सम्राट का राजतिलक: चुनाव में जो अमित शाह ने बोला; वो कर दिखाया
KHULASA FIRST
संवाददाता

40 साल की साधना, बिहार में आज से भाजपा युग की शुरुआत
पंचमुखी हनुमानजी के पूजन-पाठ के बाद लोकभवन में ली 24वें मुख्यमंत्री पद की शपथ
नीतीश की पसंद को भाजपा ने किया मंजूर, राजद-जदयू की पृष्ठभूमि के हैं चौधरी
कर्पूरी ठाकुर के बाद बिहार के इतिहास में 56 साल बाद कोई डिप्टी सीएम बना मुख्यमंत्री
जदयू के वरिष्ठ नेता विजेंद्र कुमार यादव, विजय चौधरी ने ली डिप्टी सीएम पद की शपथ
नीतीश कुमार के पुत्र निशांत को लेकर सस्पेंस बरकरार, तमाम कयास पलटे, नहीं बने डिप्टी सीएम
नीतीश कुमार के रहते 5 महीने पहले अमित शाह ने जो वादा किया था, वह पूरा किया
बिहार में गरिमामय सत्ता परिवर्तन कर भाजपा ने अन्य दलों को बताया, कैसे निभता है गठबंधन धर्म
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राजनीतिक रूप से देश के सबसे ‘जाग्रत’ प्रदेश बिहार में बुधवार सुबह 11 बजे से भाजपा के युग का श्रीगणेश हो गया। 40 साल से भी ज्यादा लंबे समय से चल रही कमलदल की साधना व प्रतीक्षा को मुकाम और प्रदेश को पहला भाजपा का मुख्यमंत्री मिल गया। शपथ समारोह के जरिये सम्राट चौधरी का बतौर सीएम बिहार लोकभवन में ‘राजतिलक’ हो गया। कार्यक्रम सादा था, लेकिन सत्ता परिवर्तन का पल बेहद खास था।
बिहार से 37 साल बाद लालू-नीतीश युग का एक तरह से समापन हो गया। राजनीतिक रूप से राज्य के इस ‘युग परिवर्तन’ को समारोहपूर्वक मनाया नहीं गया।
इस परिवर्तन का साक्षी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनने आए, न बिहार के बगल के राज्य पश्चिम बंगाल में डेरा डाले अमित शाह शपथ समारोह में शामिल होने आए। भाजपा ने नीतीश की विदाई को समारोह के साथ न मनाने की रणनीति पर जोर दिया।
लिहाजा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान और विनोद तावड़े इस परिवर्तन के साक्षी बने। सुबह ठीक 10.50 बजे शपथ समारोह शुरू हुआ। राज्यपाल जनरल सैयद अता हसन ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई।
दो डिप्टी सीएम ने भी जदयू कोटे में शपथ ली। विजय चौधरी व विजेंदर यादव डिप्टी सीएम बनाए गए। बिहार में करीब 56 साल बाद कोई डिप्टी सीएम, सीएम बना। इसके पहले कर्पूरी ठाकुर (अब स्व.) 1970 में ऐसा करने वाले बिहार के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बने थे, जो पूर्व में उपमुख्यमंत्री रहे। उनके बाद आज सम्राट चौधरी ऐसा कर गुजरे और बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बने।
चौधरी नीतीश कुमार की सरकार में गृहमंत्री थे। दो डिप्टी सीएम नीतीश की पार्टी के बनाए गए हैं और दोनों ही नीतीश कुमार के खास हैं। विजेंद्र यादव और विजय चौधरी ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यादव जहां ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं तो चौधरी सवर्ण भूमिहार समाज से हैं।
बिहार के इस सत्ता परिवर्तन पर राज्य से विदा हो रहे नीतीश कुमार की ही छाया व छाप नजर आई। न सिर्फ डिप्टी सीएम, बल्कि सीएम सम्राट चौधरी भी नीतीश की पसंद हैं। भाजपा ने इस मामले में नीतीश की पसंद का ही मान रखा।
इसलिए राजद व जदयू पृष्ठभूमि के चौधरी की ताजपोशी स्वीकार की गई। बजाय किसी खांटी भाजपाई-संघी नेता के भाजपा ने चौधरी पर सहमति देकर गठबंधन धर्म का पालन किया और देश के अन्य दलों को बताया भी कि किस तरह गरिमामय तरीके से गठबंधन धर्म का पालन करते हुए सत्ता परिवर्तन किया जाता है।
साबित हो गया, मोदी-शाह पहले से ही सब तय कर रखते हैं
सम्राट चौधरी के पाटलिपुत्र में हुए राजतिलक से एक बार फिर ये साबित हो गया कि अमित शाह व नरेंद्र मोदी की जोड़ी सब कुछ पहले से ही तय कर रखती है। बिहार के इस सत्ता परिवर्तन की पटकथा भी इसी तरह दोनों नेताओं ने पूर्व में ही लिख ली थी।
ज्यादा समय हुआ नहीं। महज 5 माह पहले हुए बिहार के चुनाव के वक्त अमित शाह ने चौधरी के इलाके में सम्राट के लिए वोट मांगते वक्त स्थानीय मतदाताओं से कहा था कि आप सम्राट को विजयी बनाइए, हम इन्हें बड़ा आदमी बनाएंगे।
शाह ने ये बड़े बोल तब कहे थे, जब नीतीश कुमार ही बिहार चुनाव के बाद मुख्यमंत्री का चेहरा थे और एनडीए उनके ही चेहरे पर चुनाव लड़ रहा था। बावजूद इसके शाह ने दो-टूक 5 महीने पहले ही चौधरी को लेकर उनके ही विधानसभा क्षेत्र में कह दिया था कि सम्राट को अहम जिम्मेदारी दी जाएगी।
ऐसे ही दोनों नेताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के मामले में भी नितिन नवीन को सामने लाकर सबको चौंका दिया था। लिहाजा भाजपा में अब ये स्थापित होता जा रहा है कि मोदी-शाह आगे आने वाली तमाम राजनीतिक उठापठक का फ्रेमवर्क पहले से ही तैयार कर लेते हैं और उसके बाद वे खेल के मैदान में आते हैं।
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