खजराना खेड़ी में घटिया सड़क का खेल एक महीने से सो रहा नगर निगम प्रशासन: सीमेंट-कांक्रीट रोड बनाने वाले ठेकेदार की जांच क्यों नहीं करवा रहे जिम्मेदार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कागजों पर गुणवत्ता का ढिंढोरा पीटने वाले नगर निगम प्रशासन की जमीनी हकीकत जोन 10 के वार्ड 40 स्थित खजराना खेड़ी क्षेत्र में खुलकर सामने आ रही है। यहां लाखों रुपए की लागत से हाल ही में बनाई गई सीमेंट- कांक्रीट सड़क के निर्माण में भारी धांधली और भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला गया है।
स्थानीय निवासी निर्मल रोकड़े ने सड़क निर्माण में तकनीकी मानकों की धज्जियां उड़ाए जाने को लेकर जोन 10 के जोनल अधिकारी को लिखित शिकायत पत्र सौंपा था, लेकिन एक महीना होने के बाद भी प्रशासनिक अमले के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है।
नियम और नैतिकता का तकाजा तो यह कहता है कि लाखों रुपए के बजट से बनी इस सार्वजनिक सड़क के घटिया निर्माण की खबर मिलते ही निगम प्रशासन को स्वयं संज्ञान लेना चाहिए था।
मौके पर जाकर गुणवत्ता जांचनी चाहिए थी और मानक स्तर के विपरीत पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार का भुगतान तुरंत रोकते हुए उसे ब्लैक लिस्टेड करने की कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए थी, परंतु निगम के जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह मूकदर्शक बने बैठे हैं।
ठेकेदार बेखौफ होकर अपनी जेब भर रहा
बेस की मोटाई तय मानकों के हिसाब से रखी गई। सड़क को मजबूती देने वाले सरिया को भी नाममात्र के लिए इस्तेमाल किया गया और कांक्रीट के मिक्स डिजाइन में घटिया सामग्री खपा दी गई। जनता की गाढ़ी कमाई से टैक्स के रूप में वसूले गए लाखों रुपए को इस तरह पानी की तरह बहाया जा रहा है और ठेकेदार बेखौफ होकर अपनी जेब भर रहा है।
सड़क निर्माण के समय मौके पर मौजूद रहने वाले सुपरवाइजर, सब इंजीनियर और जोनल अधिकारी इस पूरे घटिया निर्माण के वक्त मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते रहे। शिकायत मिलने के बाद भी न तो संबंधित ठेकेदार को कोई नोटिस थमाया गया, न ही मौके पर जाकर सड़क की थिकनेस जांची गई और न ही सामग्री का कोई तकनीकी लैब टेस्ट कराया गया।
यदि नगर निगम ईमानदारी से काम करता, तो गुणवत्ता मानकों की धज्जियां उड़ाने वाले ऐसे ठेकेदार का अंतिम भुगतान तो दूर, रनिंग बिल पर भी तत्काल रोक लगा दी जाती और उसे नगर निगम के सभी भावी टेंडरों से हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखाते हुए ब्लैक लिस्ट कर दिया जाता, लेकिन अफसरों की इस रहस्यमयी खामोशी और सुस्ती से यह साफ जाहिर हो रहा है कि जनता की कमाई का पैसा गड्ढों में जाए तो जाए, ठेकेदार का आर्थिक हित प्रभावित नहीं होना चाहिए।
पूरे मामले पर नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल का प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह असहाय और लापरवाह नजर आ रहा है। नगर निगम कमिश्नर सिंघल के प्रशासनिक तंत्र में नीचे से लेकर ऊपर तक फाइलें आगे सरकने का नाम ही नहीं ले रही हैं।
जब इतने संगीन आरोपों और लिखित शिकायतों के बाद भी जांच की प्रक्रिया शुरू नहीं की जाती और ठेकेदार के भुगतान पर रोक नहीं लगाई जाती, तो नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
एक तरफ जहां घटिया निर्माण पर ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट कर उस पर जुर्माना ठोका जाना चाहिए था, वहीं दूसरी तरफ उसे अभयदान देकर खुलेआम बढ़ावा दिया जा रहा है। ठेकेदार पर इस कदर मेहरबानी यह बताने के लिए काफी है कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही की बात सिर्फ एक छलावा बनकर रह गई है।
खजराना खेड़ी के रहवासी अब अफसरों के इस रवैये से बेहद आक्रोशित हैं। बिना मजबूत आधार और घटिया सामग्री से बनी यह सड़क पहली ही बारिश का पानी और वाहनों का दबाव झेलने से पहले ही दम तोड़ देगी।
यदि नगर निगम कमिश्नर सिंघल ने इस अकर्मण्यता पर सख्त रुख अपनाते हुए तुरंत स्वतः संज्ञान नहीं लिया, निष्पक्ष जांच के आदेश जारी कर ठेकेदार का पूरा भुगतान नहीं रोका और उसे ब्लैक लिस्ट करने के साथ दोषी अमले पर कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो रहवासियों का गुस्सा कभी भी नगर निगम मुख्यालय की सड़कों पर फूटेगा और वे उग्र प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे।
शिकायत की फाइल को ही दबाने का प्रयास
निगम के अफसरों मानों भ्रष्टाचार की जांच के बजाय शिकायत की फाइल दबाने का प्रयास कर रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर सीमेंट-कांक्रीट रोड बनाने वाले ठेकेदार के खिलाफ जांच करवाने से नगर निगम के जिम्मेदार अफसर क्यों कतरा रहे हैं? कांक्रीट डालने से पहले सड़क के सब-ग्रेड और सब-बेस की ढंग से कुटाई तक नहीं की गई।
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