युद्ध का असर नौकरियों पर: हजारों फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर; इतने कर्मचारियों को हटाया, बिगड़ते जा रहे हालात
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र पीथमपुर में वैश्विक तनाव का असर अब गहराता जा रहा है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के चलते निर्यात, कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स पर गंभीर प्रभाव पड़ा है, जिससे यहां की करीब 5,600 औद्योगिक इकाइयां संकट के दौर से गुजर रही हैं। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि कई फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं।
उद्योग संचालकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के कारण एक्सपोर्ट लगभग ठप हो गया है। कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और शिपिंग संकट के चलते उत्पादन घटाना मजबूरी बन गया है। पहले जहां तीन शिफ्ट में काम होता था, अब कई इकाइयों में सिर्फ एक शिफ्ट में ही उत्पादन चल रहा है, जबकि कुछ स्थानों पर अस्थायी रूप से काम बंद कर दिया गया है।
इसका सबसे ज्यादा असर मजदूरों पर पड़ा है। अनुमान के मुताबिक, करीब 20 हजार कॉन्ट्रैक्ट वर्करों को काम से हटा दिया गया है। वहीं हजारों स्थायी कर्मचारियों को भी ले-ऑफ पर भेजते हुए आधी सैलरी दी जा रही है। लगभग 30 हजार कर्मचारियों की आय पर सीधा असर पड़ा है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय मजदूरों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। बाहर से आए मजदूरों को अब रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो रहा है। रसोई गैस की कीमत और सप्लाई प्रभावित होने से मजदूरों के लिए 300 रुपए की गैस भरवाना भी भारी पड़ रहा है, क्योंकि उनकी आय में भारी कमी आई है।
वहीं, एक प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करने वाले श्रमिक के अनुसार कच्चे माल की महंगाई के चलते फैक्ट्री में पिछले पांच दिनों से काम बंद है और उन्हें काम से निकाल दिया गया है। महिलाएं फिलहाल कपड़ा फैक्ट्री में पैकिंग का काम कर रही हैं, लेकिन वह भी सीमित समय तक ही उपलब्ध है। इसके बाद गांव लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
उद्योग संगठनों ने सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ऐसे संकट के समय उद्योगों को राहत देने की जरूरत होती है, लेकिन गैस आपूर्ति और लागत नियंत्रण जैसे मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी नीति नहीं बनाई गई, तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पीथमपुर, जिसे मध्य प्रदेश का औद्योगिक इंजन कहा जाता है, ऑटो कंपोनेंट, फार्मा, प्लास्टिक, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सेक्टर की प्रमुख इकाइयों का केंद्र है। यहां के स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) से हर महीने करोड़ों डॉलर का निर्यात होता था। अमेरिका, यूरोप और मध्य-पूर्व के बाजारों में यहां बने उत्पादों की मजबूत पकड़ रही है।
हालांकि, हॉर्मुज स्ट्रेट और स्वेज नहर क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण फ्रेट चार्ज पांच गुना तक बढ़ गए हैं और बीमा प्रीमियम भी काफी महंगे हो गए हैं। ऐसे में निर्यात आधारित उद्योगों की लागत और जोखिम दोनों बढ़ गए हैं, जिससे पूरे औद्योगिक तंत्र पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे और स्थानीय स्तर पर राहत उपाय नहीं किए गए, तो यह संकट न केवल उद्योगों बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी गहरा असर डाल सकता है।
संबंधित समाचार

पीठासीन अधिकारी की जान बचाने वाले जवान सम्मानित:चुनाव ड्यूटी के दौरान आया था हार्ट अटैक

भारतीय किसान संघ ने बिजली की आपूर्ति को लेकर की चर्चा:विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक से की भेंट

व्यापारियों का विवाद बना जानलेवा:मारपीट के बाद बुजुर्ग व्यापारी की मौत; मारे थे लात-घूंसे

लेंसकार्ट शोरूम पर प्रदर्शन करके कर्मचारियों को बिंदी-टीका लगाया:हिंदू कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!