खबर
Top News

मुख्यमंत्री की नहीं सुनी वित्त आयोग ने: 16वें वित्त आयोग के नए नियम सरकार के लिए मुसीबत बने

KHULASA FIRST

संवाददाता

21 अप्रैल 2026, 1:52 pm
शेयर करें:
मुख्यमंत्री की नहीं सुनी वित्त आयोग ने

खाली हाथ आए थे, खाली हाथ हैं, आगे क्या होगा नहीं मालूम

डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
करीब 380 दिन पहले (4 से 7 मार्च 2025) भोपाल में 16वें वित्त आयोग का गाजे-बाजे के साथ भव्य स्वागत-सत्कार किया गया था। आयोग के कदमों में सरकार बिछी हुई नजर आई थी। जैसे आयोग न होकर भगवान हो। हमेशा की तरह मीडिया, पसंदीदा इंडस्ट्री वाले अर्थशास्त्री, तथाकथित प्रबुद्ध नागरिक और जो-जो भी आयोग के लायक समझे गए, उन सबको सरकार ने जोता था।

डॉ. मोहन यादव सरकार के टॉप आईएएस ऑफिसर और प्रमुख सचिवों ने भारी-भरकम प्रेजेंटेशन दिए थे। इसलिए कि केंद्र से मिलने वाली करों की हिस्सेदारी 41 से बढ़कर 48% हो जाए। सरकार को जब चाहे, जितना चाहे केंद्र से पैसा मिल जाए। ऐसा होना स्वाभाविक भी है, जब जेब खाली हो।

सरकार को लग रहा था कि वित्त आयोग केंद्रीय धन से मालामाल करवा देगा। आयोग के अध्यक्ष को मीडिया ने या मीडिया के माध्यम से सरकार ने कुबेर के तुल्य महिमामंडित कराया, ऐसा प्रतीत होता रहा। आयोग के लिए रेड कारपेट वेलकम किया गया। स्वर्ग जैसी सुख-सुविधा न्योछावर कर दी।

इस सब का परिणाम कितना सुखद रहा यह 1 अप्रैल से लघु वित्त आयोग की सिफारिश से स्पष्ट हो गया है। मध्य प्रदेश को निराशा हाथ लगी। जो-जो मांगा था, वह नहीं मिला। वित्त आयोग किसी भी सरकार के चाले में नहीं आया। केंद्रीय वित्त आयोग ने राज्यों के लिए केंद्र सरकार से मदद पाने के परंपरागत तौर तरीकों को पूरी तरह से खारिज करते हुए नई लाइन खींच दी है।

मप्र सरकार के सारे तर्क धरे के धरे रह गए। आयोग की लागू की गई सिफारिश से प्रदेश का किस तरह से नफा-नुकसान होगा, इस बारे में नीतिगत ज्ञान रखने वाले लोगों से बात की।

16वें वित्त आयोग के नए नियम मप्र के लिए आर्थिक रूप से कितने नुकसानदेह साबित हो सकते हैं, इस सवाल पर उद्योगों के प्रतिनिधि और आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. गौतम कोठारी कहते हैं कि अब राज्यों के सामने मुख्य समस्या वित्तीय आवश्यकता बनाम आर्थिक प्रदर्शन की हो गई है।

भारत के संविधान के तहत वित्त आयोग का काम अमीर और गरीब राज्यों के बीच की खाई को पाटना था, लेकिन 16वें वित्त आयोग ने अपनी नीति बदल दी है। पीथमपुर औद्योगिक संगठन के साथ भी आयोग की महत्वपूर्ण बैठक करवाई गई थी। उद्योगों ने आयोग को लंबा-चौड़ा ज्ञापन दिया था, लेकिन कोई बात नहीं मांनी।

अब धन का वितरण वित्तीय जरूरत (गरीबी दूर करने) के बजाय आर्थिक प्रदर्शन (जीडीपी में योगदान) के आधार पर किया जा रहा है। इसका सीधा मतलब है कि जो राज्य पहले से अमीर और औद्योगिक रूप से विकसित हैं (जैसे तमिलनाडु, कर्नाटक), उन्हें अधिक पैसा मिलेगा। वहीं मप्र जैसे राज्य, जो कृषि पर निर्भर हैं, उन्हें कम धन मिलेगा।

