रजिस्ट्री रोकने का आदेश विधि विपरीत और अस्पष्ट: निगम की चिट्ठी के आधार पर पंजीयन पर रोक से खड़े हुए गंभीर सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम के एक पत्र के आधार पर संपत्तियों की रजिस्ट्री रोकने के निर्देश जारी करने के बाद पंजीयन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निगम ने निर्देश दिया है कि जिन संपत्तिकर खातों में खातेदार के नाम के आगे अधिभोगी (अधि.)/अधिवासी दर्ज है, ऐसी संपत्तियों के संबंध में निगम के संपत्तिकर खाते अथवा कर रसीद के आधार पर पंजीयन की कार्रवाई न की जाए।
इसी आधार पर वरिष्ठ जिला पंजीयक इंदौर-4 द्वारा उप पंजीयकों को भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह रोक किस तारीख से जारी संपत्ति कर रसीदों पर लागू होगी और पुरानी रसीदों का क्या होगा? नगर निगम के पत्र में इस महत्वपूर्ण स्थिति को स्पष्ट नहीं किया गया है।
वरिष्ठ जिला पंजीयक के पत्र क्रमांक 3337 दिनांक 18 अगस्त 2026 तथा निगम राजस्व विभाग के पत्र क्रमांक 4037 दिनांक 12 अगस्त 2026 के आधार पर उप पंजीयक कार्यालयों को निर्देश दिए गए हैं।
इसमें कहा है कि जिन संपत्तियों के संपत्तिकर खाते में खातेदार के नाम के आगे अधिभोगी/अधिवासी दर्ज है, ऐसी संपत्तियों के संबंध में नगर निगम के संपत्तिकर खाते अथवा कर रसीद के आधार पर पंजीयन की कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन सवाल यह है कि संपत्तिकर खाते में अधिभोगी अथवा अधिवासी दर्ज होने मात्र से क्या पंजीयन रोकने का स्वतः कोई वैधानिक आधार बन जाता है?
एडवोकेट ने उठाए सवाल
अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी ने निगम आयुक्त से स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि यदि किसी आदेश के आधार पर पंजीयन प्रक्रिया प्रभावित की जा रही है तो वह आदेश स्पष्ट, विधिसम्मत और सक्षम प्राधिकारी के स्तर से जारी होना चाहिए।
द्विवेदी ने यह भी आग्रह किया कि इस संबंध में मध्यप्रदेश शासन के वित्त सचिव तथा महानिरीक्षक पंजीयक, मुद्रांक एवं पंजीयन कार्यालय से स्पष्ट आदेश जारी कराया जाए, ताकि उपपंजीयक स्तर पर अलग-अलग व्याख्या की स्थिति पैदा न हो।
महापौर परिषद के प्रस्ताव के बाद बढ़ा विवाद
द्विवेदी के अनुसार निगम द्वारा इस संबंध में महापौर परिषद में प्रस्ताव पारित किया गया है और अब इसे परिषद के समक्ष रखा जाना है। इसके बाद ऐसी संपत्तियों के संपत्तिकर खाते खोलने की व्यवस्था की जा सकती है, जिनका वास्तविक उपयोग तो हो रहा है, लेकिन उनके पास विधि मान्य स्वामित्व संबंधी दस्तावेज नहीं हैं।
ऐसे में सवाल यह है कि क्या संपत्तिकर खाता किसी व्यक्ति के कब्जे या उपयोग को दर्ज करने की प्रशासनिक प्रक्रिया है या उसे संपत्ति के वैध अधिकार का आधार मान लिया जाएगा?
संपदा सिस्टम में रजिस्ट्री शुल्क जमा होगा या नहीं?
सबसे महत्वपूर्ण सवाल पंजीयन की ऑनलाइन प्रक्रिया को लेकर है। अधिवक्ता द्विवेदी ने पूछा है कि यदि ऐसी संपत्ति का दस्तावेज सेवा प्रदाता के माध्यम से उपपंजीयक कार्यालय तक पहुंचता है और उस पर स्टाम्प ड्यूटी तथा पंजीयन शुल्क जमा हो चुका है तो उपपंजीयक उसे किस कानूनी प्रावधान के तहत वापस करेंगे या पंजीयन से इंकार करेंगे?
क्या संपदा सिस्टम में ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि अधिभोगी/अधिवासी दर्ज संपत्तियों के दस्तावेज पर पंजीयन शुल्क ही जमा न हो सके? यदि ऐसी कोई तकनीकी व्यवस्था नहीं है और शुल्क जमा होने के बाद दस्तावेज उपपंजीयक कार्यालय पहुंचता है तो फिर उसे अस्वीकार करने का स्पष्ट वैधानिक आधार क्या होगा?
पुरानी रसीदों पर भी रोक या सिर्फ नई प्रविष्टियों पर?
नगर निगम के निर्देश की सबसे बड़ी अस्पष्टता यही है कि इसमें यह साफ नहीं किया गया कि किस तारीख से जारी संपत्तिकर रसीदों पर यह व्यवस्था लागू होगी। यदि किसी संपत्ति की पुरानी कर रसीद में खातेदार के नाम के आगे अधिभोगी/अधिवासीदर्ज है, तो क्या उस पर भी रजिस्ट्री रोक दी जाएगी? और यदि रोक केवल भविष्य में खोले जाने वाले खातों पर है, तो पुराने खातों के संबंध में उपपंजीयक कार्यालयों को क्या करना है?
वित्त सचिव के आदेश की भूमिका पर भी सवाल
इस पूरे मामले में वित्त सचिव अमित राठौड़ के आदेश/निर्देश को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रश्न यह है कि संपत्तिकर खाते में दर्ज किसी प्रविष्टि के आधार पर दस्तावेज के पंजीयन को रोकने की व्यवस्था किस स्पष्ट कानूनी प्रावधान के तहत की जा रही है।
यदि पंजीयन रोकना है तो सक्षम प्राधिकारी, वैधानिक प्रावधान, लागू होने की तारीख और पुराने दस्तावेजों की स्थिति इन सभी बिंदुओं को आदेश में स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।
संबंधित समाचार

