लापरवाही की भेंट चढ़ी जिंदगी: हाईटेक बसें, वेंटिलेटर पर व्यवस्था
KHULASA FIRST
संवाददाता

स्मार्ट सिटी, बेकाबू बस, लाचार सिस्टम!
राजवाड़ा पर बेकाबू ई-बस का कहर: तीन लोगों को कुचला, रिक्शा चालक समेत दो की मौत
भीड़ के बीच घुसी बस, पहियों में फंसा युवक कई फीट तक घिसटता रहा; हादसे के बाद बसों के चालक भागे, दूसरी बस अचानक चली, तो पुलिस ने जान जोखिम में डालकर रोका
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के हृदय स्थल राजवाड़ा पर रविवार दोपहर करीब 2.30 बजे उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब रंगवासा जा रही पीएम ई-बस (एमपी 09 बीएस 8926) अचानक अनियंत्रित होकर भीड़ में जा घुसी।
बस ने ऑटो रिक्शा के पास खड़े लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। एमवाय अस्पताल में मौजूद परिजन के अनुसार हादसे में रिक्शा चालक गणेश टांगड़े उर्फ पिंटू (36) की बस के अगले पहिए के नीचे आने पर मौके पर ही और गंभीर घायल जितेंद्र पिता बाबूलाल शर्मा (40) की इलाज की दौरान मौत हो गई।
वहीं देवास निवासी ऑटो चालक राधेश्याम के हाथ-पैर और चेहरे पर बस का पहिया चढ़ने से गंभीर चोटें आई हैं। फेरी लगाकर बैग बेचने वाले व्यक्ति सहित अन्य लोग भी घायल हुए हैं।
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और गुस्साई भीड़ ने बस चालक को घेर लिया। पुलिस ने किसी तरह चालक को भीड़ से सुरक्षित निकालकर थाने पहुंचाया।
स्टॉप से अचानक आगे बढ़ी बस, तीन लोग आए चपेट में
राजवाड़ा क्षेत्र में सिटी बस स्टॉप पर खड़ी नई इलेक्ट्रिक बस अचानक करीब 20 फीट आगे बढ़ गई। बस की चपेट में आए तीन लोगों में से दो की जान चली गई। इसी दौरान एक युवक और युवती भी बस की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए।
घटना इतनी अचानक हुई कि आसपास मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
गुस्साई भीड़ ने चालक को घेरा, पुलिस ने बचाया
हादसे के बाद राजवाड़ा क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बस चालक को घेर लिया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और चालक को भीड़ से सुरक्षित निकालकर थाने पहुंचाया।
चालक का दावा- ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन बस नहीं रुकी
इस हादसे में बस की तकनीकी स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बस चालक धनराज ने पुलिस को बताया कि उसे बस चलाने का चार साल का अनुभव है। चालक का कहना है कि बस चल रही थी और अचानक आगे बढ़ गई।
उसने ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन ब्रेक नहीं लगा। पुलिस बस की तकनीकी जांच कराने की बात कह रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण से हुआ।
सीसीटीवी में कैद हुआ हादसा
राजवाड़ा में हुए इस हादसे का घटनाक्रम सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुआ है। फुटेज में बस की चपेट में आते लोग दिखाई दे रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज और बस की तकनीकी जांच के आधार पर दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बस की चपेट में आए एक व्यक्ति को पहिया कई फीट तक घसीटता हुआ ले गया। इसके बाद बस पूजन सामग्री की दुकान की सीढ़ी से टकराकर रुकी।
हादसे के बाद आक्रोशित भीड़ ने बस पर पथराव और तोड़फोड़ शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह हालात को नियंत्रित किया। घटना ने राजवाड़ा जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में बस संचालन, यातायात व्यवस्था और सड़क किनारे बने अव्यवस्थित स्टैंड पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहियों में फंसा रहा घायल, 20-25 मिनट तक तमाशबीन बनी रही भीड़!
