सात्विकता की प्रेरणा भगवान महावीर से मिलती है, सीएम डॉ. मोहन यादव: महावीर अलंकरण में दिखी समाज की एकजुटता
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
2500 वर्ष प्राचीन जैन धर्म चिर नवीन और प्रासंगिक है। वर्तमान विषम वैश्विक परिस्थिति में महावीर का ‘जीयो और जीने दो’ दर्शन न केवल प्रासंगिक बल्कि अति आवश्यक है। अनेकांत का दर्शन अतीव आवश्यकता है।
जीवन में सात्विकता की प्ररणा हमें जैन धर्म और भगबान महावीर से मिलती है। ये विचार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महावीर अलंकरण समारोह में व्यक्त किए।
दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन एवं श्वेतांबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित महावीर अलंकरण समारोह रविवार को मदनमोहन मेहता ऑडिटोरियम में भव्य रूप से संपन्न हुआ।
पहली बार दोनों समाज एक मंच पर एकत्र हुए और भगवान महावीर के दर्शन पर वृहद संवाद आयोजित किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा दिगंबर और श्वेतांबर जैन समाज का एक मंच पर एकत्र होना स्थानीय स्तर पर सामूहिक कार्यक्रमों को मजबूत करने के साथ-साथ समाज को नई दिशा प्रदान करेगा।
साझा जड़ों जैसे अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह पर आधारित यह एकता जैन धर्म की वैश्विक अपील को बढ़ाती है। सांप्रदायिक विभेदों को दूर कर धार्मिक संवाद को बढ़ावा देना आज की आधुनिक चुनौतियों जैसे वैश्विक युद्धों,पर्यावरण संकट और सामाजिक ध्रुवीकरण का सामना करने में सहायक सिद्ध होगा।
तीन विभूतियों को महावीर अलंकरण
अग्निबाण के संपादक राजेश चेलावत ने कहा स्वयं पर जीत हांसिल करने वाला जैन है। संवाद के पूर्व दोनों समाजों के दो-दो चयनित समाजसेवियों चंदनमल चौरड़िया, हंसराज जैन तथा संतोषकुमार जैन तथा हसमुख जैन को सेवा कार्यों के लिए महावीर अलंकरण अवार्ड प्रदान किए गए। इस अवसर पर मंत्री तुलसी सिलावट, विधायक रमेश मेंदोला, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा उपस्थित रहे।
विचार से बढ़कर है चर्या: कोठारी
आयोजन समिति के अध्यक्ष स्वप्निल कोठारी ने कहा भगवान महावीर ने विचार से बढ़कर चर्या दी। धर्म की मूल भावना है यह जानना हम शरीर नहीं आत्मा हैं। यह बोध होते ही हमारी धार्मिक और आद्यात्मिक यात्रा शुरू हो जाती है।
जो जैनत्व को मानते हैं वे सब जैन हैं, चाहे वे किसी भी धर्म, सम्प्रदाय, जाति के हों। वर्तमान विषम वैश्विक परिस्थिति में भगवान महावीर के विचारों की प्रासंगिकता दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। इसलिए यह कार्यक्रम सामाजिक एकता एवं विश्व बंधुत्व का सच्चा प्रतीक है।
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