शाही मस्जिद मामला: कोर्ट ने कहा; नगर निगम के जवाब और नोटिस में दिए आश्वासन बाध्यकारी होंगे
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
शाही मस्जिद के सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे हिस्से को हटाने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार किया। इससे मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया आगे जारी रह सकेगी।
सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष की ओर से प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच समझौते का हवाला दिया गया। वहीं नगर निगम की ओर से कहा गया कि ऐसा कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है और मस्जिद प्रशासन को प्रभावित हिस्सा स्वयं हटाने का अवसर दिया गया था।
कोर्ट ने कहा- नगर निगम के आश्वासन बाध्यकारी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है और समझौते में किए गए आश्वासनों को रिकॉर्ड पर लिया जाना चाहिए।
इस पर कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता और नगर निगम के बीच मामला पहले ही तय हो चुका था, हालांकि उसका पूरा विवरण न्यायालय के सामने उपलब्ध नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नगर निगम ने अपने जवाब और नोटिस में जो आश्वासन दिए हैं, वे नगर निगम पर बाध्यकारी होंगे।
याचिकाकर्ता बोला- समझौता पूरा होने तक कार्रवाई रोकी जाए
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ है और जब तक उसकी शर्तें पूरी होकर रिकॉर्ड पर नहीं आ जातीं, तब तक कार्रवाई रोकी जानी चाहिए।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि मस्जिद कमेटी प्रभावित हिस्से को स्वयं हटाने की कार्रवाई कर रही है और काजी के वीडियो में भी समझौते की बात कही गई है।
नगर निगम ने कहा- कोई औपचारिक समझौता नहीं
नगर निगम की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है। पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि दो वीडियो में मस्जिद प्रशासन स्वयं संरचना हटाता दिखाई दे रहा है। एकल पीठ के आदेश के बाद मस्जिद प्रशासन को प्रभावित हिस्सा स्वयं हटाने का अवसर दिया गया था।
नगर निगम की ओर से यह भी कहा गया कि सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में कई अन्य संरचनाओं को भी हटाया गया है और कार्रवाई केवल मस्जिद को लेकर नहीं है।
मस्जिद के 10 प्रतिशत से कम हिस्से का मामला
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने कहा कि मस्जिद के कुल क्षेत्रफल के 10 प्रतिशत से भी कम हिस्से को हटाया जाना है। प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया मस्जिद प्रशासन ने स्वयं शुरू कर दी है। ऐसे में अपील में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बचता।
प्रतिवादी पक्ष ने यह बताया कि सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में 80 से अधिक धार्मिक संरचनाओं पर कार्रवाई की जा चुकी है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या मंदिरों पर भी कार्रवाई की गई है। जवाब में प्रतिवादी पक्ष ने कहा- हां।
सड़क चौड़ीकरण को लेकर पहले भी खारिज हो चुकी हैं याचिकाएं
इस मामले में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 9 सितंबर को भी शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने के खिलाफ दायर दो याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
अदालत ने माना था कि नगर निगम ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई की है। मामला सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से जुड़ा है। सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना के तहत मस्जिद का कुछ हिस्सा प्रस्तावित सड़क सीमा में आ रहा है।
सुनवाई के दौरान क्या-क्या कहा गया?
याचिकाकर्ता पक्ष: प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच समझौता हुआ है। समझौते की शर्तें पूरी होने तक कार्रवाई रोकी जाए।
प्रतिवादी पक्ष: कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है। मस्जिद प्रशासन को प्रभावित हिस्सा स्वयं हटाने का अवसर दिया गया था और वह प्रक्रिया शुरू कर चुका है।
कोर्ट : नगर निगम ने अपने जवाब और नोटिस में जो आश्वासन दिए हैं, वे नगर निगम पर बाध्यकारी होंगे।
अदालत के आदेश के बाद अब सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
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