बिक गया कानून: चली गई जान; पुलिस कार्यप्रणाली की परतें उधेड़ती, खुलासा फर्स्ट की खास खबर
KHULASA FIRST
संवाददाता

गांजे के साथ पकड़ाया था एक हत्यारा, पुलिसकर्मियों ने तोड़-बट्टा कर छोड़ा था मामूली केस बनाकर
हीरा नगर थाने से छूटने के पांच दिन बाद बेटे के सामने की थी बाप की हत्या
मुकेश मुवाल 98934-39951 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हीरा नगर के सुरेंद्र साहू हत्याकांड ने कानून व्यवस्था की रीढ़ हिला दी है। आरोप है जिस आरोपी को कुछ दिन पहले भारी मात्रा में गांजे के साथ पकड़ा गया था, उसे कथित तौर पर 50 हजार रुपए के तोड़-बट्टे के बाद हल्की धाराओं में छोड़ दिया गया।
नतीजा ये हुआ कि आरोपी कुछ ही दिनों में नशे में चूर होकर अपने साथियों के साथ एक मासूम के सामने उसके पिता की बेरहमी से हत्या कर देता है। यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सिस्टम की ढील, कथित सौदेबाजी और लापरवाही का खून से लिखा हुआ परिणाम है, जो अपने पीछे कई सवाल छोड़ता है।
19 अप्रैल की शाम इलेक्ट्रॉनिक की दुकान पर काम करने वाले सुरेंद्र साहू निवासी गौरी नगर की उनके बेटे प्रणव उर्फ विभू (10) के सामने ही नशे में धुत छह बदमाशों ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी। दिनदहाड़े हुए सनसनीखेज इस हत्याकांड के बाद परिजन और जनता का गुस्सा भी जमकर फूटा था।
न केवल शव रखकर चक्का जाम किया गया, बल्कि आरोपियों को फांसी देने के साथ उनके घर तोड़े जाने की भी मांग की गई। इतना ही नहीं हाथों में तख्तियां लिए जनता ने हीरा नगर पुलिस पर सबसे बड़ा आरोप यह लगाया कि क्षेत्र में जमकर नशीले पदार्थ बिकते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती।
इसके चलते क्षेत्र में आम जनता का जीना मुहाल है। सड़कों पर नशेड़ियों का राज है। सुरेंद्र साहू हत्याकांड इसी का परिणाम है, जिसके चलते नशेड़ी युवकों ने न केवल दो मासूम बच्चों के सिर से उनके पिता साया छीना, बल्कि उनका भविष्य अधंकार में धकेलते हुए एक सुहागन का सुहाग भी उजाड़ दिया।
हालांकि, पुलिस ने तीन बालिग और तीन नाबालिगों के साथ हत्याकांड में शामिल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें से एक आशीष लाखन राजपूत निवासी पटेल कॉलोनी भी है। खुलासा फर्स्ट जब अपराधियों के बैकग्राउंड की तह तक गया तो एक चौंकाने वाले खुलासा ने पूरा दिमाग ही हिलाकर रख दिया।
खुलासा हुआ कि हत्याकांड में गिरफ्तार एक आरोपी आशीष राजपूत को हत्याकांड से चंद रोज पहले करीब एक किलो गांजे के साथ पकड़ा गया था। हालांकि, थाने में तोड़-बट्टा कर उसे गांजा पीते पकड़े जाने का केस बनाकर छोड़ दिया गया। इसके चंद रोज बाद आशीष ने नशे में साथियों के साथ सुरेंद्र साहू हत्याकांड को अंजाम दे डाला यानी आरोपी जेल में होता तो आज सुरेंद्र साहू अपने परिवार और बच्चों के साथ हंसता-खेलता जीवन बिता रहा होता।
अब कौन देगा इन सवालों के जवाब?
क्या समय पर सख्त कार्रवाई होती तो सुरेंद्र साहू जिंदा होता?
क्या तोड़-बट्टे ने एक अपराधी को मजबूत और कानून को कमजोर कर दिया?
क्या अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी... या फिर मामला ठंडे बस्ते में जाएगा?
50 हजार रुपए में किया तोड़!
सूत्रों के मुताबिक 12 अप्रैल की रात आशीष पिता लाखन राजपूत (19) को हीरा नगर थाने के खुफिया विंग से जुड़े पुलिसकर्मी सौरभ बघेल और अनिल जायसवाल ने करीब एक किलो गांजे के साथ पकड़ा था। उसे थाने ले जाया गया, जहां कथित तौर पर तोड़-बट्टे की महफिल जमी।
बहुत ही विश्वसनीय सूत्रों का कहना है करीब 50 हजार में तोड़ हुआ। चूंकि आशीष राजपूत को थाने लाया जा चुका था। इसके चलते उस पर कुछ तो कार्रवाई करना ही थी। ऐसे में हेड कांस्टेबल मौजूद मालवीय (बैच नं. 3180) के जरिए लिखा-पढ़ी कराई गई और उसे हीरा नगर मेन रोड पर इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स गेट के पास से गांजे से भरी सिगरेट पीते हुए पकड़ना बताया गया।
इस तरह उसके खिलाफ संबंधित धारा 8/27 (अपराध क्रमांक 303/26) की कार्रवाई कर उसे थाने से छोड़ दिया गया। जबकि सबसे दुखद बात यह कि पूछताछ में ही खुलासा हो गया था कि आशीष आपराधिक प्रवृत्ति का है और उस पर पहले से 2-3 केस दर्ज थे। यदि ईमानदारी से कार्रवाई की जाती तो आशीष राजपूत बड़ी मात्रा में पकड़ाए गांजे के साथ पहले से ही जेल में सड़ रहा होता। नतीजा ये हुआ कि पुलिस से मिली ढील की कीमत सुरेंद्र साहू को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
सीपी ने टीआई को लगाई फटकार
चक्काजाम के दौरान सुरेंद्र साहू के परिजन और रहवासियों ने सीधे तौर पर हीरा नगर थाना टीआई सुशील पटेल पर लापरवाही के आरोप लगाए थे। क्षेत्र में नशेड़ियों का आतंक होने, कई स्थानों पर चरस, गांजा और अन्य नशीले पदार्थ बिकने और उनका खुलेआम सेवन होने की बात कही थी।
ये भी कहना था कि टीआई अक्सर अपने केबिन तक सीमित रहते हैं। क्षेत्र में गश्त या जनता से संवाद नहीं करते, जिसके चलते बदमाश बेखौफ है। हत्या इसी का नतीजा है। लोगों के आक्रोश का ये नतीजा रहो कि पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने टीआई सुशील पटेल को तलब किया और कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने नशे के कारोबार पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए, लेकिन थाने के खुफिया वालों की उक्त हरकत ने एक बार फिर थाने का नाम खराब कर दिया।
जांच के बाद होगी सख्त कार्रवाई
आपके माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। यदि ऐसा है तो जांच के बाद जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - राजेश व्यास (डीसीपी जोन-3)
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