वर्दी का रौब या गुंडागर्दी: ट्रैफिक एसआई ने युवक को गाली दी, मारी लात
KHULASA FIRST
संवाददाता
रेडिसन चौराहा; युवक को गालियां और धक्का-मुक्की कर लात मारते एसआई बलरामसिंह तोमर
वर्दी अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी है
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर का ट्रैफिक संभालने और नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी निभाने वाली पुलिस अपने व्यवहार को लेकर सवालों के घेरे में है। सोशल मीडिया पर यातायात एसआई बलरामसिंह तोमर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे युवक को गालियां देते, धक्का-मुक्की करते और लात मारते दिखाई दे रहे हैं।
बताया जा रहा है वीडियो रेडिसन चौराहे का है, जहां उस समय वाहन चेकिंग अभियान चल रही थी। दावा है वीडियो पुराना है, लेकिन इसमें दिख रही भाषा, आक्रामकता और पुलिसिया अंदाज ने पुलिस के बर्ताव को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।
वीडियो वायरल होने पर लोग सवाल उठा रहे हैं क्या ट्रैफिक चेकिंग के नाम पर किसी आम नागरिक को इस तरह अपमानित करना पुलिसिंग का हिस्सा है? और कोई नियम तोड़ भी रहा हो, तो क्या उसे गाली देना, धक्का देना और लात मारना कानूनी तरीका माना जा सकता है? वीडियो में एसआई बलरामसिंह तोमर एक युवक के साथ बहस करते दिखाई दे रहे हैं।
कुछ ही क्षणों में बहस उग्र रूप ले लेती है और वे युवक को गालियां देते और लात मारते नजर आते हैं। मौके पर कुछ अन्य लोग भी हैं, लेकिन वीडियो में साफ महसूस होता है प्रताड़ित युवक पुलिस के सामने पूरी तरह असहज और बेबस है। सबसे ज्यादा सवाल मारपीट से ज्यादा उस भाषा और रवैये पर हैं, जो वर्दी की आड़ में किया गया।
ट्रैफिक चेकिंग के नाम पर कितना अधिकार...शहर में रोज ट्रैफिक चेकिंग होती है। हेलमेट, सीट बेल्ट, दस्तावेज, शराब पीकर वाहन चलाना, ओवरलोडिंग और अन्य नियमों को लेकर कार्रवाई होती है लेकिन इस वीडियो ने यह बहस फिर जिंदा कर दी कानून लागू कराने के नाम पर पुलिस को आखिर कितनी छूट है?
जनता का कहना साफ है कोई नियम तोड़ता है तो चालान काटिए, वाहन जब्त कीजिए, कानूनी कार्रवाई कीजिए… लेकिन क्या सड़क पर उसे गाली देना और लात मारना भी अब ड्यूटी का हिस्सा है?यही वजह है कि वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही लोगों ने इसे वर्दी का दुरुपयोग, सड़क पर सत्ता का प्रदर्शन और आम आदमी के साथ अपमानजनक व्यवहार बताया।
पुराना वीडियो, लेकिन सवाल मौजूं... हालांकि, पुलिस महकमे का दावा है वीडियो पुराना है, लेकिन इससे जुड़े सवाल प्रासंगिक हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यही है वीडियो पुराना है, तो उस समय क्या कोई विभागीय जांच हुई थी? क्या संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण लिया गया था? या मामला उस समय भी रूटीन चेकिंग की आड़ में दबा दिया गया था?
पुलिस एसआई का पद नेतृत्व और अनुशासन का भी पद माना जाता है। ऐसे में किसी अधिकारी स्तर के व्यक्ति का इस तरह का वीडियो सामने आता है, तो असर पूरे विभाग की छवि पर पड़ता है। ट्रैफिक ड्यूटी निश्चित रूप से कठिन है। सड़क पर बहस, दबाव, गर्मी, जाम और नियम तोड़ने वालों से रोज दो-चार होना पड़ता है।
लेकिन इसके बावजूद जनता की अपेक्षा यही है वर्दी का पहली जिम्मेदारी कानून हो, गुस्सा नहीं।यह वायरल क्लिप सिर्फ एक झगड़े का वीडियो नहीं, उस रिश्ते का आईना है, जो पुलिस और आम नागरिक के बीच रोज बन और बिगड़ता है। अगर कानून लागू कराने वाले ही कानून की मर्यादा से बाहर जाने लगें, तो सबसे बड़ा नुकसान जनता के भरोसे को होता है।
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