एमपीआरडीसी और ठेकेदार ने सैकड़ों वृक्ष काट डाले: बरलई शकर फैक्ट्री में सामने आई लापरवाही
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बरलई शकर फैक्ट्री शिप्रा में एमपीआरडीसी और ठेकेदार द्वारा जान-बूझकर दिन-रात लगातार काम किया जा रहा है, जबकि अभी तक हजारों किसानों ने इंदौर कलेक्टर एवं तहसील मुख्यालय सांवेर में एफडीएम कोर्ट में जो आपत्ति लगाई उनका अभी तक निराकरण नहीं हुआ है एवं ना ही जमीन का नामांतरण एमपी आरडीसी के पक्ष में हुआ है, इसके बाद भी मोहन सरकार एवं मंत्री सिलावट की मिलीभगत के परिणाम स्वरूप ठेकेदार लगातार काम कर रहा है, जिसकी जितनी निंदा की जाए कम है।
ये आरोप बरलई शकर फैक्ट्री संघर्ष समिति के हंसराज मंडलोई ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति जारी करके लगाए है। किसान नेता मंडलोई ने आगे कहा कि फैक्ट्री के संस्थापक अध्यक्ष दिवंगत बापूसिंह मंडलोई के सान्निध्य में फैक्ट्री परिसर में हजारों आम, पीपल, बरगद, शीशम, जामुन के फलदार वृक्ष लगाए थे, उनको भी ठेकेदार द्वारा लगातार काटा जा रहा है। सबूत खत्म करने के लिए इन वृक्षों को बड़ी जेसीबी से जड़ समेत उखाड़ा जा रहा है।
मंडलोई ने प्रदेश सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि हरे भरे वृक्षों को काटने से रोका जाए एवं ठेकेदार एवं एमपीआरडीसी के अधिकारियों पर वन सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही प्रभावित किसानों को जमीन बेचकर बाजार मूल्य से चार गुना मुआवजा दिया जाए।
किसान नेता ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसानों की मांगें माने बगैर किसी भी हालत में फैक्ट्री की बहुमूल्य जमीन पर माफिया एवं उद्योगपतियों को कब्जा नहीं करने दिया जाएगा। किसान नेता ने कहा कि सरकार हरे-भरे वृक्षों को काटने वाले अधिकारियों पर जल्द कार्रवाई करे अन्यथा फैक्ट्री परिसर में वृक्षों को बचाने के लिए चिपको आंदोलन चलाएंगे।
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