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प्रतिष्ठित कॉलेज के चुनाव की सरगर्मी: बड़ा बदलाव, ओडीए का ‘वोट अधिकार’ खत्म, नए संविधान पर मुहर के बाद बढ़ा विवाद

KHULASA FIRST

संवाददाता

28 अप्रैल 2026, 11:00 am
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प्रतिष्ठित कॉलेज के चुनाव की सरगर्मी

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
डेली कॉलेज के चुनाव इस बार पूरी तरह नए नियमों के तहत होंगे और सबसे बड़ा असर ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन (ओडीए) पर पड़ा है। संशोधित संविधान को फर्म एंड सोसायटी से अंतिम मंजूरी मिलते ही अब चुनावी गणित बदल गया है और इसी के साथ विवाद भी तेज हो गया है।

नई व्यवस्था के मुताबिक अब चुनाव सिर्फ दो श्रेणियों ‘ओल्ड डोनर (2B1)’ और ‘न्यू डोनर (2B2)’ तक सीमित कर दिए गए हैं। पहले जहां ओडीए (कैटेगरी 2C) से भी चुनाव के जरिए दो प्रतिनिधि बोर्ड में पहुंचते थे, वहीं अब इस प्रक्रिया को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

सीधे बोर्ड में एंट्री, लेकिन बिना चुनाव
नए नियमों के तहत अब ओडीए के अध्यक्ष और सचिव स्वतः बोर्ड सदस्य होंगे। यानी प्रतिनिधित्व तो रहेगा, लेकिन चुनावी प्रक्रिया खत्म हो गई है। इसके अलावा, एक छात्र को भी बोर्ड में शामिल किया जाएगा, पर उसका चयन चुनाव से नहीं बल्कि चयन प्रक्रिया से होगा।

प्रबंधन का तर्क: सिस्टम होगा आसान
कॉलेज प्रबंधन इस बदलाव को ‘प्रशासनिक सुधार’ बता रहा है। उनका कहना है कि इससे बार-बार चुनाव कराने की जटिलता खत्म होगी और ओडीए पदाधिकारी सीधे बोर्ड में रहकर पूर्व छात्रों की बात प्रभावी तरीके से रख सकेंगे।

ओडीए में बगावत: “लोकतंत्र खत्म किया जा रहा”
दूसरी ओर, ओडीए के भीतर ही विरोध खुलकर सामने आ गया है। एक गुट का आरोप है कि यह संशोधन संगठन के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करता है और सदस्यों से उनका वोट का अधिकार छीनता है।

टाइमिंग पर भी सवाल, कानूनी लड़ाई के संकेत
विरोधियों ने प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 21 अप्रैल को जब चुनाव कार्यक्रम घोषित हुआ, तब पुराना संविधान लागू था। ऐसे में 23 अप्रैल को मिले नए संविधान को बीच प्रक्रिया में लागू करना नियमों के खिलाफ है। यही मुद्दा अब कोर्ट तक जा सकता है।

ये है पूरा चुनाव शेड्यूल
28-29 अप्रैल: नामांकन
4-19 मई: पोस्टल बैलेट जारी
20 मई: बैलेट जमा करने की अंतिम तारीख
21 मई: मतदान और उसी दिन मतगणना

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