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चिंटू चौकसे के बाप की जागीर नहीं है कांग्रेस: वे तो महज एक प्यादे हैं; रुबीना खान का पलटवार

KHULASA FIRST

संवाददाता

10 अप्रैल 2026, 6:06 pm
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चिंटू चौकसे के बाप की जागीर नहीं है कांग्रेस

हर कार्यक्रम में वंदे मातरम् का गायन अनिवार्य : कांग्रेस

वंदे मातरम् को लेकर ‘कट्टरपंथी मानसिकता’ गंभीर चिंता का विषय

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
वंदे मातरम् की अनिवार्यता को लेकर छिड़ा विवाद अब इंदौर कांग्रेस में आंतरिक टकराव में बदल गया है। पार्षद रुबीना इकबाल खान ने शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के निर्देश के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कड़े शब्दों में अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

यह पार्टी कमलनाथ और जीतू पटवारी की है चौकसे हमें निकालने वाले कौन होते हैं?

रुबीना ने कहा कि कांग्रेस पार्टी चिंटू चौकसे के बाप की जागीर नहीं है, वे केवल एक प्यादे के समान हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पार्टी राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कमलनाथ और जीतू पटवारी की है, अकेले चौकसे की नहीं।

उन्होंने चिंटू चौकसे की वरिष्ठता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब वे गलियों में गिल्ली-डंडा खेला करते थे, तब से उनका परिवार कांग्रेस के लिए अपना जीवन समर्पित कर चुका है। उन्होंने कहा कि उनके पति पिछले कई वर्षों से राजनीति में सक्रिय हैं और वे स्वयं भी तीन बार की पार्षद हैं।

चौकसे द्वारा कार्यकर्ताओं को मीटिंग से बाहर रखने की बात पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि हमें बाहर निकालने की ताकत चौकसे में नहीं है। वे घमंड में आकर ऐसी बातें कर रहे हैं, जबकि उन्हें यह भी नहीं पता कि कल वे अध्यक्ष रहेंगे भी या नहीं।

महिला पार्षद ने आरोप लगाया कि चिंटू चौकसे वंदे मातरम् के नाम पर एक विशेष वर्ग और पूरी कौम को टारगेट कर रहे हैं, जो पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि हम जन-गण-मन का पूरा सम्मान करते हैं और उसके लिए हमेशा खड़े होते हैं, लेकिन किसी से जबरदस्ती कोई नारा लगवाना गलत है।

रुबीना खान के मुताबिक, चौकसे अपनी ही नाव में छेद कर रहे हैं और कांग्रेस को पीछे धकेल रहे हैं। इस बयान के बाद इंदौर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और पार्टी के भीतर का असंतोष खुलकर सामने आ गया है।

शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा- राष्ट्रगीत से परहेज करने वाले बैठकों से रहें दूर...
शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने पार्टी की कार्यप्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अब इंदौर में कांग्रेस की प्रत्येक बैठक और कार्यक्रम की शुरुआत अनिवार्य रूप से ‘वंदे मातरम्’ के साथ की जाएगी। चौकसे ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों को वंदे मातरम् गाने में आपत्ति है, वे कांग्रेस की मीटिंग में शामिल न हों।

चौकसे ने कहा कि देश में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को अपनाने का कार्य कांग्रेस ने ही किया था। आजादी के आंदोलन के समय कांग्रेस का हर सम्मेलन और छोटी बैठक वंदे मातरम् के उद्घोष के साथ ही शुरू होती थी। उन्होंने कहा कि यदि आज पार्टी के भीतर कोई व्यक्ति वंदे मातरम् बोलने में समस्या बताता है, तो यह अनुचित है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धर्म की मान्यताओं से पहले राष्ट्र आता है और हमें हमेशा राष्ट्र को सर्वोपरि मानकर ही कार्य करना चाहिए। दलीय राजनीति को राष्ट्र से ऊपर नहीं रखा जा सकता। चौकसे के अनुसार, अब इंदौर में कांग्रेस के हर आयोजन का शुभारंभ वंदे मातरम् से और समापन राष्ट्रगान जन-गण-मन के साथ होगा।

उन्होंने कहा कि कोई भी धर्म देश के सम्मान का गान करने से नहीं रोकता, इसलिए राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के प्रति व्यवहार में असम्मान का भाव कतई नहीं होना चाहिए।

भाजपा विधायक पुत्र एकलव्य सिंह गौड़ का तीखा हमला
बजट सत्र में वंदे मातरम् को लेकर छिड़े विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। भाजपा विधायक पुत्र एकलव्य सिंह गौड़ ने सोशल मीडिया के जरिए कांग्रेस और कथित कट्टरपंथी सोच पर तीखा हमला बोलते हुए कई विवादित बयान दिए हैं।

सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा विवाद: गौड़ ने कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान के मीडिया बयान को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा कि नगर निगम के बजट सत्र में वंदे मातरम् को लेकर जो ‘कट्टरपंथी मानसिकता’ सामने आई है, वह गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मदरसों की शिक्षा से उपजी यह सोच कांग्रेस के साथ केवल तब तक रहती है, जब तक उसे कोई ‘कट्टरपंथी सरपरस्त’ नहीं मिल जाता।

पश्चिम बंगाल का उदाहरण देकर कांग्रेस पर निशाना: गौड़ ने अपने बयान में पश्चिम बंगाल की राजनीति का हवाला देते हुए कहा कि जब क्रिकेटर युसूफ पठान टीएमसी उम्मीदवार बने, तब कट्टरपंथियों ने अधीर रंजन चौधरी को चुनाव में हरा दिया।

उन्होंने इसे कांग्रेस के लिए चेतावनी बताते हुए कहा कि यह स्थिति केवल इंदौर तक सीमित नहीं है। भाजपा नेता ने असदुद्दीन ओवैसी का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे नेताओं की विचारधारा देश के लिए खतरनाक है और उनकी पार्टी से जीतकर आने वाले जनप्रतिनिधियों के व्यवहार पर सवाल उठाए।

अपने बयान के अंत में गौड़ ने सनातन समाज को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें ‘जागने’ की जरूरत है और कथित तौर पर देश विरोधी सोच रखने वालों से सावधान रहना चाहिए।

भाजपाई पहुंचे एमजी रोड थाने एफआईआर के लिए दिया ज्ञापन
वंदे मातरम् विवाद में कल भाजपा पार्षदों का दल एमजी रोड थाने पहुंचा और थाना प्रभारी को ज्ञापन देकर दोनों कांग्रेस पार्षदों रूबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की। पार्षदों ने थाना परिसर में जमकर नारेबाजी की।

जिसके बाद वंदे मातरम् का सम्मान करते हुए थाना परिसर के अंदर ही वंदे मातरम् का गान किया। वंदे मातरम् का गान करने के बाद पार्षद कमल वाघेला ने थाना प्रभारी विजयसिंह सिसौदिया को ज्ञापन सौंपा। सिसौदिया ने कहा कि मामले की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भी दी जा चुकी है। इससे पूर्व पार्षद संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े से मिले और सभापति मुन्नालाल यादव का पत्र सौंपा जिसमें पूरे मामले की जांच कर कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम को पद से हटाने का आग्रह किया गया है। पत्र में लिखा था कि बजट सम्मेलन में कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का अपमान करते हुए गीत गाने से इनकार किया।

दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी देश भक्तों के साथ हैं या देशद्रोहियों के: महापौर
किसी भी पंथ या धार्मिक मान्यता से बड़ा देश होता है। देश के लिए मान, सम्मान और स्वाभिमान बढ़ाने वाले गीत-संगीत या उनके स्मारकों का सम्मान करना हम सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। राष्ट्र गीत गाना या नहीं गाना किसी की व्यक्तिगत इच्छा हो सकती है, लेकिन उसका अपमान करने का अधिकार किसी को नहीं है।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने यह बात वंदे मातरम गीत न गाने और उसका अपमान करने के बाद उपजे विवाद के बाद कही। सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का इस मुद्दे पर क्या रुख है, साथ ही, चिंटू चौकसे और केके मिश्रा द्वारा कही गई बातों पर दिग्विजय सिंह क्या सोचते हैं, यह भी स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए। यह भी स्पष्टता से आना चाहिए कि कांग्रेस देशभक्तों के साथ है या देशद्रोहियों के साथ है।

एबीवीपी ने प्रदर्शन कर महापौर को ज्ञापन सौंपा
निगम के बजट सम्मेलन में वंदे मातरम् गान नहीं गाने से विवादों से घिरी महिला कांग्रेसी पार्षद के खिलाफ एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। निगम मुख्यालय में प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओ ने महिला पार्षद को हटाने की मांग को लेकर महापौर को ज्ञापन सौंपा।

नगर निगम के बजट सम्मेलन से शुरु हुआ वंदे मातरम् विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और कांग्रेसी महिला पार्षद के खिलाफ नारेबाजी कर उसे हटाने की मांग को लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव को ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शनकारी एबीवीपी कार्यकर्ताओं का कहना है कि वंदे मातरम् का अपमान करने वाली कांग्रेस की महिला पार्षद के खिलाफ कार्रवाई कर उनको हटाया जाए। प्रदर्शनकारी एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने महापौर को ज्ञापन सौंपने के बाद निगम परिसर मैं सामूहिक वंदे मातरम् गाया, जिसमें महापौर भी शामिल हुए।

