न्यू डोनर श्रेणी में हरपाल सिंह भाटिया ‘मोनू’ 124 वोटों से जीते: डेली कॉलेज बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की नई संरचना पूरी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
डेली कॉलेज सोसायटी के बहुप्रतीक्षित बोर्ड ऑफ गवर्नर्स चुनाव के बाद अब नई बोर्ड संरचना स्पष्ट हो गई है। लंबे समय से चल रहे विवादों, आरोपों और भ्रम की स्थिति के बीच संपन्न हुए इस चुनाव को कॉलेज की संस्थागत स्थिरता, गरिमा और भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
चुनाव परिणामों और शासन द्वारा नामांकित सदस्यों की घोषणा के बाद अब कॉलेज में एक ऐसा बोर्ड आकार ले चुका है, जिसे संस्था को पुनः सकारात्मक दिशा, अनुशासन, सुशासन और शैक्षणिक उत्कृष्टता की ओर ले जाने वाला बोर्ड माना जा रहा है।
निर्णय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर जोर
नए बोर्ड के केंद्र में महाराजा विक्रम सिंह पवार का नेतृत्व रहेगा, जिन्होंने पिछले कुछ समय में लगातार यह स्पष्ट किया था कि डेली कॉलेज केवल एक संस्था नहीं, बल्कि 155 वर्षों की जीवंत विरासत है, जिसकी प्रतिष्ठा और मूल्यों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
बोर्ड से जुड़े लोगों का मानना है कि आने वाले समय में संस्था में निर्णय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। चुनाव में न्यू डोनर श्रेणी 2(b)(ii) के अंतर्गत हरपाल सिंह भाटिया ‘मोनू’ ने स्पष्ट बहुमत के साथ जीत दर्ज की।
उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राजेश अग्रवाल को 124 वोटों से पराजित किया। कुल 688 मतदाताओं में से 594 वोट पड़े, जिनमें 130 बैलेट पेपर के माध्यम से प्राप्त हुए, जबकि 470 मतदाताओं ने कॉलेज परिसर पहुंचकर मतदान किया।
भाटिया को 357 वोट मिले, जबकि अग्रवाल को 233 मत प्राप्त हुए। चुनाव प्रक्रिया पूर्व न्यायाधीश और नियुक्त चुनाव अधिकारी न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की निगरानी में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। पुराने दानदाता वर्ग 2(b)(i) के अंतर्गत महाराजा विक्रम सिंह पवार तथा राजा प्रियव्रत सिंह खींची पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे।
चुनाव के बाद अब बोर्ड की विस्तृत संरचना में ओल्ड डेलियन एसोसिएशन की ओर से उपाध्यक्ष नवनीत बागड़ी और मीडिया प्रभारी नीलेश अग्रवाल को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
वहीं, ओडीए के ‘स्पेशल रिकग्निशन’ वर्ग से निपुण अग्रवाल को तीसरे प्रतिनिधि सदस्य के रूप में नामित किया गया है। अभिभावक प्रतिनिधियों के रूप में करण नरसरिया और संजय पाहवा को शामिल किया गया है।
बोर्ड में 10 सदस्य होंगे
नए संशोधित संविधान के अनुसार इस बार बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में कुल 10 सदस्य होंगे। बोर्ड की यह नई संरचना अब लगभग पूर्ण मानी जा रही है और इसे डेली कॉलेज के प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जा रहा है।
राज्य शासन ने की दो प्रतिनिधियों की नियुक्ति
इसी क्रम में राज्य शासन द्वारा भी डेली कॉलेज बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के लिए अपने दो प्रतिनिधियों की नियुक्ति कर दी गई है। शासन की ओर से सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश सुभाष राव काकड़े तथा अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी को डेली कॉलेज इंदौर के लिए राज्य शासन के प्रतिनिधि के रूप में नामांकित किया गया है।
शिक्षा, प्रशासन और विधिक क्षेत्र के अनुभवी व्यक्तित्वों के बोर्ड में शामिल होने को संस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे बोर्ड की निर्णय क्षमता, प्रशासनिक मजबूती और संस्थागत पारदर्शिता को और बल मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मतदाताओं ने स्थिर नेतृत्व और संस्थागत दृष्टिकोण को दी प्राथमिकता
कॉलेज से जुड़े कई वरिष्ठ ओल्ड डेलियंस और अभिभावकों का मानना है कि यह परिणाम केवल चुनावी जीत नहीं, बल्कि संस्था की गरिमा और स्थिरता के पक्ष में दिया गया स्पष्ट संदेश है।
पिछले कुछ महीनों में जिस प्रकार सोशल मीडिया अभियानों, कानूनी विवादों और सार्वजनिक आरोपों के माध्यम से संस्था की छवि प्रभावित करने का प्रयास किया गया, उसके बाद मतदाताओं ने स्पष्ट रूप से स्थिर नेतृत्व और संस्थागत दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी है।
हरपाल सिंह भाटिया ने परिणाम आने के बाद कहा कि यह जीत किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि डेली कॉलेज की प्रतिष्ठा, अनुशासन और सकारात्मक भविष्य की जीत है। उन्होंने कहा कि अब समय विवादों से आगे बढ़कर संस्था के विकास, विद्यार्थियों के हित, शैक्षणिक वातावरण और डेली कॉलेज की वैश्विक प्रतिष्ठा को और मजबूत करने का है।
चुनाव परिणामों के बाद डेली कॉलेज परिसर और समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। कई ओल्ड डेलियन्स ने इसे ‘डेली कॉलेज की विरासत की पुनर्स्थापना’ बताते हुए कहा कि संस्था अब नकारात्मकता और टकराव के दौर से निकलकर एक अधिक रचनात्मक, संतुलित और प्रगतिशील दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।
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