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न्याय मांगने वाली ही बन गई आरोपी: सत्ता का साया; खाकी का दबाव

KHULASA FIRST

संवाददाता

13 फ़रवरी 2026, 7:05 पूर्वाह्न
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न्याय मांगने वाली ही बन गई आरोपी

जहरीले पानी से हुई मौतों के बाद अब पीने के पानी को तरसी महिला ने लगाई फांसी

क्या पानी मांगना जुर्म है? पांच घंटे थाने में बैठी रही, फिर भी नहीं सुनी गई फरियाद...

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा में जहरीले पानी से हुई मौतों का दर्द अभी शहर की स्मृति से धुंधला भी नहीं पड़ा कि बाणगंगा क्षेत्र के कुशवाह नगर से एक और चौंकाने वाली घटना ने व्यवस्था की संवेदनहीनता का खुलासा कर दिया। यहां पीने के पानी को लेकर उठा विवाद इतना बढ़ गया कि एक महिला आत्महत्या का प्रयास करने पर मजबूर हो गई। सवाल सीधा है, क्या इंदौर में अब पानी मांगना भी अपराध हो गया है? क्या आम नागरिक को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए राजनीतिक रसूख और दबाव के आगे घुटने टेकने होंगे?

शहर अभी तक भागीरथपुरा कांड की भयावहता को भुला नहीं पाया है। जहरीले पानी से हुई मौतों को लेकर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 के विधायक कैलाश विजयवर्गीय व उनके सुपुत्र आकाश विजयवर्गीय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

घटनाक्रम के अनुसार 11 फरवरी को आंचल गुप्ता अपने निर्माणाधीन मकान और दैनिक जरूरतों के लिए मोहल्ले के सरकारी बोरिंग की चाबी लेने गई थीं। आरोप है कि इस बोरिंग पर भाजपा लवकुश मंडल की उपाध्यक्ष वंदना नामदेव ने कब्जा कर रखा है।

जब आंचल ने चाबी मांगी तो वंदना की बेटी ने सरेआम अभद्रता करते हुए गालियां दीं। विवाद बढ़ने पर वंदना ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर आंचल से हाथापाई की। आंचल का आरोप है कि न्याय की उम्मीद में जब वह बाणगंगा थाने पहुंची तो टीआई सियाराम गुर्जर और स्टाफ ने उन्हें शाम 5 बजे से रात 12 बजे तक थाने में बैठाए रखा।

इस दौरान पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय और अन्य भाजपा नेताओं के फोन आने के बाद पुलिस का रवैया पूरी तरह बदल गया। पुलिस ने आंचल की रिपोर्ट लिखने के बजाय उन पर ही वंदना नामदेव की शिकायत पर प्रकरण दर्ज कर लिया।

थाने में हुए अपमान ने किया आहत... अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जिंदगी की जंग लड़ रही आंचल ने खुलासा किया कि थाने में उन पर राजीनामा करने का भारी दबाव बनाया गया। आंचल के अनुसार, वंदना के साथ आए आकाश पटेल, गोलू सैनी और अरुण तिवारी जैसे रसूखदारों ने थाने में उन पर कई भद्दे कमेंट किए और अपमानित किया।

धर्मांतरण कराने जैसे झूठे आरोप भी मढ़े गए। इससे आहत होकर आंचल गुरुवार दोपहर घर पहुंचकर फंदे पर लटक गई। हालांकि बेटे प्रथम और पड़ोसियों की तत्परता से उनकी जान बच गई। मोहल्ले की महिलाओं का आरोप है कि सरकारी बोरिंग को निजी संपत्ति की तरह उपयोग किया जा रहा है। कभी तार निकाल दिए जाते हैं तो कभी पानी के बदले अवैध वसूली की जाती है।

इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है, क्योंकि एक तरफ चंदन नगर और पंढरीनाथ जैसे थानों के प्रभारियों पर अनुशासन की गाज गिरी है, वहीं बाणगंगा थाने में फरियादी को ही आरोपी बनाने के इस खेल में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और आकाश विजयवर्गीय के करीबी होने का दावा करने वाले स्थानीय नेताओं के दबाव में पुलिस की निष्पक्षता पूरी तरह खत्म नजर आ रही है।

अधिवक्ता पूजा तिवारी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला आयोग और पुलिस कमिश्नर को शिकायत भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

जिम्मेदारों के बयान
हमें सूचना मिली थी कि एक महिला ने फांसी लगाने का प्रयास किया, जिसका हेड साहब द्वारा एमवाय अस्पताल में बयान लिया गया है। महिला पहले से दर्ज एफआईआर के बाद क्रॉस एफआईआर चाहती थी, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों में फिलहाल ऐसा कोई आधार नहीं मिला, इसलिए आंचल गुप्ता की ओर से रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।

महिला के स्वास्थ्य को लेकर डॉक्टरों की टीम से बात की जा रही है। यदि कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो नियमानुसार जांच कर कार्रवाई की जाएगी। -सियाराम गुर्जर, टीआई, थाना बाणगंगा

मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला आयोग और पुलिस कमिश्नर को ई-मेल के जरिये पूरी जानकारी भेजी गई है। हमारी मांग है कि राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव से मुक्त होकर इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो।

संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध आरोपों की स्वतंत्र जांच कर दोष सिद्ध होने की स्थिति में उचित विधिक कार्रवाई की जानी चाहिए। -पूजा तिवारी, अधिवक्ता

विवाद की शुरुआत तब हुई, जब आंचल गुप्ता ने बेटी चुन्नू का हाथ मरोड़ दिया। बोरिंग संचालन के लिए पूर्व पार्षद प्रत्याशी पिंटू ने चाबी दिलवाई थी और मैं 2 साल से इसका संचालन कर रही हूं।

पानी वितरण के लिए टाइम-टेबल तय कर रखा है। राजनीतिक संरक्षण का आरोप गलत है। वीडियो फुटेज के आधार पर ही पुलिस ने कार्रवाई की है। -वंदना नामदेव, भाजपा मंडल उपाध्यक्ष

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