गौरतलब है कि वंदे मातरम् गान नहीं गाने का विवाद गहराने से महिला पार्षद को कांग्रेस से निष्कासित करने का दावा भी किया जा रहा है। वही भाजपाई पार्षदों ने संभागायुक्त को भी पत्र सौपकर कार्रवाई की मांग की है। इससे मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

धर्म का नहीं, वंदे मातरम् देश का प्रतीक है...
इं दौर में वंदे मातरम् को लेकर जमकर रार चल रही है। कांग्रेस के कुछ पार्षद इसे इस्लाम के खिलाफ बताकर इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इसे गाना उनके लिए जरूरी नहीं है, वहीं भाजपा के नेता इसे राष्ट्रगीत का अपमान बता रहे हैं।

मुझे ये समझ नहीं आ रहा आखिर इसका विरोध क्यों किया गया। और सबसे बड़ा आश्चर्य जो विरोध कर रहे थे वो बरसों से नगर निगम की बैठकों में भाग लेते रहे हैं, जिसकी शुरुआत हमेशा से ही वंदे मातरम् से होती है। पहले उन्होंने कभी इसका विरोध क्यों नहीं किया..।

ये सवाल मेरे जहन को कल से हिला रहा है। यदि इसे इस्लाम के खिलाफ मानकर विरोध किया गया तो फिर मुझे कुरान की सुरह अन निसा (4:58) और (4:59) का मतलब भी ये लोग समझा दें। अरबी में सुरह अन निसा (4:58) -

إِنَّ اللَّهَ يَأْمُرُكُمْ أَن تُؤَدُّوا الْأَمَانَاتِ إِلَى أَهْلِهَا وَإِذَا حَكَمْتُمْ بَيْنَ النَّاسِ أَن تَحْكُمُوا بِالْعَدْلِ إِنَّ اللَّهَ نِعِمَّا يَعِظُكُم بِهِ إِنَّ اللَّهَ كَانَ سَمِيعًا بَصِيرًا

जिसका हिंदी में अर्थ करें तो होता है-निश्चित ही अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि अमानतों (जिम्मेदारियों, अधिकारों) को उनके असली हकदार को सौंपों, और जब तुम लोगों के बीच न्याय करो तो सत्य और न्याय के साथ न्याय करो। अल्लाह तुम्हें यह कितना अच्छा उपदेश देता है!

निश्चय ही अल्लाह सुनने वाला और देखने वाला है। इसमें अमानत का मतलब इंसान को दी गई संपत्ति, पद, अधिकार या समाज में जिम्मेदारी सभी शामिल हैं। वहीं न्याय का अर्थ बताया गया है कि किसी विवाद या फैसले में सत्य और न्याय के साथ निर्णय लेना परम आवश्यक है।

इसका मलतब है कि यदि कि कानून, शासन और प्रतीकों का सम्मान भी उसी न्याय का हिस्सा है। इस आयत का मतलब देश, कानून और समाज की व्यवस्था का सम्मान करना इस्लाम में न्याय और अमानत का पालन माना जाता है। अरबी में सुरह अन निसा (4:59) -

يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا أَطِيعُوا اللَّهَ وَأَطِيعُوا الرَّسُولَ وَأُولِي الْأَمْرِ مِنكُمْ ۖ فَإِن تَنَازَعْتُمْ فِي شَيْءٍ فَرُدُّوهُ إِلَى اللَّهِ وَالرَّسُولِ إِن كُنتُمْ تُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الْآخِرِ ۚ ذَلِكَ خَيْرٌ وَأَحْسَنُ تَأْوِيلً

जिसका हिंदी में मतलब होता है...हे ईमानवालों! अल्लाह की आज्ञा मानो, रसूल (नबी) की आज्ञा मानो और जो लोग सत्ता में हैं (अधिकारियों/शासकों) उनकी आज्ञा मानो। और यदि किसी चीज में आपस में विवाद हो तो उसे अल्लाह और उसके रसूल के पास लौटाओ, यदि आप अल्लाह और आखिरत के दिन पर विश्वास रखते हो।

यह (सबसे) अच्छा रास्ता है। इसका मतलब है कि पैगंबर और कुरान को मानने वालों को कानून का पालन करने की हिदायत दी गई है। यानी समाज और देश की व्यवस्था का सम्मान करना जरूरी है। नगर निगम की इस परिषद में भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई 36 मौतों को लेकर चर्चा होनी थी।

