युद्ध का असर बन रहा घातक: केमिकल-फार्मा और ऊर्जा इंडस्ट्री संकट में; दवा का कच्चा माल 200 प्रतिशत तक महंगा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
ईरान-इजराइल के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत की केमिकल, फार्मा और ऊर्जा इंडस्ट्री पर साफ दिखने लगा है। कच्चे माल की भारी कमी और कीमतों में तेज उछाल ने दवा उत्पादन और सप्लाई चेन को प्रभावित कर दिया है।
वैश्विक सप्लाई चेन को झकझोर दिया
मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक सप्लाई चेन को झकझोर दिया है, जिसका सीधा असर भारत के औद्योगिक सेक्टर पर पड़ रहा है। केमिकल, फार्मा और ऊर्जा इंडस्ट्री इस समय गहरे संकट से गुजर रही हैं। खासकर दवाइयों में इस्तेमाल होने वाले जरूरी केमिकल्स की कमी और महंगाई ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
‘पेंटा’ केमिकल बाजार में कम
एलपीजी, एसिडिटी और कफ सिरप जैसी रोजमर्रा की दवाओं के निर्माण में उपयोग होने वाला ‘पेंटा’ केमिकल बाजार में कम पड़ने लगा है। इसके चलते कच्चे माल की कीमतों में 50 से 200 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नतीजतन दवा उत्पादन प्रभावित हो रहा है और सप्लाई भी बाधित हो रही है।
विदेशों पर निर्भरता बनी बड़ी वजह
फार्मा, केमिकल और ऊर्जा क्षेत्र अपने कच्चे माल का करीब 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा मिडिल ईस्ट, चीन और अमेरिका जैसे देशों से आयात करते हैं। सामान्य परिस्थितियों में जो शिपमेंट 30 से 45 दिनों में पहुंचता था, वह अब 60 से 90 दिन ले रहा है। इसके साथ ही शिपिंग लागत भी 3 से 4 गुना तक बढ़ गई है।
प्रतिबंधों के कारण भुगतान अटक गया
ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के सदस्य के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में बैंकिंग लेनदेन पर लगे प्रतिबंधों के कारण भुगतान अटक गया है, जिससे पुराना पैसा फंसा हुआ है और नई सप्लाई में भी दिक्कत आ रही है।
एलपीजी बनाम दवा: बढ़ी दुविधा
पेंटा और प्रोपेलीन ग्लायकोल जैसे इंटरमीडिएट केमिकल एलपीजी और दवाओं दोनों में इस्तेमाल होते हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार फिलहाल एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता दे रही है, जिसके कारण दवा उद्योग को इन केमिकल्स की सीमित उपलब्धता मिल रही है।इसका असर शुगर, ब्लड प्रेशर और अन्य जरूरी दवाओं की सप्लाई पर भी पड़ने लगा है, जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।
सरकार के प्रयास
बेसिक ड्रग डीलर्स एसोसिएशन, मध्य प्रदेश के अध्यक्ष जेपी मूलचंदानी के अनुसार, सरकार ने दवाओं के कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी शून्य करने का फैसला लिया है। हालांकि, मौजूदा हालात में इसका असर आने में अभी समय लग सकता है।
स्थिति गंभीर, आगे चुनौती बड़ी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहा, तो दवा उद्योग के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में भी संकट और गहरा सकता है। आने वाले दिनों में दवाओं की कीमतों और उपलब्धता पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
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