केवट पार लगाएंगे उप्र-मप्र के बुंदेलखंड में भाजपा की नैया: मछुआरा समुदायों को साधने की कोशिश
KHULASA FIRST
संवाददाता

राजेंद्र खंडेलवाल 98931-90781 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में राज्य मछुआ बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को प्रत्याशी बनाकर कई समीकरण साधे हैं। हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद अब वे निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं।
पार्टी ने मप्र में बुंदेलखंड-विंध्य की 30 से ज्यादा सीटों के अलावा उप्र के बुंदेलखंड की 80 सीटों पर केवट, निषाद, ढीमर और मछुआरा समुदायों को साधने की कोशिश की है।
उप्र में अगले वर्ष चुनाव है, ऐसे में केवट के कंधों पर भाजपा को इन समुदायों के वोट दिलाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी डाल दी गई है।
उल्लेखनीय है मप्र में राज्यसभा की तीन में से एक सीट पर कल अचानक हुए घटनाक्रम में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर भाजपा प्रत्याशी महेश केवट को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।
बाकी दो सीटों पर 18 जून को मतदान होगा। भाजपा के दोनों प्रत्याशी तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल आसानी से जीत जाएंगे। हालांकि भाजपाई रणनीतिकारों का कहना है कि यदि चुनाव होता तो भी केवट की जीत तय थी, क्योंकि भाजपा को जरूरी 8 कांग्रेसी विधायकों का समर्थन मिल जाता।
कल भाजपा प्रवक्ता हितेश वाजपेयी के ट्वीट ने भी राजनीतिक माहौल गर्मा दिया था, जिसमें उन्होंने कांग्रेस विधायकों से वोट देने की अपील की थी और ये भरोसा दिया था कि यदि भाजपा को वोट दिया तो उनकी सदस्यता नहीं जाएगी। बहरहाल, अब भाजपा के तीनों प्रत्याशियों का राज्यसभा पहुंचना तय हो गया है तो इसके बाद के राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है।
यूपी-एमपी भाजपा के लिए उपहार से कम नहीं
महेश केवट का चयन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव व प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से किया था। केंद्रीय नेतृत्व ने कह दिया था कि वो खुद जितवाने की जिम्मेदारी लें, ताकि कांग्रेस की महिला प्रत्याशी की राह रोकने का आरोप हम पर न लगे।
केवट का चुनाव दोनों राज्यों के बुंदेलखंड इलाके को साधने के लिए किया गया है। उनके जरिये अति पिछड़ा वर्ग में भाजपा पैठ मजबूत करने की कोशिश करेगी। इसके अलावा बुंदेलखंड के निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर और दमोह में पिछड़ा वर्ग को साधा जाएगा।
केवट इसी क्षेत्र के हैं, जो क्षेत्रीय संतुलन भी साधेंगे। पार्टी ने जमीनी कार्यकर्ता को संदेश भी दिया है कि बूथ और स्थानीय निकाय से राज्यसभा तक पहुंचाने का काम पार्टी करती है। मप्र की करीब 40 सीटें इन वर्गों की हैं।
उधर, उप्र के बुंदेलखंड को भी साधा जाएगा। उप्र के कुल वोटर्स में निषाद समुदाय की हिस्सेदारी 4.5 फीसदी है। विधानसभा की 80 सीटों पर निषाद जाति के वोटरों की संख्या करीब एक लाख तक पहुंचती है।
वहीं 160 से अधिक विधानसभा सीटों पर यह समाज प्रभाव रखता है। उप्र के झांसी, जालौन, ललितपुर, बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में निषाद समाज का मजबूत राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव है।
ग्वालियर-चंबल संभाग के नदी-तटीय इलाकों में निषाद, केवट, मल्लाह और बिंद उपजातियां बड़ी संख्या में हैं। केवट पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पूर्व में 6 वर्ष के लिए निष्कासित हो चुके हैं, लेकिन जल्दी ही उनका निष्कासन रद्द कर राज्य मछुआरा विकास निगम का अध्यक्ष बना दिया गया था।
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