कमीशनखोर डॉक्टर जैन दंपति का साम्राज्य: अवैध हॉस्पिटल निर्माण पर निगम की चुप्पी; आखिर किसकी मेहरबानी
KHULASA FIRST
संवाददाता

आवासीय नक्शे की आड़ में खड़ा हो रहा अवैध
निर्माण, कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
द्रविड़ नगर जोन क्रमांक 15, वार्ड 83 में एक ऐसे मामले का खुलासा हुआ है, जो न केवल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में फैले कथित कमीशनखोरी के गहरे खेल का खुलासा करता है। आवासीय नक्शे की आड़ में अवैध हॉस्पिटल निर्माण, नियमों की खुलेआम धज्जियां और जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी, पूरा मामला प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता नजर आ रहा है।
प्लाट नंबर 16 पर शंकरलाल पिता पन्नालाल गुप्ता के नाम से 31 मार्च 2023 को आवासीय भवन का नक्शा स्वीकृत किया गया था। इस स्वीकृति में भूतल सहित चार मंजिला आवासीय इमारत का निर्माण प्रस्तावित था।
लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। मौके पर एक अवैध हॉस्पिटल का निर्माण तेजी से जारी है। यह वही मामला है, जिसका खुलासा पहले भी किया जा चुका था, और तत्कालीन भवन अधिकारी द्वारा कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया था। इसके बावजूद एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी निगम की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्रमिला हॉस्पिटल से जुड़ा अवैध निर्माण - यह अवैध निर्माण कथित तौर पर प्रमिला हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर के डॉ. भरत जैन और डॉ. मून जैन से जुड़ा हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह निर्माण उनके पहले से संचालित हॉस्पिटल के ठीक पीछे किया जा रहा है, जिससे दोनों परिसरों के बीच अवैध कनेक्टिविटी भी तैयार की जा रही है।
नक्शे से ज्यादा मंजिलें, अवैध तलघर भी तैयार- स्वीकृत नक्शे में जहां केवल चार मंजिल की अनुमति दी गई थी, वहीं मौके पर चार से अधिक मंजिलों का निर्माण किया जा चुका है। इतना ही नहीं, एक अवैध तलघर (बेसमेंट) भी तैयार किया गया है, जो पूरी तरह नियमों के विपरीत है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि निर्माण कार्य योजनाबद्ध तरीके से नियमों की अनदेखी कर किया जा रहा है।
अवैध रास्ते से हॉस्पिटल संचालन की तैयारी- निर्माणाधीन बिल्डिंग में एक अवैध रास्ता भी बनाया गया है, जिससे इसे वर्तमान संचालित हॉस्पिटल से जोड़ा जा सके। इसका सीधा उद्देश्य बिना अनुमति के अस्पताल की गतिविधियों को विस्तार देना बताया जा रहा है, जो पूरी तरह नियमों के खिलाफ है।
‘सपनों को हकीकत’ में बदलने वाली कंपनी पर उठ रहे सवाल
इस पूरे अवैध निर्माण को अंजाम देने में एमबी कंस्ट्रक्शन कंपनी की भूमिका सामने आई है, जिसकी टैगलाइन ‘है…‘हम सपनों को हकीकत में बदलते हैं।’ लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या अवैध निर्माण भी अब ‘सपनों’ का हिस्सा बन गया है? नगर निगम अब तक इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं कर पाई, यह भी जांच का विषय है।
मौके पर फार्मासिस्ट गायब, कर्मचारियों की मनमानी
घटना के दौरान पंजीकृत फार्मासिस्ट मोहम्मद अनस अंसारी मौके पर अनुपस्थित पाए गए। वहीं मौजूद कर्मचारियों द्वारा पीड़ित परिवार के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया और मनमाने दामों पर दवाइयां बेचने की बात सामने आई। कर्मचारियों का यह तक कहना था कि हॉस्पिटल में करोड़ों रुपये ‘पगड़ी’ के रूप में निवेश किए गए हैं, इसलिए कीमतें भी उसी हिसाब से तय की जाती हैं।
नियमों की अनदेखी, जिम्मेदार विभाग मौन
हॉस्पिटल संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और जिला प्रशासन से कई अनिवार्य अनुमतियां आवश्यक होती हैं। लेकिन यहां बिना पूर्ण स्वीकृतियों के ही निर्माण और संचालन की तैयारी चल रही है। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर अवैध निर्माणों को किसके संरक्षण में वैधता का आवरण दिया जा रहा है?
हाई कोर्ट में याचिका, फिर भी नहीं कार्रवाई
मामले को लेकर मेडिकल जांच और दवाइयों की कीमतों में भारी अंतर को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की जा चुकी है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता यह संकेत देती है कि या तो इच्छाशक्ति की कमी है या फिर दबाव में काम किया जा रहा है।
खाद्य एवं औषधि विभाग भी सवालों के घेरे में
इतनी गंभीर अनियमितताओं और संभावित गड़बड़ियों के बावजूद खाद्य एवं औषधि विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यह स्थिति विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। पूरा मामला केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक उदासीनता, संभावित मिलीभगत और स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त अनियमितताओं का बड़ा उदाहरण बन चुका है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं या फिर यह अवैध साम्राज्य यूं ही फलता-फूलता रहेगा।
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