प्रत्यक्षदर्शी शकुंतला सिंगाड़े वाले के अनुसार हादसे में देवास निवासी ऑटो चालक राधेश्याम, बाणगंगा निवासी फेरी लगाकर बैग बेचने वाला व्यक्ति और अन्य लोग बस की चपेट में आए।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बस की चपेट में आए एक व्यक्ति को पहिया कई फीट तक घसीटता रहा। हादसे के बाद घायलों में से कुछ बस के नीचे फंसे बताए गए।
मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक करीब 20 से 25 मिनट तक घायल सड़क पर पड़े रहे और बड़ी संख्या में लोग मदद करने के बजाय घटना का वीडियो बनाते नजर आए। बाद में सिटी बस के सुपरवाइजर धीरज शर्मा ने दो ऑटो रिक्शा की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
राजवाड़ा पर रोज 185 बसें, फिर भी ट्रैफिक व्यवस्था बेपटरी
राजवाड़ा चौक से प्रतिदिन करीब 185 बसों का संचालन अलग-अलग मार्गों के लिए किया जाता है। इसके बावजूद चौक के चारों ओर यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होने के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं।
राजवाड़ा के आसपास ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा के जमावड़े के कारण सड़क का बड़ा हिस्सा घिरा रहता है। पुलिस चौकी के आसपास भी बड़ी संख्या में ई-रिक्शा खड़े रहने की बात सामने आई है।
यही स्थिति गुरुद्वारा चौराहे और जवाहर मार्ग के दोनों तरफ दिखाई देती है। ऐसे में मुख्य मार्गों पर वाहन रेंगते हुए निकलते हैं और कई बार जाम की स्थिति बनती है।
हादसे के बाद यह सवाल फिर खड़ा हो गया है कि जब राजवाड़ा जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में प्रतिदिन सैकड़ों बसें संचालित होती हैं, तो बसों और ऑटो-ई रिक्शा की आवाजाही के लिए सुरक्षित और प्रभावी ट्रैफिक प्लान आखिर कहां है?
एक सेकंड की सजगता ने बचाई महिला और बच्चे की जान
हादसे के दौरान एक महिला अपने छोटे बच्चे के साथ सड़क किनारे खड़ी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस को अनियंत्रित होता देख उसके पति ने तत्काल पत्नी और गोद में मौजूद बच्चे को अपनी ओर खींच लिया।
कुछ सेकंड की देरी होती तो महिला और बच्चा भी बस की चपेट में आ सकते थे। सीसीटीवी फुटेज में भी एक अन्य व्यक्ति बस के पिछले पहिए की चपेट में आने से बाल-बाल बचता दिखाई दिया।
घटनास्थल की भीड़ और बस की रफ्तार को देखते हुए स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बस कुछ और आगे बढ़ती तो जनहानि का आंकड़ा कहीं अधिक हो सकता था। घटना की जानकारी मिलने के बाद कांग्रेस नेता चिंटू चौकसे भी अस्पताल पहुंचे।
उन्होंने घायलों और उनके परिजन से मुलाकात की तथा गंभीर मरीजों के उपचार को लेकर डॉक्टरों से चर्चा की। चौकसे ने सरकार से मृतक के परिजन को एक करोड़ रुपए तथा घायलों को 25-25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की मांग की।
हादसे ने फिर खोल दी राजवाड़ा की अव्यवस्था की पोल
राजवाड़ा पर हुए हादसे ने केवल बस चालक की कथित लापरवाही का सवाल नहीं उठाया, बल्कि पूरे यातायात प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में बस संचालन, ऑटो, ई-रिक्शा के जमावड़े, सड़क किनारे ठेले-रेहड़ी और दुकानों के फैलाव तथा पैदल चलने वालों के लिए उपलब्ध जगह, इन सभी व्यवस्थाओं की एक साथ समीक्षा की जरूरत का खुलासा हुआ है।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी फिर तेज हो गई है कि राजवाड़ा और आसपास के इलाकों में लंबे समय से सैकड़ों रेहड़ी-पटरी और ठेले संचालित हो रहे हैं। इनके संबंध में अवैध वसूली के आरोप भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं। पहले सरकारी कर्मचारियों और अब असामाजिक तत्वों की कथित भूमिका की बातें कही जा रही हैं।
सराफा थाना क्षेत्र में सामने आई हालिया कथित वसूली की घटना के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में है कि आखिर राजवाड़ा और आसपास के बाजार क्षेत्र में सड़क, फुटपाथ और सार्वजनिक स्थानों पर कब्जे तथा कथित अवैध वसूली की शिकायतों पर जिम्मेदारी किसकी है?
एक हादसे ने कई सवाल छोड़ दिए हैं!
क्या राजवाड़ा जैसे शहर के सबसे संवेदनशील हिस्से में बसों की आवाजाही के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम हैं?
क्या अव्यवस्थित ऑटो, ई-रिक्शा स्टैंड पर कार्रवाई होगी?
