खरीदारों का दावा: जमीन वक्फ बोर्ड की नहीं
KHULASA FIRST
संवाददाता

100 करोड़ की जमीन का मामला
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देवास में वक्फ बोर्ड की 100 करोड़ रुपए कीमत की जमीन खरीदने में मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। इसका सबसे पहला एग्रीमेंट 11 जून 2015 को काजी इरफान अहमद अशरफी और यूव्ही डेवकॉन के बीच ओशियन सिटी नाम से कॉलोनी काटने के एवज में हुआ था, जिसमें 60 प्रतिशत हिस्सा काजी इरफान अहमद अशरफी, जबकि 40 प्रतिशत हिस्सा यूव्ही डेवकॉन के पार्टनर्स का तय किया गया था।
जमीन का विकास कर उसे बेचने की जिम्मेदारी भी यूव्ही डेवकॉन ने ली थी, जिसके एवज में काजी इरफान अहमद अशरफी को 4 किस्तों में 50 लाख रुपए पैमेंट चेक के माध्यम से किया गया था, जबकि 50 लाख रुपए नकद भी दिए गए थे, जिसकी जानकारी एग्रीमेंट में नहीं थी।
खरीदार आशीष खंडेलवाल का कहना है सभी कागजात देखने के बाद ही जमीन खरीदी है। जमीन के रिकॉर्ड में 100 वर्षों से काजी इरफान अहमद अशरफी के परिवार का ही नाम है। वक्फ बोर्ड की थी तो अपना नाम क्यों नहीं चढ़वाया।
जगह-जगह लोगों के साथ जमीन के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले विजय भट्ट की नजर इस जमीन पर 12 साल पहले ही पड़ चुकी थी, लेकिन इतने समय में वह जमीन का विकास नहीं कर सका।
पिछले साल अगस्त को इस जमीन की रजिस्ट्री एवी इंफ्रा के नाम कर दी गई, जिसके पार्टनर आशीष खंडेलवाल और विजय भट्ट का बेटा अनुत्तम भट्ट है। रजिस्ट्री में जमीन की खरीदी 5 करोड़ 65 लाख रुपए में बताई गई है, जिसका भुगतान एवी इंफ्रा द्वारा काजी इरफान अहमद अशरफी को किया गया है।
वक्फ बोर्ड का जमीन पर दावा गलत... इस मामले में जमीन के खरीदार आशीष खंडेलवाल का कहना है कि हमने सभी कागजात देखने के बाद ही जमीन खरीदी है। जमीन के रिकॉर्ड में 100 वर्षों से काजी इरफान अहमद अशरफी के परिवार का ही नाम है।
यदि जमीन वक्फ बोर्ड की थी तो उन्होंने इस पर अपना नाम क्यों नहीं चढ़वाया। वक्फ बोर्ड द्वारा दावा करने के बाद निचली अदालत से फैसला हमारे पक्ष में आया है, वर्तमान में केस हाई कोर्ट में चल रहा है। हमने जमीन का पूरा रुपया बैंक के माध्यम से दिया है।
यदि मोदी सरकार द्वारा वक्फ बोर्ड के नियमों में बदलाव नहीं किया जाता तो वक्फ बोर्ड के दावे के सामने हम नहीं टिक पाते, लेकिन अब नियम बदल चुका है, वक्फ बोर्ड किसी की भी जमीन पर अपना दावा नहीं कर सकता।
हमने देवास विकास प्राधिकरण से भी इस जमीन का अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया है, कलेक्टर भी जांच कर चुके हैं। हर जगह से हमें सही पाया गया है तो अब वक्फ बोर्ड बेवजह हस्तक्षेप कर रहा है। हमें पूरी उम्मीद है हाई कोर्ट भी सही फैसला देगा।
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