मां गंगा तीरे नर्मदा- शिप्रा की गौरव गाथा: वाराणसी में गूंजेगा भारत के स्वाभिमान सूर्य विक्रमादित्य का वैभव
KHULASA FIRST
संवाददाता

प्रधानमंत्री की काशी में एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन आज, सीएम बनारस रवाना
मोहन सरकार की अभिनव पहल, एमपी-यूपी की नई जुगलबंदी का शुरू हुआ नया दौर
सीएम काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का अध्ययन-भ्रमण करेंगे, तीर्थ प्रबंधन का करेंगे अवलोकन
दोनों राज्यों की औद्योगिक क्षमताओं, कृषि, निवेश व पर्यटन के क्षेत्र में लगेंगे नए पंख, एमओयू भी होगा
3 से 5 अप्रैल तक बनारस में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये गाई जाएगी मध्य प्रदेश की गाथा, महानाट्य का होगा मंचन
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भोलेबाबा की नगरी काशी मंगलवार से मध्य प्रदेश की गौरवगाथा की साक्षी बनेगी। मां गंगा के तट पर 5 अप्रैल तक माई नर्मदा व शिप्रा का गुणगान गूंजेगा। पहला दिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम रहेगा। मंगलवार को वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय शहर वाराणसी के लिए रवाना हो गए।
मुख्यमंत्री की उपस्थिति में काशी में एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन होगा। इस सम्मेलन के जरिए दोनों राज्यों के बीच न सिर्फ कारोबारी संबंध, बल्कि धर्म व पर्यटन के क्षेत्र में भी विकास के नए आयाम स्थापित होंगे। सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर मुख्यमंत्री की इस अनूठी पहल पर सबकी नजरें हैं।
दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी काशी का नाता महाकाल की नगरी अवंतिकापुरी यानी उज्जैन से सनातनी है, लेकिन अब मुख्यमंत्री अपनी यात्रा के जरिये इस नाते को न सिर्फ नए आयाम देंगे, बल्कि परस्पर विकास की संभावनाओं को नए पंख भी देंगे। एक तरफ पुण्य सलिला मां गंगा का तट होगा तो दूसरी तरफ मां नर्मदा व शिप्रा का प्रतिनिधित्व करते मध्य प्रदेश की मोहन सरकार होगी।
संबंधों की प्रगाढ़ता को मजबूती देगा एक महानाट्य भी। ये महानाट्य भारत का स्वाभिमान कहे जाने वाले सूर्य विक्रमादित्य सम्राट पर आधारित होगा। देश व दुनिया को विक्रम संवत् देने वाले इस महाप्रतापी सम्राट का नाता उसी उज्जयिनी नगरी से है, जहां के हमारे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हैं।
मु ख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार को वाराणसी में होने वाले एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026 में शामिल होकर दोनों राज्यों के बीच निवेश, उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा देंगे। इस दौरान वे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भ्रमण और विभिन्न सहयोग परियोजनाओं का अवलोकन भी करेंगे।
मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश और उत्तरप्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, पारंपरिक शिल्प, ओडीओपी और जीआई टैग उत्पादों, कृषि एवं खाद्य उत्पादों, निवेश अवसरों और पर्यटन संभावनाओं को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करेंगे। इस सम्मेलन में दोनों राज्यों के बीच उत्पादन, बाजार तथा पहचान से जुड़े विभिन्न आयामों पर केंद्रित संवाद स्थापित होगा। सम्मेलन में उद्योग, शिल्प, निवेश और पर्यटन से जुड़े हितधारक एकत्रित होंगे।
उज्जैन का सांस्कृतिक अभियान पहुंचा काशी... मध्य प्रदेश सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में विक्रमोत्सव-2026 के तहत 3 से 5 अप्रैल 2026 तक वाराणसी में ‘महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य’ का भव्य मंचन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहल और दूरदर्शिता के चलते उज्जैन से शुरू हुआ यह सांस्कृतिक अभियान अब काशी तक पहुंच रहा है। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक एवं मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी ने बताया कि यह आयोजन दो महान आध्यात्मिक नगरों उज्जैन और वाराणसी के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य करेगा।
शिल्पकारों के लिए गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर... जॉइंट आर्टिजन वर्कशॉप में चंदेरी और महेश्वरी शिल्पकार बनारसी सिल्क कारीगरों के साथ मिलकर साझा ब्रांडिंग, बाजार विस्तार और ‘गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर’ की अवधारणा को आगे बढ़ाएंगे। यह पहल पारंपरिक शिल्प को आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने और शिल्पकारों को प्रत्यक्ष बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। इससे न केवल हस्तशिल्प को नई पहचान मिलेगी, बल्कि कारीगरों की आय और आजीविका के अवसर भी सुदृढ़ होंगे।
धार्मिक पर्यटन के लिए काशी-उज्जैन-चित्रकूट सर्किट... टूरिज्म राउंड टेबल में काशी-उज्जैन-चित्रकूट धार्मिक पर्यटन सर्किट को संयुक्त पर्यटन उत्पाद के रूप में विकसित करने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। इस पहल में टूर ऑपरेटर्स और आईआरसीटीसी जैसे प्रमुख हितधारकों की सहभागिता से एक संरचित और समन्वित पर्यटन मॉडल विकसित करने पर जोर रहेगा। इससे धार्मिक पर्यटन को अधिक व्यवस्थित, सुगम और आकर्षक बनाया जा सकेगा, जिससे दोनों राज्यों में पर्यटकों की संख्या और ठहराव अवधि में वृद्धि होगी।
उद्योग व शिल्पकारों को मिलेगा साझा संवाद मंच... यह सम्मेलन उद्योग जगत, निवेशकों, शिल्पकारों, कृषि एवं फूड उत्पादकों और नीति-निर्माताओं को एक व्यापक और समावेशी मंच प्रदान करेगा, जहां वे नीतिगत प्रोत्साहनों, अधोसंरचना विकास, लॉजिस्टिक सपोर्ट और निवेश अवसरों पर गहन चर्चा करेंगे।
वस्त्र, हस्तशिल्प, एमएसएमई, खाद्य प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन जैसे विविध क्षेत्रों की सहभागिता इस आयोजन को बहु आयामी बनाएगी। इससे उद्योग-सरकार समन्वय को मजबूती मिलेगी और निवेश निर्णयों को गति प्रदान करने वाला वातावरण तैयार होगा।
सीएम ने एक्स पर पोस्ट कर दी जानकारी...आज वाराणसी में आयोजित एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026 में सहभागिता करूंगा। यह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, पारंपरिक शिल्प, ओडीओपी और जीआई टैग उत्पादों, कृषि एवं खाद्य उत्पादों, निवेश अवसरों और पर्यटन संभावनाओं की दृष्टि से विशेष अवसर होगा।
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