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मेट्रो चली ही नहीं और विज्ञापन बोर्ड लग गए: एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने पकड़ा बड़ा घोटाला

KHULASA FIRST

संवाददाता

31 मार्च 2026, 5:11 pm
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मेट्रो चली ही नहीं और विज्ञापन बोर्ड लग गए

रेडिसन चौराहा से विजय नगर के बीच मेट्रो पिलरों पर इस तरह से लगा दिए थे विज्ञापन

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में माफिया किस तरह हावी रहते हैं, इसका एक उदाहरण कल देखने को मिला, जबकि एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर विजय नगर चौराहा पहुंचे। उन्होंने रेडिसन चौराहा से विजय नगर के बीच मेट्रो पिलरों पर लगे विज्ञापन देखे तो अधिकारियों से पूछताछ की। पता चला कि इसकी कोई अनुमति नहीं मिली है। अभी ये पिलर नगर निगम के हैंडओवर हुए ही नहीं हैं। इस पर वे जमकर भड़के।

राठौर ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव को जानकारी दी, जिन्होंने भी कहा कि ये गलत है। पिलरों पर विज्ञापन एजेंसियां किसी भी तरह का प्रचार बोर्ड नहीं लगा सकती। उन्होंने निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल को भी जानकारी दी। आज वे इस बारे में पत्र भी लिखेंगे। मार्केट विभाग के अंतर्गत ये विज्ञापन बोर्ड आते हैं, उसके प्रभारी एमआईसी सदस्य राकेश जैन हैं।

उन्हें पता ही नहीं था कि मेट्रो चली ही नहीं और पिलरों पर विज्ञापन बोर्ड आकर लग गए। एजेंसियों ने रातोरात विज्ञापन लगा दिए और अधिकारियों को पता भी नहीं चला। मेट्रो के पिलर जो अभी नगर निगम को हैंडओवर हुए ही नहीं हैं, मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की संपत्ति हैं, उस पर ही विज्ञापन एजेंसियों की नजरें टेढ़ी हो गईं।

किसी से नहीं ली अनुमति
एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर को जब इसका पता चला तो वे कल दोपहर यहां पहुंचे और पाया कि विजय नगर से रेडिसन होटल चौराहा तक करीब 20 से ज्यादा विज्ञापन पिलरों पर चिपका दिए गए हैं, जिनके लिए कोई अनुमति किसी से भी नहीं ली गई है।

उन्होंने बताया कि मेट्रो लाइन एयरपोर्ट से खजराना तक गई है, लेकिन यहां विजयनगर, सयाजी से रेडिसन होटल तक जो शहर का सबसे महंगा कमर्शियल स्थान है, यहां पर मेट्रो लाइन के नीचे ही अवैध तौर पर विज्ञापन के लिए होर्डिंग लगा दिए गए हैं।

मेट्रो लाइन के नीचे मीडियन (डिवाइडर) को मेंटेन करने के लिए मेट्रो कंपनी से निगम को 10 करोड़ मिले हैं। इसी के तहत काम हो रहा है, लेकिन अभी यह पूरा बना भी नहीं है और यहां पर होर्डिंग्स, पोल लगाने शुरू कर दिए हैं, जो सरासर विज्ञापन घोटाला ही है।

पटवारी बोले-हिस्से की लड़ाई... मामले में कल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी कूदे। उन्होंने कहा कि इस विज्ञापन घोटाले से साफ हो गया है कि निगम में भ्रष्टाचार हो रहा है। यह और कुछ नहीं है, हिस्सा बांटने की लड़ाई है। निगम में तो आए दिन कोई न कोई घोटाला होता रहता है।

अधिकारी और जो एडवरटाइजिंग कंपनी पर एफआईआर होना चाहिए
राठौर ने कहा कि रातोरात अधिकारियों से सांठगांठ कर यह होर्डिंग लगा दिए। जब मैंने पूछा कि यह कैसे हुआ तो मार्केट विभाग निगम के राकेश चौहान ने कहा कि यह पुरानी मंजूरी है, जबकि यह तो डिवाइडर पहली बार बन रहा है तो फिर मंजूरी कैसे हो सकती है?

इसके बाद निगमायुक्त से शिकायत की है। यह भ्रष्टाचार का खुला अड्‌डा खोल रखा है। राठौर ने मांग की है कि इसकी जांच होना चाहिए, जो अधिकारी है और जो एडवरटाइजिंग कंपनी है उन पर एफआईआर होना चाहिए। इस कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर देना चाहिए।

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