तो क्या इन्हें उस समय कुरान की सूरह अन-निसा 4 : 75 (“क्यों नहीं तुम अल्लाह की मार्ग पर लड़ते हुए और मजलूमों को अत्याचार से बचाओ) और हदीस अल-हक़ीह अल-मुस्लिम (जो मजलूम के मामले में खड़ा होता है और उसके अधिकार दिलाने की कोशिश करता है, वह जन्नत के करीब होता है।) याद नहीं आई। क्या इन्हें मानना मोमिन होने की निशानी नहीं थी।

वैसे भी जिस वंदे मातरम का ये विरोध कर रहे हैं, इन लोगों को शायद ये पता नहीं है कि इसे राष्ट्रगीत का दर्जा देने वाली संविधान सभा में तीन मुस्लिम सदस्य भी थे जिनमें मौलाना अबुल कलाम आजाद, मोहम्मद सादुल्ला और ताजमुल हुसैन भी थे।

जिसमें अबुल कलाम आजाद जो कि देश के पहले शिक्षा मंत्री थे वो भी शामिल थे। जिन्होंने अरबी, फारसी, हदीस, और फिक्ह (इस्लामी न्यायशास्त्र) में विशेषज्ञता हासिल की और 16 बरस की उम्र में आलीम बन गए थे। उन्होंने वंदे मातरम के शुरुआत के दो हिस्सों को इस्लाम के खिलाफ नहीं माना था।

लेकिन आज के नेता इसे गलत बता रहे हैं। इन तीनों की मर्जी से ही संविधान सभा ने वंदे मातरम को राष्ट्रगीत माना था। इन नेताओं के हिसाब से वंदे मातरम को ये नहीं गा सकते लेकिन यदि इन्हें सांसद का टिकट दे दिया जाए तो ये लडऩे के लिए तैयार हो जाएंगे। जबकि संसद के हर सत्र के अंत में वंदे मातरम गाया जाता है।

इसकी शुरुआत भी कांग्रेस के प्रधानमंत्री नरसिंहाराव के समय ही हुई थी। लेकिन उस समय नेताओं को ये मंजूर होगा क्योंकि संसद के तौर पर जो सुविधाएं मिलती हैं वो इन्हें प्यारा होगा। क्या भारत की संसद में मौजूद बाकी मोमिन सांसद वंदे मातरम् नहीं गाते? क्या उनके लिए वंदे मातरम् गलत है।

भारत की संसद में कुछ समय पहले शीत सत्र के दौरान वंदे मातरम के 150 साल पुरे होने पर जो विशेष सत्र बुलाया गया था, उसमें दोनों ही पार्टियों के नेता शामिल थे उन्होंने अपनी बात रखी थी। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हम सबको गर्व है कि हम एक ऐसे देश में रहते हैं, जहां हम अपनी मातृभूमि की पूजा करते हैं और ‘वंदे मातरम्’ को अपनाते हैं।

यह गीत देश की एकता और अखंडता का प्रतीक है, और इसके प्रति हमारा सम्मान अद्वितीय है। वहीं प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा था कि “हमारे लिए वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं है, यह हमारे देश की आत्मा है। इस गीत ने हमेशा हमें एकजुट किया है, चाहे वो किसी भी धर्म, जाति या क्षेत्र का हो।

“वंदे मातरम् का विरोध नहीं किया गया है, लेकिन हमें इसे समझने और सम्मान देने की जरूरत है, जैसा कि हमारे पूर्वजों ने किया था।” वहीं गौरव गोगोई ने कहा था “आज हमें यह समझने की जरूरत है कि वंदे मातरम् की राजनीति में सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि यह हमारे इतिहास और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण का भी हिस्सा है।

जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि हमारे लिए वंदे मातरम् का सम्मान करना कोई राजनीति नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की भावनाओं और राष्ट्रीयता का हिस्सा है। जब इनके नेता ही इसका सम्मान कर रहे हैं तो फिर इन नेताओं को राष्ट्रगीत का सम्मान करने में क्या दिक्कत है।

ये राष्ट्रगीत का सम्मान नहीं करने से ज्यादा खुद की नेतागिरी को चमकाने का खेल ज्यादा समझ आ रहा है। क्योंकि वंदे मातरम् तो आजादी के पहले से ही कांग्रेस के हर कार्यक्रम का मूल भाग था। फिर ये लोग इसका आज क्यों विरोध कर रहे हैं। इनके इस विरोध का असर कुछ हो न हो, लेकिन इससे शहर के गंदे पानी की समस्या पर बहस नहीं हो पा रही है।