प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा...नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने राजवाड़ा क्षेत्र में सरकारी सिटी बस (पीएम बस सेवा) से हुए हादसे पर गहरा दुख जताते हुए प्रशासन पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा, राजवाड़ा जैसे व्यस्ततम इलाके में सिटी बस द्वारा एक व्यक्ति को कुचलने से हुई मौत और तीन लोगों का गंभीर रूप से घायल होना अत्यंत चिंताजनक और प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है।
राज्य सरकार पीड़ित परिवार को तत्काल उचित मुआवजा दे और घायलों के त्वरित व समुचित इलाज का इंतजाम करे। इस दर्दनाक हादसे की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
ड्राइवर गिरफ्तार, तोड़फोड़ करने वालों पर केस
कल दोपहर राजवाड़ा क्षेत्र में तेज रफ्तार सिटी बस से हुई मौत के मामले में एमजी रोड पुलिस ने ड्राइवर धनराज पिता कालूराम गांगले (40) निवासी भावना नगर, खंडवा नाका को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस ने धनराज के खिलाफ सबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है। वहीं, घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने बस के कांच फोड़ने के साथ तोड़फोड़ कर उसे क्षतिग्रस्त किया था।
हादसे के बाद बस में तोडफ़ोड़ करने का भी प्रकरण दर्ज हुआ है। आरोप है कि अभिषेक उर्फ राघवेंद्र सिंह ठाकुर और ओम विजय यादव ने बस के आगे के कांच, दोनों तरफ की खिड़कियों के कांच और आगे की बॉडी समेत अन्य हिस्सों में तोडफ़ोड़ कर नुकसान पहुंचाया था।
ग्रीन सेल को घायलों का अस्पताल खर्च उठाने के निर्देश दिए
राजवाड़ा दुर्घटना में बस का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस होने से पीड़ितों को नियमानुसार क्लेम मिलेगा। इसके साथ ही ग्रीन सेल को घायलों के अस्पताल का खर्च उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
व्यवस्था सुधार के लिए रूट विश्लेषण किया जा रहा है और फील्ड सुपरवाइजरों की तैनाती में बदलाव किया है। राजवाड़ा के आसपास बसों के रूट में संशोधन पर भी विचार चल रहा है।
बस की तकनीकी जांच आयशर और एआईसीटीएसएल की टीम करेगी, हालांकि अब तक किसी तकनीकी खराबी की शिकायत नहीं मिली है। -अर्थ जैन, अपर आयुक्त, अटल सिटी ट्रांसपोर्ट
फॉरेंसिक टीम ने खंगाला घटनास्थल, मिले रगड़ के निशान
दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम भी तत्काल मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत कर घटनाक्रम को समझने का प्रयास किया।
सड़क पर पड़े खून के निशान और बस के पहियों से बने रगड़ के निशानों को भी चिह्नित किया गया। पुलिस अधिकारी दिशेष अग्रवाल ने बताया कि राजवाड़ा बस स्टैंड पर एक बस बेकाबू हो गई थी, जिसकी चपेट में तीन लोग आए।
सभी को उपचार के लिए एमवाय अस्पताल पहुंचाया गया। बस चालक को पुलिस ने अभिरक्षा में लिया है और मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अन्य चालक भी बसें सड़क पर छोड़कर चले गए
हादसे के बाद स्थिति केवल भीड़ और तोड़फोड़ तक सीमित नहीं रही। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोध और हंगामे के डर से आसपास खड़ी कुछ अन्य बसों के चालक भी अपनी बसें सड़क पर छोड़कर चले गए।
इसी दौरान बस कंपनी के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। एक बस की चाबी उपलब्ध नहीं होने पर उसे बैटरी के जरिए स्टार्ट करने का प्रयास किया गया। इसी दौरान बस अचानक चल पड़ी और मौके पर मौजूद लोगों में फिर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
पुलिस अधिकारी दिशेष अग्रवाल सहित पुलिस जवानों ने बस को रोकने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर प्रयास किया। इसी दौरान एक युवक बस में चढ़ा और ब्रेक लगाकर उसे रोक दिया।
यदि बस समय रहते नहीं रुकती तो दूसरी बार भी कई लोगों के कुचलने की आशंका पैदा हो गई थी। अस्पताल पहुंचे चिंटू चौकसे, मृतक के लिए एक करोड़ और घायलों को 25-25 लाख की मांग
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