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फर्जीवाड़े में नेता प्रतिपक्ष की कार भी शामिल बताई जा रही: गाड़ी अपनी; किराया सरकारी खजाने से वसूला जा रहा

KHULASA FIRST

संवाददाता

24 अप्रैल 2026, 4:44 pm
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फर्जीवाड़े में नेता प्रतिपक्ष की कार भी शामिल बताई जा रही

एमआईसी सदस्य निजी कारें ‘इनोवा’ बताकर पास करा रहे टैक्सी बिल

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा नगर निगम एक बार फिर आरोपों में घिर गया है। शहर को देश का सबसे स्वच्छ शहर बताने वाले सिस्टम पर अब गंभीर आरोप लगे हैं। मामला मेयर इन काउंसिल सदस्यों द्वारा निजी गाड़ियों को ‘इनोवा’ बताकर टैक्सी बिल पास कराने का है, जिसने सियासी पारा चढ़ा दिया है।

आरोप है कि निगम के एमआईसी सदस्य निजी गाड़ियों का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन बिलों में उन्हें महंगी टैक्सी खासकर ‘इनोवा’ दर्शाकर भुगतान लिया जा रहा है। यानी गाड़ी अपनी, लेकिन किराया सरकारी खजाने से वसूला जा रहा है। इसका खुलासा होते ही भ्रष्टाचार के नए मॉडल की चर्चा तेज हो गई है।

कांग्रेस का हमला- 420 का प्रीमियम पैकेज’
कांग्रेस प्रवक्ता अमीनुल सूरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर महापौर पर तंज कसते हुए लिखा कि अब नारा बदलना पड़ेगा-

‘खजाना खाली, पर फर्जीवाड़ा हाई-टेक है!’
उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ निगम पैसे की कमी का रोना रोता है, वहीं दूसरी ओर एमआईसी सदस्य निजी गाड़ियों को इनोवा दिखाकर टैक्सी बिल पास करा रहे हैं। सूरी ने इसे सीधे-सीधे ‘420 का प्रीमियम पैकेज’ करार दिया।

सवालों की बौछार, सिस्टम पर शक

क्या निगम में गाड़ियों का भी ‘मेकओवर’ हो रहा है? क्या हर निजी गाड़ी कागजों में इनोवा बन जाती है? क्या यह खेल ऊपर से नीचे तक सेटिंग के तहत चल रहा है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब छोटी रकम के लिए ऐसा फर्जीवाड़ा हो सकता है, तो बड़े टेंडर और प्रोजेक्ट्स में क्या स्थिति होगी?

फर्जी टैक्सी बिल कांड में नेता प्रतिपक्ष भी घिरे

दिलचस्प बात यह कि इस मुद्दे पर विपक्ष भी पूरी तरह अछूता नहीं है। नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे की गाड़ी का नाम भी कथित फर्जी टैक्सी बिल कांड में सामने आने से मामला और पेचीदा हो गया है। इससे सियासत में सब मिले हुए हैं जैसी चर्चा जोर पकड़ रही है।

साफ शहर की छवि पर दाग

इंदौर देशभर में स्वच्छता के लिए पहचान रखता है, लेकिन अब सवाल सिस्टम की ‘सफाई’ पर उठ रहे हैं। जनता पूछ रही है कि जब अंदर ही अंदर भ्रष्टाचार पनप रहा है, तो इस गंदगी को कौन साफ करेगा?

जवाब नहीं, कार्रवाई चाहिए -यह मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक पैटर्न की ओर इशारा कर रहा है। जनता का गुस्सा साफ है- अब दावे नहीं, भ्रष्टाचार पर ठोस कार्रवाई भी चाहिए।

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