नियमों के विरुद्ध संचालित हो रहा प्ले होटल: अवैध निर्माण और आवासीय कॉलोनी में व्यवसाय; प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर की बसंत विहार आवासीय कॉलोनी में प्ले होटल का संचालन नियमों की गंभीर अवहेलना का विषय बना हुआ है। इस होटल के निर्माण में सरकारी मापदंडों का पालन नहीं किया गया है।
नियम के अनुसार, संयुक्तिकरण के लिए अधिकतम 5000 स्क्वाॅयर फीट के भूखंडों को ही जोड़ा जा सकता है, लेकिन इस होटल के लिए सी-90, सी-91, सी-92 और उनके पीछे के तीन अन्य भूखंडों को मिलाकर कुल 6000 स्क्वाॅयर फीट के रकबे का उपयोग किया गया है। नगर निगम द्वारा बेसमेंट, ग्राउंड और दो मंजिल की अनुमति दी गई थी, किंतु मौके पर बेसमेंट सहित चार मंजिला इमारत खड़ी है।
मंजिलों का निर्माण अनाधिकृत
इन दो अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण पूरी तरह अनाधिकृत है और इसके लिए नगर निगम से कोई अनुमति नहीं ली गई है। यह प्रकरण न केवल अवैध निर्माण, बल्कि आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने का भी है।
बसंत विहार जैसे रिहायशी इलाके में स्थित इस होटल में फायर सेफ्टी एवं अन्य सुरक्षा संबंधी मानकों का अभाव है, जो स्थानीय निवासियों के लिए जोखिम पैदा कर रहा है।
विधायक हार्डिया ने विधानसभा में उठाया था मुद्दा
भाजपा विधायक महेंद्र हार्डिया ने स्वयं प्रदेश विधानसभा के प्रश्नकाल में आवासीय क्षेत्रों में अवैध होटल संचालन के विरुद्ध कार्रवाई के संबंध में प्रश्न उठाए थे। इसके बावजूद, निगम के जोन-22 और वार्ड 36 के अधिकारी इस स्थिति पर चुप्पी साधे हुए हैं।
नगर निगम के बिल्डिंग अधिकारियों के स्तर से इस होटल पर कार्रवाई न होना कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, होटल के स्वामित्व का संबंध पूर्व इंदौर कमिश्नर एसबी सिंह से होने के कारण विभागीय स्तर पर कार्रवाई को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।
इस मामले में नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल से अपेक्षा की जा रही है कि वे एक उच्च स्तरीय और विश्वसनीय जांच दल का गठन करें, जो बिना किसी बाहरी दबाव के इस निर्माण की निष्पक्ष जांच करे।
शहरवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले में दोषी बिल्डिंग अधिकारियों और होटल संचालकों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करेगा ताकि आवासीय क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
अब प्रश्न यह है कि क्या नगर निगम प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। विधायक की विधानसभा में शिकायत और स्पष्ट नियमों के उल्लंघन के बाद भी कार्रवाई का न होना निगम की प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।
शहर के अन्य अवैध होटलों पर की जाने वाली कार्रवाई और इस प्रकरण में बरती जा रही ढिलाई के बीच का अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। अब नगर निगम कमिश्नर सिंघल द्वारा इस दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
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