनुशासन को दीमक की तरह चाट रहे हैं। कांग्रेस ने इस मौके को लपकते हुए भाजपा की आंतरिक कलह और अहंकार को जनता के बीच बड़े मुद्दे के रूप में पेश कर दिया है।
यह घटनाक्रम इशारा कर रहा है कि सत्ता की चकाचौंध में भाजपा अपने उन नींव के पत्थरों को भूल रही है, जिन्होंने जनसंघ के जमाने से पार्टी को सींचा है। फिलहाल, सत्तन के तेवर और कांग्रेस की सक्रियता ने इंदौर की राजनीतिक फिजा में भाजपा के लिए असहज सवालों की एक लंबी फेहरिस्त खड़ी कर दी है।
संगठन अब नए और आयातित लोगों के हाथ में... उन्होंने वर्तमान कार्यप्रणाली पर कटाक्ष किया संगठन अब उन नए और आयातित लोगों के हाथ है, जिन्हें विचारधारा और संघर्ष से लेना-देना नहीं है। सत्तन ने शासन और प्रशासन के बिगड़ते संतुलन पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेताया कि नौकरशाही पूरी तरह बेलगाम और निरंकुश हो चुकी है, जिस पर जनप्रतिनिधियों का कोई नियंत्रण नहीं बचा है। सत्ता का मद संगठन की नींव खोखली कर रहा है, जिसे रोकना अत्यंत आवश्यक है।
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