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हॉस्पिटल में दवाइयों का खेल: महापौर की मौसी के इलाज में लापरवाही; जेनेरिक देकर एथिकल का बिल वसूला, 8 दिन बाद भी नहीं सुधरी मरीज की हालत

KHULASA FIRST

संवाददाता

10 अप्रैल 2026, 1:34 pm
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खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर दवाइयों के खेल का एक गंभीर मामला सामने आया है। प्रमिला हॉस्पिटल पर आरोप है कि मरीज को सस्ती जेनेरिक दवाइयां देकर महंगी एथिकल दवाइयों के नाम पर बिल वसूला जा रहा है। मामला तब और गंभीर हो गया जब यह आरोप शहर के प्रथम नागरिक महापौर के परिवार से जुड़ा निकला।

8 दिन इलाज के बाद भी नहीं मिला आराम
जानकारी के अनुसार, लगभग 80 वर्षीय नंदकुवार शर्मा को 8 दिन पहले प्रमिला हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। दांत के इलाज के बाद उनकी हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन इतने दिनों के इलाज के बावजूद कोई खास सुधार नहीं हुआ।

जांच में खुला दवाइयों का खेल
परिजनों ने जब इलाज और दवाइयों की जांच की, तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। आरोप है कि मरीज को जेनेरिक दवाइयां दी जा रही थीं, जबकि बिल एथिकल (ब्रांडेड) दवाइयों के नाम पर बनाया जा रहा था, जिससे मोटी रकम वसूली जा रही थी।

डॉक्टर और प्रबंधन की चुप्पी
मामले में अस्पताल प्रबंधन की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। आरोप है कि डॉक्टर भरत जैन सहित कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति इस मामले में जवाब देने सामने नहीं आया, जिससे परिजनों में नाराजगी और बढ़ गई है।

पार्षद ने उठाए गंभीर सवाल
पार्षद भरत रघुवंशी ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि मेडिकल स्टोर्स पर दवाइयों में बड़ा खेल चल रहा है। मरीजों को निम्न स्तर की जेनेरिक दवाइयां देकर एथिकल दवाइयों के नाम पर ऊंचे दाम वसूले जा रहे हैं। उन्होंने इस मामले की शिकायत कलेक्टर और सीएमएचओ से करने की बात कही है।

पहले मरीज की सुरक्षा, फिर होगी शिकायत
परिवार ने फिलहाल मरीज को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि सबसे पहले मरीज की जान बचाना प्राथमिकता है, इसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

बड़ा सवाल: आम मरीजों का क्या होता होगा?
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पीड़ित महिला शहर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव की मौसी हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब प्रभावशाली परिवार के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम नागरिकों के साथ अस्पतालों में क्या हो रहा होगा।

प्रशासन पर भी उठे सवाल
सीएमएचओ की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि अस्पताल में चल रही अनियमितताओं के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

प्रमिला हॉस्पिटल का यह मामला निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है और क्या मरीजों को न्याय मिल पाता है या नहीं।

खुलासा फर्स्ट ने पहले भी किया था खुलासा
खुलासा फर्स्ट पहले भी कर चुका है हॉस्पिटल से जुड़े मामलों का खुलासा।

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