विज्ञापन माफिया का साम्राज्य ध्वस्त: मंत्री के निर्देश पर जागा निगम प्रशासन; विजय नगर में अवैध यूनिपोल के सिंडिकेट पर बड़ी कार्रवाई
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में नियम-कायदों को ताक पर रखकर फल-फूल रहे विज्ञापन माफिया के खिलाफ ‘खुलासा फर्स्ट' की मुहिम का बड़ा असर हुआ है। महीनों से चल रहे यूनिपोल घोटाले की परतों का जब अखबार ने प्रमुखता से खुलासा किया, तो शासन-प्रशासन हरकत में आ गया।
इसी का परिणाम है कि नगर निगम की टीम ने भारी लाव-लश्कर के साथ विजय नगर से बापट चौराहे तक अवैध विज्ञापनों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। मेट्रो पिलरों और प्रमुख मार्गों के बीच अवैध रूप से सीना ताने खड़े 20 से ज्यादा यूनिपोल और कियोस्क को निगम के अमले ने क्रेन और कटर की मदद से काटकर जमीन पर लिटा दिया।
यह पूरी कार्रवाई कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के निर्देशों और एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर की सक्रियता के बाद की गई है।
खुलासा फर्स्ट ने लगातार प्रमाणों के साथ दिखाया आईना- जांच में यह सच सामने आया कि दीपक एडवरटाइजिंग नामक फर्म का अनुबंध साल 2019 में ही खत्म हो गया था, लेकिन निगम के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के संरक्षण में माफिया दीपक जेठवानी ने शहर की सड़कों को अपनी जागीर बना लिया था।
खुलासा फर्स्ट ने लगातार प्रमाणों के साथ प्रकाशित किया था कि कैसे करोड़ों रुपये के राजस्व की चोरी कर बिना अनुमति के ये ढांचे खड़े किए गए। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने मामले में वित्तीय अनियमितता और नियमों के उल्लंघन को सही पाते हुए तत्काल आदेश दिए, जिसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने अवैध होर्डिंग्स को हटाकर रास्तों को साफ किया।
शहर की सुंदरता और राजस्व से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
निगम की इस कार्रवाई से विज्ञापन जगत के उस सिंडिकेट पर लगाम कसी गई है, जो रसूख के दम पर सरकारी खजाने में सेंध लगा रहा था। विजय नगर से बापट चौराहे के बीच हुई इस सफाई ने साफ संदेश दिया है कि अब शहर की सुंदरता और राजस्व से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निगम प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह महज शुरुआत है,आने वाले दिनों में उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी जिन्होंने इस घोटाले पर अपनी आंखें मूंद रखी थीं। फिलहाल, शहर के प्रमुख चौराहों से अवैध यूनिपोल का हटना जनता और सत्य की जीत मानी जा रही है।
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