जानलेवा यूनिपोल की अनदेखी कर रहा है नगर निगम प्रशासन: निगम अफसरों की मिलीभगत से दीपक एडवरटाइजिंग ने फुटपाथ और डिवाइडर पर किया कब्जा
KHULASA FIRST
संवाददाता

आदित्य शुक्ला 98260-63956 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम अफसरों की मिलीभगत से होर्डिंग्स माफिया ने शहरभर में मनमाने तरीके से सड़क किनारे, चौराहों और डिवाइडर में यूनिपोल बना लिए हैं। इन विशालकाय बोर्ड में विज्ञापन लगाकर हर माह लाखों रुपए कमाई कर रहे हैं।
नियम के विपरीत लगाए यूनिपोल की शिकायत होने के बाद भी निगम अफसर पूरे मामले में मूकदर्शक बने हुए हैं। इससे यूनिपोल कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं।
नगर निगम में अफसरों की अफसरशाही हावी है। इसके चलते समूचे शहर में अवैध निर्माण, अवैध कालोनियों के साथ ही नियम विरुद्ध यूनिपोल लगाकर विज्ञापन करने का कारोबार फल-फूल रहा है।
हालांकि, कई बार ऐसे मामलों की शिकायत होती है, लेकिन अफसरों की मिलीभगत के कारण अधिकतर मामलों में दिखावे की कार्रवाई कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। ऐसा ही होर्डिंग्स और यूनिपोल के मामले में हो रहा है।
निगम अफसरों की मेहरबानी से शहर में दीपक एडवरटाइजिंग द्वारा बेतरतीब तरीके से मनचाहे स्थानोे सड़क किनारे, चौराहों व डिवाइडर में यूनिपोल बनाए गए हैं। इन यूनिपोल में विज्ञापन लगाकर विज्ञापन कंपनी हर माह लाखों रुपए कमाई कर रही है, जबकि निगम को मिलने वाला किराया भी पूरा जमा नहीं कराया जा रहा है। इसके बाद भी निगम अफसर दीपक एडवरटाइजिंग पर मेहरबान हैं।
सूत्र बताते हैं कि निगम की यह सबसे बड़ी विज्ञापन एजेंसी होने से अफसरों को हर माह भारी-भरकम कमीशन भी इसके कर्ताधर्ताओं से मिलता है। विज्ञापन एजेंसी के कर्ताधर्ताओं की मनमानी की शिकायत अब तक कई बार निगमायुक्त से की गई। लेकिन कारगर कार्रवाई नहीं होने से विज्ञापन कंपनी लगातार मनमानी कर अपनी कमाई करने में जुटी हुई है।
नियमों को बताया ठेंगा
नगर निगम ने यूनिपोल निर्माण कर विज्ञापन लगाने के टेंडर में यह शर्त रखी थी कि यूनिपोल पर बनाया जाने वाले बोर्ड की साइज फिक्स रहेगी। इन विज्ञापन बोर्ड पर तीन कैमरे लगाए जाएंगे, लेकिन विज्ञापन का ठेका लेने वाली दीपक एडवरटाइजिंग ने शहर में बनाए यूनिपोल पर अपनी मनमानी के अनुसार बोर्ड बनवाए।
इसके साथ ही अधिकतर यूनिपोल बोर्ड पर तीन कैमरों की जगह मात्र एक कैमरा ही लगाया गया है। सबसे खास यह है कि निगम ने किसी भी विज्ञापन एजेंसी को डिवाइडर में यूनिपोल बनाने की अनुमति नही दी।
इसके बाद भी एजेंसी के कर्ताधर्ताओं ने डिवाइडर में यूनिपोल बना दिए। इनकी शिकायत होने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। इससे कभी कोई हादसा हुआ तो आमजन को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
पूर्व में दी क्लीनचिट
पूर्व में होर्डिंग्स और यूनिपोल की जांच अपर आयुक्त द्वारा किए जाने के बाद यूनिपोल को क्लीनचिट दे दी गई। जबकि करीब पांच दर्जन होर्डिंग्स अवैध व खतरनाक बताए। इसके बाद निगम ने सड़क किनारे बिना निगम की अनुमति के लगाए गए होर्डिंग्स और बोर्ड हटाने की कार्रवाई शुरू की, लेकिन वह बीच में ही ठप हो गई।
हालांकि, निगम की दिखावे की कार्रवाई के दौरान कुछ होर्डिंग्स हट गए तो कुछ छोड़ दिए गए। लेकिन पूरे शहर में लगे यूनिपोल की जांच को निगम अफसरोें ने मिलीभगत कर दबा दिया। जबकि सड़क किनारे फुटपा, चौराहों और डिवाइडर में बने यूनिपोल कभी भी हादसे का कारण बन सकते हैं। इससे निगम अफसरों से मिलीभगत कर विज्ञापन का काम करने वालों के हौसले बढ़ गए हैं।
कमीशन का खेल
सूत्रों की मानें तो निगम अफसर, नेता और विज्ञापन का ठेका लेने वाली एजेंसी के कर्ताधर्ताओं के बीच मिलीभगत होने से कमीशन का बड़ा खेल होता है। इसके चलते ही विज्ञापन एजेंसी अपनी कमाई के लिए मनमानी करती है। जिसे बाद में निगम अफसर व नेता क्लीनचिट दे देते हैं।
ज्ञात रहे कि बीआरटीएस पर गुजरात की विज्ञापन एजेंसी एनएस को यूनिपोल निर्माण करने और विज्ञापन लगाने का ठेका दिया गया था। पांच साल के लिए मिले ठेके के दौरान कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने पूरे बीआरटीएस में अपनी मंशा के अनुरूप यूनिपोल बनाए, जो नियम विरुद्ध थे।
इसकी शिकायतें हुईं थी। मामले की जांच हुई बाद में पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब जब बीआरटीएस टूट रहा है तो निगम अफसरों ने सभी यूनिपोल को क्लीनचिट दे दी। इस तरह निगम अफसरों के इस फैसले से होर्डिंग्स माफिया के हौसले बढ़ गए।
यही वजह है कि शहर की सड़कें, चौराहों और डिवाइडर में दीपक एडवरटाइजिंग विज्ञापन एजेंसी द्वारा बनाए गए यूनिपोल की जांच भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई। इस तरह निगम में कमीशन के बलबूते सबकुछ नियमों के दायरे में शामिल करने का खेल रचा जा रहा है।
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