इन नेताओं की हरकत शहर को कितनी भारी पड़ रही है, ये जनता भी देख रही है, लेकिन क्या जनता इस खेल को समझेगी, जो दोनों दल मिलकर खेल रहे हैं। यदि जनता समझदार हुई तो इन्हें इसकी सजा जरुर मिलेगी।

अटकलें तेज हुईं रुबीना इकबाल खान औवेसी की पार्टी में जाएंगी, पदाधिकारी मिले
नगर निगम के बजट सत्र में वंदे मातरम गाने से इंकार करने वाली कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम का समर्थन करने वाली पार्षद रूबीना इकबाल खान अब असदद्दीन औवेसी की पार्टी एआईएमआईएम में शामिल हो सकती हैं। कल पार्टी के पदाधिकारियों ने उनसे मुलाकात की और पार्टी में आने का न्यौता दिया।

रूबीना ने कहा कि हम तो औवेसी की पार्टी में चले जाएंगे। रुबीना ने ये भी कहा कि कांग्रेस पार्टी जो भी निर्णय लेगी, मुझे स्वीकार होगा। रखेंगे तो ठीक है, नहीं रखेंगे या निकाल देंगे तो भी कोई बात नहीं। मैं हर फैसले के लिए तैयार हूं। मुझे अपने नसीब और ऊपर वाले पर भरोसा है।

हो सकता है कि मैं विधानसभा चुनाव लड़ूं और अगर लड़ूंगी तो निर्दलीय लड़ूंगी। रूबीना ने ये भी कहा कि कांग्रेस से बाहर निकालने वाले चिंटू चौकसे होते कौन हैं। यह उनकी नहीं राहुल गांधी की पार्टी है। मुझे पीसीसी से लेटर आएगा तो बात रखूंगी। मुझे तो ओवैसी की पार्टी से न्यौता आ गया है।

औवेसी की पार्टी के नेता पहुंचे: कल रूबीना से मिलने और उन्हें पार्टी में शामिल होने का न्यौता देने औवेसी की पार्टी के पदाधिकारी उनके घर पहुंचे। इनमें प्रदेशाध्यक्ष मोहसिन अली, सहसचिव मो. रफीक अंसारी, समीर अंसारी, मुबाशिशिर अंसारी, असलम उस्ताद आदि शामिल थे।

अली ने कहा कि रूबीना से बात हो गई है। वो हमारे संपर्क में हैं। कांग्रेस के कुछ और बड़े मुस्लिम नेताओं से भी बात चल रही है। हम रूबीना और फौजिया शेख अलीम के बयानों का समर्थन करते हैं। हमारी पार्टी में सबको बराबरी, समानता, हक, इंसाफ की बात होती है। पार्टी जल्द ही उनकी ज्वाइनिंग कराएगी।

इनके अलावा कई पार्षद हैं जो हमारे संपर्क में हैं। कांग्रेस के अन्य कई बड़े नेता भी हमारे संपर्क में हैं। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, खरगोन और खंडवा के साथ ही अन्य एक दो शहरों के कांग्रेस पदाधिकारी संपर्क में हैं। भाजपा का कोई नेता हम नहीं लेंगे क्योंकि उनकी विचारधारा अलग है।

मुस्लिम पार्षदों ने बना रखी है दूरी: कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस में खींचतान लंबे समय से है। वह अब खुलकर बाहर आई है। पार्टी का एक धड़ा चिंटू चौकसे के साथ है तो दूसरा मुस्लिम नेताओं का है। संगठन सृजन के बाद से ही कांग्रेस के अधिकतर मुस्लिम पार्षद दूरी बनाकर बैठे हुए हैं।

बजट सत्र के दौरान भी कांग्रेस के मुस्लिम पार्षदों (फातमा रफीक खान, रुखसाना अनवर दस्तक, सुनहेरा अंशाफ अंसारी, अयाज बैग और शाहीन शाजिद खान) ने पूरे सत्र से दूरी बनाकर रखी थी।

फौजिया नहीं जाएंगी कांग्रेस छोड़कर: कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने कहा कि दोनों पार्टियों को विकास पर बात करनी चाहिए। शहर हित सबसे पहले हैं। कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष शेख अलीम ने कहा कि हम कांग्रेस में ही रहेंगे।

हमारा औवेसी की पार्टी से लेनादेना नहीं। कांग्रेस नेता अमीनुल खान सूरी ने कहा कि चौकसे का बयान तानाशाहीपूर्ण है। वंदे मातरम् को ‘अनिवार्य’ करना एक बड़ी भूल है। देशभक्ति दिल से होती है, किसी पर थोपी नहीं जाती।

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