डॉ. कोठारी कहते हैं कि मप्र इन नए नियमों का सबसे बड़ा शिकार बनेगा। मप्र के साथ परिस्थितियां अलग हैं। उल्लेखनीय है मप्र का क्षेत्रफल बड़ा है और आबादी बिखरी हुई है, जिससे यहां बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना महंगा है। नए नियमों में क्षेत्रफल के महत्व को कम कर दिया गया है। जनसांख्यिकी भी बड़ा कारण है।

राज्य में एक बड़ी आदिवासी आबादी है, जिसके कल्याण के लिए विशेष धन की आवश्यकता है, लेकिन नए नियम इसे नजरअंदाज करते हैं। महाराष्ट्र जैसे राज्यों के पास बड़े टेक हब और फैक्ट्रियां हैं, जबकि मप्र मुख्य रूप से खेती पर निर्भर है। इसलिए वह आर्थिक योगदान की दौड़ में पीछे रह जाता है।

सरकार के हाथ निराशा लगी
16वें केंद्रीय वित्त आयोग के साथ डॉ. मोहन यादव ने लंबी चर्चा की थी, ताकि केंद्र से किसी तरह ज्यादा पैसा मिले। उन्होंने कहा था कि बड़ा राज्य है, जरूरतें ज्यादा की हैं और केंद्र के सहयोग से ही प्रदेश का विकास संभव है।

आयोग के समक्ष सरकार ने राज्य के कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास करने का दावा भी किया था। उन्होंने वित्त आयोग से केंद्र करों में राज्य की हिस्सेदारी 41% से बढ़ाकर 48% करने का अनुरोध किया था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

डॉ. यादव ने कहा था कि केंद्र से ज्यादा वित्तीय मदद मिलने पर राज्य का विकास तेजी से होगा। राज्य कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, पर्यटन और उद्योग जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इन क्षेत्रों में और विकास के लिए केंद्र सरकार से मजबूत वित्तीय सहायता जरूरी है, लेकिन ऐसा कुछ भी आयोग ने नहीं किया, जो सरकार चाहती थी। यानी सरकार के प्रयासों पर पानी फिर गया। अब सरकार के समक्ष और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई।

हिस्सेदारी में गिरावट
राष्ट्रीय करों/टैक्स में मप्र की हिस्सेदारी 7.85% से घटकर 7.35% रह गई है।

वित्तीय घाटा
डॉ. कोठारी के अनुसार इस छोटे से बदलाव के कारण राज्य को हर साल लगभग 1,535 करोड़ और अगले पांच वर्षों में कुल 7,677 करोड़ का नुकसान होगा।

विकास पर असर
यह राशि 500 किमी ग्रामीण सड़कों के निर्माण या 150 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के पूरे साल के खर्च के बराबर है।

योजनाओं पर संकट
मप्र ने बुनियादी ढांचे (सड़कें, सिंचाई, नदी जोड़ो परियोजनाएं) पर 1 लाख करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बनाई है। केंद्र से मिलने वाले फंड में कटौती और कर्ज लेने की सख्त सीमाओं के कारण राज्य की ये महत्वपूर्ण परियोजनाएं रुक सकती हैं।

संबंधित समाचार

आधी रात को पीएम मोदी का बड़ा संदेश
Top News

आधी रात को पीएम मोदी का बड़ा संदेश:बोले- पेपर लीक पर अब और होगी सख्ती; शुक्रवार की कैबिनेट बैठक में होंगे बड़े फैसले

about 2 hours ago
प्रधानमंत्री  मोदी के ऐलान पर बड़ा एक्शन
Top News

प्रधानमंत्री मोदी के ऐलान पर बड़ा एक्शन:पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्पेशल जज नियुक्त; दोषियों पर होगी त्वरित कार्रवाई

about 3 hours ago
नीट विवाद पर बन सकती है सहमति
Top News

नीट विवाद पर बन सकती है सहमति:सरकार से बातचीत को तैयार हुई सीजेपी; आज मंत्रियों से होगी अहम बैठक

about 3 hours ago
छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला
Top News

छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला:उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी हटाए गए; नरेश पाल गंगवार को मिली जिम्मेदारी

about 3 hours ago
पुलिस में बंपर भर्ती
Top News

पुलिस में बंपर भर्ती:इतने पदों को मिली मंजूरी; जल्द होगी भर्ती प्रक्रिया शुरू

about 4 hours ago
उपचुनाव में भाजपा ने झोंकी पूरी ताकत
Top News

उपचुनाव में भाजपा ने झोंकी पूरी ताकत:छह मंत्री डटे; 25 जुलाई से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव संभालेंगे मोर्चा

about 4 hours ago
कुबेरेश्वरधाम में उमड़ा आस्था का महासैलाब
Top News

कुबेरेश्वरधाम में उमड़ा आस्था का महासैलाब:कथा शुरू होने से पहले ही पंडाल हाउसफुल, लाखों श्रद्धालु पहुंचे

about 4 hours ago
तीन सगी बहनों ने एक ही युवक से की शादी
Top News

तीन सगी बहनों ने एक ही युवक से की शादी:वायरल वीडियो पर आया नया मोड़; बोले- 'यह रील नहीं, हकीकत है'

about 4 hours ago
जिला अस्पताल में बड़ा खेल
Top News

जिला अस्पताल में बड़ा खेल:सलाइन की जगह मिनरल वाटर की ड्रिप चढ़ाई, सीएमएचओ ने कलेक्टर को सौंपी जांच रिपोर्ट

about 5 hours ago
70 करोड़ के एमडी ड्रग्स रैकेट पर ईडी की बड़ी कार्रवाई
Top News

70 करोड़ के एमडी ड्रग्स रैकेट पर ईडी की बड़ी कार्रवाई:मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार

about 5 hours ago
देखिये वीडियो, ओंकारेश्वर मंदिर में हंगामा
Top News

देखिये वीडियो, ओंकारेश्वर मंदिर में हंगामा:गर्भगृह में श्रद्धालुओं से बदसलूकी और मारपीट का आरोप

about 6 hours ago
पेपर लीक के विरोध में राहुल गांधी का मार्च
Top News

पेपर लीक के विरोध में राहुल गांधी का मार्च:विपक्षी दलों संग गांधी स्मृति तक निकाली पदयात्रा; छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ जताया विरोध

about 6 hours ago
एयरपोर्ट पर 20 मिनट की 'सियासी गुफ्तगू'
Top News

एयरपोर्ट पर 20 मिनट की 'सियासी गुफ्तगू':सीएम मोहन से दिग्विजय की कानाफूसी; बोले- 'तुलसी का टिकट कटेगा'

about 6 hours ago
15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास
Top News

15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास:टी-20 के सबसे युवा हाफ सेंचुरियन बने; भारत ने जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराया

about 7 hours ago
समस्याओं को प्रखरता से उठाता है खुलासा फर्स्ट
Top News

समस्याओं को प्रखरता से उठाता है खुलासा फर्स्ट

about 7 hours ago
मन्नत से लौट रहे परिवार पर हमला
Top News

मन्नत से लौट रहे परिवार पर हमला:साइड देने को कहा तो भड़के कार सवार; भाजपा नेता के रिश्तेदारों पर एफआईआर, फॉर्च्यूनर जब्त

about 7 hours ago
शहीद जवान, अक्षुण्ण आस्था अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में सेंध
Top News

शहीद जवान, अक्षुण्ण आस्था अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में सेंध:आतंकी साया ड्यूटी पर तैनात J&K पुलिसकर्मी की गोली मारकर हत्या, विदेशी TRF आतंकी पर शक...

about 7 hours ago
राहुल के 'सड़क से संसद' वाले आक्रामक तेवरों के क्या निहितार्थ
Top News

राहुल के 'सड़क से संसद' वाले आक्रामक तेवरों के क्या निहितार्थ:छात्र असंतोष का राजनीतिकरण, अवसर का लाभ, हाईजैक का खतरा या व्यवस्था परिवर्तन की छटपटाहट

about 7 hours ago
लड़कों को रात 10 बजे तक एंट्री, हमें 8 बजे क्यों
Top News

लड़कों को रात 10 बजे तक एंट्री, हमें 8 बजे क्यों:गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं ने सीएम हेल्पलाइन पर की भेदभाव की शिकायत

about 7 hours ago
कनक स्मार्ट सिटी के भ्रष्ट कॉलोनाइजर ने पार्षद से मिलकर तुड़वा दी 40 दुकानें
Top News

कनक स्मार्ट सिटी के भ्रष्ट कॉलोनाइजर ने पार्षद से मिलकर तुड़वा दी 40 दुकानें:एक दिन पूर्व रात्रि में नोटिस दिया, अगले दिन कार्रवाई

about 7 hours ago

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!