दोपहिया वाहन चुराने वाला बदमाश गिरफ्तार:लाखों रुपए कीमत की बाइक बरामद; वारदात से पहले पुलिस ने दबोचा

फार्मा कंपनी में बॉयलर फटा:5 लोगों की मौत; 10 गंभीर घायल, रेस्क्यू जारी

मौत के बाद शव को लेकर मचा बवाल महासंघ के पहुंचते ही सुलझा विवाद:वी वन हॉस्पिटल का मामला

किसने पीसीसी चीफ को ‘कांग्रेस का मेल राखी सावंत' बताया:सीएम डॉ. मोहन यादव की नकल पर साधा निशाना

नगर निगम में वसूली से परेशान कचरा गाड़ी चालक ने जहर खाया, हालत गंभीर

एक ही परिवार के 4 लोगों की हत्या:युवक ने डंडे से किए ताबड़तोड़ वार; इलाके में फैली सनसनी

नगर निगम का घोटाला:आरटीआई में छिपाए कर्मचारी; घर बैठे बांट रहे वेतन

इस गिरोह के दो गुर्गों को जमानत नहीं:बिल्डर्स और रसूखदारों को धमकाने के आरोप

जिस दिन एआई चला गया उस दिन कितनी नौकरियां बचेंगी:बौद्धिक आत्महत्या की ओर बढ़ते कदम

बैंक मैनेजर बनकर साइबर ठगी:केवायसी बंद होने का डर दिखाया; क्यूआर कोड भेजकर खाते से रकम निकालने का आरोप, एक गिरफ्तार

नीलोफर हत्याकांड:एक महीने से फरार पति गिरफ्तार; बचने के लिए बदला हुलिया, पुलिस ने 5 राज्यों में 10 हजार किमी किया पीछा

पटेल नगर बावड़ी कांड के बाद भी नहीं जागा प्रशासन

शंका के दायरे में पलासिया पुलिस की कार्यप्रणाली:बंटी नागर की आत्महत्या के मामले में रसूखदारों को परेशान करने पर जोर

सिगरेट जलाते ही गैस सिलेंडर हुआ ब्लास्ट:70 प्रतिशत झुलसा युवक; कमरे की दीवार भी गिरी

जोन में संपत्ति कर घोटाला:दो कर्मचारी हुए निलंबित

इंदौर की हरियाली पर फिर वार:25 से ज्यादा पेड़ काटे; नगर निगम की अनुमति पर उठे सवाल

देखिये वीडियो, होटल में पत्नी ने पति को दूसरी महिला के साथ पकड़ा:पुलिस के सामने जड़े थप्पड़; दोनों की हुई है लव मैरिज

सड़क बना दी और विभाग को खबर नहीं:करोड़ों की वनभूमि पर 3 महीने तक चला निर्माण

गोशालाओं को ₹101 करोड़ देंगे अमित शाह:255 करोड़ के डेयरी प्लांट का करेंगे भूमिपूजन

गांधी जयंती पर बच्चों ने दांडी यात्रा के स्वरूप में की मेट्रो ट्रेन से यात्रा:250 से अधिक बच्चों ने पहली बार किया सफर, गूंजे देशभक्ति गीत
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!